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MeToo # टैग

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#MeToo का असर भारतीय समाज में जिस तरह से फैला है यह इस बात का जीता जागता प्रमाण है कि कितनी महिलाएं जो सामाजिक परिवेश, अपने रुतबे या सामने वाले के रुतबे के कारण चुप थी. अब जैसे उनका आक्रोश फूट पड़ा. पहले जब भी वे दुनिय़ा को चीख चीख कर बताना चाहती थी और अगर कुछ ने बताने की कोशिश भी की तो उनकी आवाज दबा दी गई. परन्तु आज का सोशल मीडिया इतना शक्तिशाली है कि किसी को भी कुछ कहने के लिए किसी की इजाजत नहीं लेनी पड़ती है और वह अपने विचार समाज के सम्मुख रखने में स्वतंत्र हैं. #MeToo हाई लेवल की कामकाजी महिलाओं के लिए सुरक्षा कवच की तरह काम कर रहा हैं. अब वह चाहे सरकारी नौकरी में हो या प्राईवेट महिलाएं इसे एक हथियार की तरह लेकर चल रही है और पुरुष वर्ग भी भयभीत हैं कि कब कौन सी शिकायत उनके खिलाफ दर्ज हो जाए और उनकी इज्जत की धज्जियां उड़ जाए. परन्तु #MeToo की चमक दमक केवल उच्च वर्गीय स्तर तक ही सीमित है. निचले वर्ग में आज भी वैसा ही माहौल है. सुबह अखबार के हर पन्ने पर रेप की खबरों का होना आम बात हैं. जब तक भारत के समाज में महिलाओं को इज्जत व बराबर की दॄष्टि से नहीं देखा जाएगा, उचित शिक्षा नहीं दी जाएगा तब तक उनका असुरक्षित होना व अपनी सुरक्षा के प्रति सजग रहना उनका स्वयं का ही कर्तव्य बन जाता है.

हम उस समाज में रहते हैं, जहां महाभारत में द्रौपदी की खींची जा रही साड़ी को रोकने के लिए गांधारी आंख की पट्टी हटाकर कुछ नहीं बोलती। लेकिन जब उसी 'बलात्कार' की कोशिश करते बेटे दुर्योधन की जान बचानी होती तो वो आंख की पट्टी खोल देती है। प्रतिज्ञाओं की आड़ में महाभारत से लेकर 2018 के भारत में महिलाओं के शोषण पर ख़ामोशी बरती जा रही है। मगर स्वयं के खिलाफ शोषण की यह खामोशी बीच-बीच में टूटती अवश्य है। ऐसी ही खामोशी टूटने का नाम मीटू मूवमेंट हैं। खामोशी का ट्रिगर दबाने की असली वजह शायद "पानी का सिर के ऊपर आना है", जिसके चलते शायद हॉलीवुड हीरोइनें, भारत में किसी भी ग्रेड की कोई फिल्मी कलाकार, स्कूली बच्चियां या अब महिला पत्रकार चीखकर कह रही हैं- हां, मेरे साथ कुछ ग़लत हुआ था। अभी दो मिनट पहले… दस, तीस साल पहले या मेरे पैदा होने के कुछ साल बाद।

हमारे देश में कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न एक आम समस्या बन चुकी है। कामकाजी महिलाओं का ऐसा उत्पीड़न एक घिनौना व्यवहार है, जो उसे अंदर तक झकझोर कर रख देता है। एक अध्ययन के मुताबिक करीब 46।58 प्रतिशत महिलाओं को कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है, जबकि 25।17 प्रतिशत महिलाओं के साथ अवांछित व्यवहार होता है। एक महिला के साथ बॉस, सहकर्मियों अथवा पर्यवेक्षकों द्वारा यौन उत्पीड़न या किसी भी प्रकार का शारीरिक, मानसिक तथा व्यवहारिक उत्पीड़न एक दंडनीय अपराध है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।

15 अक्टूबर 2017 को जब यौन हिंसा के खिलाफ मीटू अभियान शुरू हुआ। देखते ही देखते 85 देशों में इस हैशटैग के साथ प्रतिक्रियाएं व्यक्त की गईं। भारत, पाकिस्तान, ब्रिटेन, फिलीपींस, चीन आदि कई देशों में लोगों ने नामजद अनुभव शेयर किए। यूरोप की संसद में #MeToo के अभियान के जवाब में एक सत्र बुलाया गया। ब्रिटेन में #MeToo के आधार पर लगी शिकायतों पर जांच अधिकारी बिठाए गए। साल भर पहले दुनियाभर में चर्चा का विषय बना #MeToo अब भारत में दस्तक दे चुका है। भारत में बॉलीवुड, मीडिया जैसे क्षेत्रों से कई महिलाएं सामने आकर #MeToo के साथ अपने साथ हुए यौन उत्पीड़न की बातें सामने रख रही हैं। भारत में बॉलीवुड, मीडिया से होता हुआ यह अभियान राजनीति तक पहुंच गया है। महिलाओं के साथ हुई यौन प्रताड़ना, हिंसा और शोषण के दोषी लोगों के नाम उजागर करने वाले इस हैशटैग को अभियान बनाने में जुटे लोगों को 'द साइलेंस ब्रेकर्स' नाम दिया। टि्वटर से शुरू हुआ यह अभियान बाद में सोशल मीडिया के कई प्लेटफार्म पर जारी रहा, जो अब भारत पहुंच चुका है।

तनुश्री दत्ता द्वारा अभिनेता नाना पाटेकर पर यौन उत्पीडऩ का आरोप लगाने के बाद भारत में मीटू मूवमेंट शुरू हुआ है। अगर हम कहते हैं कि महिला या बच्ची का उत्पीडऩ सिनेमा में ही हो रहा है तो मुझे ऐसा नहीं लगता है। यह पूरे समाज में फैला है। एक तरफ समाज में जहां चार व आठ वर्षीय बच्चियों के साथ यौन उत्पीडऩ के मामले सामने आ रहे है।'' नाना के बाद बॉलीवुड में सिंगर कैलाश खेर, डायरेक्टर विकास बहल, एक्टर रजत कपूर, एक्टर आलोक नाथ जैसे बड़े नाम मीटू अभियान के साथ उजागर हुए हैं। इनके अलावा कॉमेडी ग्रुप एआईबी में काम करने वाले एक कॉमेडियन पर भी आरोप लगे हैं। इस अभियान की जद में बॉलीवुड की कई हस्तियां तो हैं ही, मंत्री और पत्रकार भी आ गए हैं। देश-दुनिया में आज मीटू कैंपेन के तहत लाखों लड़कियां आगे आकर आपबीती सुना रही हैं।

ऐसा नहीं है कि इससे पूर्व ऐसी आवाज किसी ने नहीं उठाई। या महिलाओं ने स्वयं पर हुए शारीरिक शोषण की बात नहीं की परन्तु इससे पूर्व जब भी ऐसा कहा गया तो महिलाओं की बातों पर अविश्वास कर उसे खामोश कर दिया गया।

आज मीटू मूवमेंट शोषित महिलाओं के अग्रणी चेहरे के रुप में सामने आ रहा हैं , तनुश्री दत्ता के बेबाक हौसले की वजह से ही कई दूसरी अंजान महिलाओं व जानी-पहचानी अभिनेत्रियों ने आगे बढ़कर बालीवुड में व्याप्त यौन हिंसा व बलात्कार की प्रवृत्ति की कलई खोली हैं। यही वजह है कि तनुश्री दत्ता की आपबीती व आरोपों को हिंदुस्तानी मीटू मूवमेंट की शुरुआत कहा जा रहा है। यह स्कैंडल उदाहरण है कि कैसे एक महिला का साहस कई अभिनेत्रियों को आगे आने का साहस दे सकता है और सब मिलकर एक पूरे इस्टेब्लिशमेंट की चूलें हिला सकती हैं। यहां तक कि विश्व की सबसे ताकतवर फिल्म इंडस्ट्री हॉलीवुड को अपने तौर-तरीके बदलने पर मजबूर कर सकती हैं। और औरतों के बारें में ऐसी सोच को ठेंगा दिखा रही हैं कि 'औरत हो, औरत की तरह रहो'।

मीटू मूवमेंट की आड़ में उच्चमहत्वाकांक्षी महिलाएं फायदा उठाने की कोशिश भी कर सकती हैं। इस मूवमेंट पर एक्शन लेने वाली संस्थाओं को इस बात का भी ध्यान रखना होगा। पुरुष हो या महिला अन्याय किसी के साथ भी नहीं होना चाहिए। ऐसा नहीं है कि यह मूवमेंट केवल महिलाओं के शारीरिक शोषण के खिलाफ ही हैं आज इसमें कई पुरुषों ने भी स्वयं पर हुए शारीरिक शोषण के बात कही हैं। इस मूवमेंट में इन लोगों पर आरोप सामने आ चुके हैं- नाना पाटेकर, आलोक नाथ, विकास बहल, रजत कपूर, कैलाश खेर, वैरामुत्तु, एम मुकेश, अभिजीत भट्टाचार्य, वरुण गोवर, रघु दीक्षित…आदि।

आरोप लगाने वाली महिलाओं के नाम इस प्रकार हैं- तनुश्री दत्ता, विनता नंदा, पत्रकार प्रिया रमानी, पत्रकार प्रेरणा सिंह बिंद्रा, सिंगर सोना महापात्रा, फ्लाइट अटेंडेंट, एक्ट्रेस सलोनी चोपड़ा, मॉडल केट शर्मा इत्यादि.

हम सभी यह मानते है की जीवन की सभी घटनाएं ग्रहों के द्वारा नियंत्रित होती है। अनुभव में पाया गया है कि वर्ष 2017 और 2018 में महिलाओं के उत्पीडन और शोषण के मामले सबसे अधिक प्रकाश में आए हैं। ऐसी घटनाएं क्यों घटित होती हैं आईये इसके कारण ज्योतिषीय योगों में तलाशने का प्रयास करते हैं-

पक्ष बली परन्तु पाप प्रभाव से ग्रसित चन्द्र - चंद्रमा जातक की मानसिकता को दर्शाता है| यदि चन्द्र के पास पक्ष बल हो तो व्यक्ति की इच्छाएं अधिक होती है और वह उनका पूरा करने का प्रयास भी करता है। ऐसी स्थिति में यदि पाप ग्रहों का चन्द्र पर प्रभाव हो तो व्यक्ति बुरी और गलत विचारों की ओर अधिक आकर्षित होता है।

कमजोर शुक्र - शुक्र, व्यक्ति में रोमांस का स्तर दर्शाता है। यदि शुक्र बली हो तो व्यक्ति सभी से प्रेम करने वाला और कामुक होता है। परन्तु काम भावना सही दिशा में अग्रसित होती है। वहीं यदि शुक्र नीच का हो और उस पर राहू, मंगल का प्रभाव हो तो व्यक्ति की काम इच्छाएं बहुत ही अलग होती है। शुक्र का पाप प्रभाव में होना यह दर्शाता है की व्यक्ति की सोच सेक्स को लेकर अजीब होती है। काम सम्बन्ध एक ऐसा सम्बन्ध है जिसमें दोनों साथियो को सुख की अनुभूति होनी चाहिए। यदि एक साथी दुखी और वेदना में है तो दुसरे को सुख का अनुभव होना सामान्य रूप से असंभव है।

बली मंगल - मंगल साहस का कारक होता है। यदि मंगल का सम्बन्ध लग्न और लग्नेश से हो तो व्यक्ति साहसी होता है। साहस और दुस्साहस में थोडा ही अंतर होता है। यदि मंगल लग्न को देखें या शुक्र अथवा राहु के साथ हो तो व्यक्ति का साहस दुस्साहस में परिवर्तित होने की सम्भावना रहती है और गुरु अथवा बुध की दृष्टि लग्न/लग्नेश पर न हो तो यह योग घटित होती है।

राहू- राहू माया का प्रतिनिधित्व करता है। राहू बुद्धि को भ्रमित करता है, उस पर पर्दा डालता है। यदि राहू का सम्बन्ध लग्न से हो और लग्नेश कमजोर हो, तो व्यक्ति के भ्रमित होने की सम्भावना अधिक रहती है।

ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार चंद्र ग्रह का गोचर वॄश्चिक राशि में सदैव अशुभ फलदायक होता है। कुछ इसी तरह की स्थिति गुरु ग्रह के तुला और वॄश्चिक राशि में गोचर के समय उत्पन्न होती हैं। शास्त्रों में गुरु नैतिकता और न्याय का कारक ग्रह है और वृश्चिक राशि सेक्स का प्रतिनिधित्व करती है। इसके साथ ही यह राशि छुपे हुए संबंधों का भी संकेतक हैं। इन घटनाओं के विरुद्ध आवाज उठने के समय गुरु वॄश्चिक राशि में गोचर कर रहे हैं।

भारत वर्ष की कुंड्ली में कर्क राशि सबसे अधिक पीडित राशि हैं। 15 अक्तूबर 2017 के दिन जब इस मूवमेंट की शुरुआत हुई उस दिन शुक्र नीचस्थ राशि में मंगल के साथ विचरण कर रहा था और राहु से पीड़ित था। वर्तमान में राहु कर्क राशि पर गोचर कर रहा है, गुरु ग्रह और वॄश्चिक राशि दोनों राहु से पीडित हैं। कर्क राशि भारत वर्ष की मीडिया जगत की राशि हैं, इसमें राहु सूचनाओं को वायरल कर रहा हैं। इस समय शुक्र स्वराशि तुला और मंगल उच्च राशि मकर में गोचर कर रहे हैं। अत: महिलाओं का साहस बढ़ा हुआ है। जिसके फलस्वरुप वे अपनी आवाज उठाने में सफल रही हैं।

-ज्योतिष आचार्या रेखा कल्पदेव

8178677715

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