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बाल कथा: कैसे करें परीक्षा की तैयारी?

बाल कथा: कैसे करें परीक्षा की तैयारी?

वास्तव में विद्यार्थी की परीक्षा की तैयारी उसी दिन से शुरू हो जाती है, जिस दिन वह कक्षा में प्रवेश करता है। जब शिक्षक कक्षा में अपने विषय को पढ़ाते और समझाते हैं, तब उस समय विद्यार्थी को 'कैच' शक्ति की आवश्यकता होती है ताकि शिक्षक द्वारा पढ़ाये और समझाए जा रहे विषय में विद्यार्थी अपनी पकड़ मजबूत बना सके। ऐसे अनेक व्यक्ति संसार में हुए, जिन्होंने 'कैच करने की शक्ति से सफलता के शिखर को छुआ, अत: हमें भी 'कैच' करने की शक्ति को विकसित करना चाहिए किंतु इसके लिए एकाग्रता ही 'कैच' करने की शक्ति को विकसित कर सकती है।

कहने का तात्पर्य यह है कि जब हम कक्षा में हों, तब मन को एकाग्र कर 'कैच' करने की शक्ति को विकसित करना चाहिए और शिक्षक द्वारा पढ़ाये या समझाये जा रहे विषय को ग्रहण कर लेना चाहिए। ऐसा करने से परीक्षा की आधी तैयारी उसी समय हो जाती है और इसके बाद उसे पढ़कर दोहराने की जरूरत रह जाती है। हां, दोहराने का एक खास तरीका होना चाहिए। वह यही हो सकता है कि छुट्टी के बाद घर पहुंचकर खाना खाने और कुछ विश्राम करने के बाद स्वस्थ और एकाग्र मन से बैठकर कुछ देर सोचें कि आज कक्षा में क्या-क्या पढ़ाया गया? सोचने-विचारने के बाद सम्बन्धित विषयों की पुस्तक को ध्यान से पढ़ा जाये। इसे एक बार पढऩे से ही पता चल जाएगा कि समझाया हुआ कितना याद हो चुका है। इसके बाद एक-दो या आवश्यकतानुसार अधिक बार पढ़कर उसी दिन या अगले दिन या फिर कभी भी किंतु जल्दी उसे पढ़ें और याद किये को केवल स्मृति के आधार पर लिखने का प्रयत्न करें। लिखते समय आवश्यकता पडऩे पर पुस्तक या कक्षा में लिए गए नोट्स से भी सहायता लें।

ऐसा करने से एक तो लिखने का अभ्यास हो जाएगा, दूसरे पढ़ा हुआ अच्छी तरह याद हो जाएगा। तीसरे यह भी पता चल जाएगा कि एक प्रश्न कम से कम कितने समय में लिखा जा सकता है या एक प्रश्न का उत्तर कितने समय में दिया जा सकता है। इसी तरह गणितीय विषयों में भी नित्य अभ्यास किए जाने की आवश्यकता होती है। दूसरों के साथ विचार-विमर्श, विवेचन कर एवं दूसरों को सिखाकर भी स्मृति बढ़ाई जा सकती है। बस हो गई परीक्षा की तैयारी।

ऐसा नित्य करते रहने वालों के लिए परीक्षा 'भूत' या 'कठिन' नहीं रह जाती बल्कि सहज बन जाती है। ऐसा सब करने के बाद फिर तो बस उन लिखे प्रश्नों को कभी-कभी दोहरा लेने की आवश्यकता रह जाती है ताकि भूलेंं नहीं। एक बार ऐसा कर देखिए और फिर देखिए कि आपका परीक्षा परिणाम निश्चय ही आशा से कहीं अधिक अच्छा होगा। विश्वासपूर्वक मन लगाकर ऐसा करने वाले कभी असफल नहीं होते।

-दिव्य प्रकाश


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