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अनेक कारण है केजरीवाल के हैट्रिक की संभावना के

अनेक कारण है केजरीवाल के हैट्रिक की संभावना के

शनिवार को दिल्ली विधानसभा चुनाव खत्म हो चुका है और मतदाताओं द्वारा तमाम सीटों पर खड़े उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला ई वी एम मशीनों में बंद हो चुका है | इस बार दिल्ली विधानसभा चुनाव में 62 प्रतिशत वोटिंग हुई है | अब 11 फरवरी को ईवीएम में कैद नतीजों से ये साफ होगा कि किसकी जीत हुई और कौन हार गया |चुनावी नतीजों से पहले एग्जिट पोल के नतीजे आ गए हैं, जो दिखा रहे हैं कि दिल्ली में अरविंद केजरीवाल ने हैट्रिक मार दी है | एग्जिट पोल के नतीजे चुनाव पूर्वानुमान के अनुसार है | एग्जिट पोल के अनुसार अरविंद केजरीवाल दिल्ली विधानसभा चुनाव में बहुमत से जीत रहे हैं| वहीं दूसरी ओर, भाजपा दूसरे नंबर पर जबकि कांग्रेस न के बराबर है | हालांकि भाजपा के नेताओं को अभी भी नतीजें आने व उनमें जीत की आशा हैं | वैसे एग्जिट पोल ने वही दिखाया है, जिसकी उम्‍मीद की जा रही थी| केजरीवाल का जीतना तय था और भाजपा ,कांग्रेस को हारना ही था| आश्‍चर्य इस पर भी होगा यदि कांग्रेस अपना खाता खोल पाई | इस एग्जिट पोल की कई बड़ी वजहें हैं| कांग्रेस ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में न के बराबर कोशिश की| आधे-अधूरे मन से तीन-चार दिन प्रियंका गांधी और राहुल गांधी ने कुछ सभाएं कीं|

उसमें भी केजरीवाल से ज्‍यादा उन्‍होंने भाजपा और मोदी पर फोकस रखा| राहुल गांधी का मोदी को 'डंडा मारने' वाला बयान तो एक उदाहरण है| कांग्रेस की इस खानापूर्ति का नतीजा ये हुआ कि भाजपा विरोधी वोट नहीं बंटे और आप को फायदा हुआ| ओपिनियन पोल तो पहले ही बता चुके थे कि कांग्रेस को 3-4 फीसदी वोट मिलने की उम्‍मीद है, और पिछली बार की तरह उसका वोट शेयर भी आम आदमी पार्टी की तरफ शिफ्ट हो गया |चुनाव से करीब 6 महीने पहले केजरीवाल ने मुफ्त बिजली और महिलाओं के लिए बस का सफर मुफ्त करने के ऐलान किए ,साथ ही पूरे कार्यकाल में मुफ्त पानी ने केजरीवाल को फायदा पहुंचाया| इसके अलावा दिल्‍ली के स्‍कूलों का बदला नक्‍शा भी केजरीवाल का प्रचार करता रहा| अरविंद केजरीवाल ने अपने पूरे चुनाव प्रचार में कोशिश भी यही की थी कि वह लोगों को अपने काम गिना सकें और काम के आधार पर ही लोगों से वोट मांग सकें| अरविंद केजरीवाल ने दिल्‍ली चुनाव में सकारात्मक प्रचार का तरीका वापरा | यह उनकी रणनीति का हिस्‍सा ही था कि उन्‍होंने प्रधानमंत्री मोदी पर कोई सीधा प्रहार नहीं किया| इतना ही नहीं, उन्होंने मोदी के खिलाफ उठाए गए किसी भी मुद्दे से खुद को दूर बनाए रखा| नतीजा ये हुआ कि भाजपा को भी पलटवार करने का मौका नहीं मिला| इधर कांग्रेस और भाजपा आपस में भिड़ते रहे और उधर इसका पूरा फायदा आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल को मिल गया |भाजपा को सबसे बड़ा नुकसान ये भी हुआ कि केजरीवाल के मुकाबले उसके पास कोई स्थानीय नेता नहीं था| केजरीवाल ने भी बड़ी होशियारी से इसे मुद्दा बना दिया कि यदि भाजपा किसी को मुख्य मंत्री पद का उम्‍मीदवार बनाए तो वह उसके साथ तमाम मुद्दों पर बहस को तैयार हैं| केजरीवाल ने पूरी दिल्‍ली को ये अहसास करवा दिया कि भाजपा के पास दिल्‍ली का नेतृत्‍व देने के लिए कोई नेता नहीं है| उन्होंने तो ये तक कहा कि जनतंत्र में जनता मुख्यमंत्री चुनती है, लेकिन अमित शाह कहते हैं कि मुख्मयंत्री वह चुनेंगे| इसके जरिए भी केजरीवाल ने लोगों का मन इस बात के लिए पक्का करना सुनिश्चित किया कि आम आदमी पार्टी को अधिक से अधिक वोट पड़ें| चुनाव में भाजपा की सबसे बड़ी फजीहत उसी के नेताओं ने की| भाजपा के नेताओं के विवादित बयानों ने उनकी छटपटाहट दिखाई जबकि होना यह चाहिए था कि वे अपने भाषणों में भाजपा द्वारा दिल्ली के लिए किए गए कामों का बखान करते | अब जो हो गया सो हो गया | मंगलवार को पता चलेगा कि ऊँट किस करवट बैठता है |

अशोक भाटिया


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