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कहानी - Page 1

  • बाल कथा: इनाम में मिला राज्य

    घटना सोलहवीं सदी की है। बिहार के सिंहभूम की भुइयां जाति के लोग तरह-तरह के घोड़े पालते थे। राजा भी घोड़ों के न सिर्फ शौकीन होते थे बल्कि उनका कारोबार भी करते थे। एक बार एक घोड़ों का व्यापारी राजा को एक स्वस्थ-सुंदर घोड़ा बेच गया। घोड़ा देखने में जितना स्वस्थ व सुंदर था, उतना ही बिगड़ैल भी था। राजा...

  • बाल कथा: नमकीन खीर

    एक सेठ थे। व्यापार अच्छा चलता था। घर में किसी चीज की कमी नहीं थी। बड़ी-सी हवेली थी। नौकर-चाकर भी थे पर सेठ क्रोधी स्वभाव के थे। जरा सी भी गलती उनसे बरदाश्त नहीं होती थी। नौकर उससे थर-थर कांपते थे। सेठानी का स्वभाव बिल्कुल इसके विपरीत था। वह दयालु और हंसमुख थी। सभी की मदद करने की कोशिश करती थी। एक...

  • बाल कहानी: सियार की मूर्खता

    तिलदा जंगल के जानवर शेर के आतंक से परेशान थे। वह रोज किसी न किसी जानवर को मार कर अपनी भूख मिटाता था। एक दिन शेर गधिया तालाब के किनारे से जा रहा था, तभी उस की नजर तालाब में पानी पी रहे बकरे पर पड़ी। वह बकरे को दबोचने के लिए धीरे-धीरे उस की ओर बढऩे लगा। तालाब किनारे घास खा रहा खरगोश यह सब देख रहा...

  • बाल कहानी: ग्रीन स्कूल

    चंपक वन में 2 स्कूल थे। एक का नाम मून स्कूल तथा दूसरे का नाम सनराइज स्कूल था। दोनों स्कूलों में सैंकड़ों बच्चे पढ़ते थे। वहां पढ़ाई अच्छी होती थी। बच्चों का हर तरह से विकास हो, इस बात का ध्यान रखा जाता था। बच्चे वहां खूब मन लगा कर पढ़ते थे। मून स्कूल के प्रिंसिपल शेरसिंह थे आर सनराइज स्कूल के...

  • बाल कथा: अनोखी होली

    दीदी के साथ बैठे मोहन-सोहन होली मनाने की प्लानिंग कर रहे थे। उनके कुछ दोस्त भी इस मीटिंग में शामिल थे। सब बच्चों की राय थी कि इस बार होली कुछ अलग ढंग से मनायी जाये। 'लेकिन वो ढंग क्या हो? यह बात बच्चे सुनिश्चित वहीं कर पाये। दीदी बोली - अरे भईया, चलो दादाजी के पास चलते हैं, उनसे ही कुछ नया आइडिया...

  • बाल कहानी: अनबन का नतीजा

    जंगल में एक भैंस और घोड़ा साथ में रहते थे। उनकी आपस में बहुत अच्छी दोस्ती थी। जंगल में वे साथ-साथ चरने जाते और एक ही झरने से पानी पीते थे। उनकी दोस्ती की चर्चा पूरे जंगल में दूर-दूर तक होती थी। एक दिन किसी बात पर दोनों की अनबन हो गई तो वे आपस में लड़ पड़े। दोनों की बहुत लड़ाई हुई। भैंस ने सींग...

  • बाल कथा: कैसे करें परीक्षा की तैयारी?

    वास्तव में विद्यार्थी की परीक्षा की तैयारी उसी दिन से शुरू हो जाती है, जिस दिन वह कक्षा में प्रवेश करता है। जब शिक्षक कक्षा में अपने विषय को पढ़ाते और समझाते हैं, तब उस समय विद्यार्थी को 'कैच' शक्ति की आवश्यकता होती है ताकि शिक्षक द्वारा पढ़ाये और समझाए जा रहे विषय में विद्यार्थी अपनी पकड़ मजबूत बना ...

  • बाल कथा: रूडोल्फ की कहानी

    बहुत समय पहले की बात है। क्रि समस की रात को नार्थ पोल के अलास्का में सैंटा क्लाज बच्चों के घर-घर तोहफे बाँट रहे थे। पास ही में एक सुन्दर गाँव था जहाँ केवल रेनडियर रहते थे। गाँव का एक घर बहुत ही सुन्दर सजा हुआ था और रोशनी से जगमगा रहा था। सैंटा ने झटपट उस घर की चिमनी के अंदर छलांग लगाई और क्रि समस...

  • बाल जगत/जानकारी: रक्तदान: महादान

    वर्तमान भागदौड़ भरी जिंदगी और आपाधापी के चलते दुर्घटनाओं की संख्या में अतिशय वृद्धि हो रही है, जिससे रक्त की आवश्यकता दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। एक अरब से अधिक जनसंख्या वाले इस विशाल राष्ट्र के रक्त बैंकों में रक्त का नितांत अभाव है। परिणामस्वरूप अनेक लोग विवशतावश काल के ग्रास बन जाते हैं। देश के...

  • फूल और पौधों की देखभाल

    बिन्नी तितली बहुत उदास थी। मिटठू तोता फुदक कर उसके पास आया और बोला, 'क्या हुआ बिन्नी?' पर बिन्नी तितली ने तो जैसे सुना ही नहीं, वह चुपचाप कुछ सोचती रही। बिन्नी तितली तो ऐसी कभी नहीं थी, वह तो बहुत खुशमिजाज थी। इधर-उधर बगीचों आदि में घूमती-फिरती, सभी को मीठी बातें सुनाती रहती लेकिन अचानक उसे यह हुआ...

  • बाल जगत: बच्चों को पढ़ाएं ऐसे

    आमतौर पर देखने को मिलता है कि बच्चे की परीक्षाएं आने पर ही बच्चे और अभिभावकों को पढऩा व पढ़ाना याद आता है। परीक्षा आते ही अभिभावक बच्चे को सारा-सारा दिन पढ़ाने बैठ जाते हैं और बच्चे पर भी पढ़ाई का बहुत अधिक बोझ पड़ जाता है जिससे बच्चे परीक्षा को भूत समझने लगते हैं और उसे हौवा मानकर उसके नाम से भी...

  • बाल जगत: क्या होता है कीटाणु युद्ध?

    जब भी एक राष्ट्र का दूसरे राष्ट्र से या महाशक्तिशाली राष्ट्रों का आपस में युद्ध होता है तो असंख्य जनहानि के साथ-साथ अमूल्य संपत्ति का नाश भी होता है और यह एक यथार्थ है कि युद्ध के आधुनिकतम अस्त्र-शस्त्रों से मानव के साथ-साथ उसकी संपत्ति को भी धूल के ढेर में बदला जा सकता है लेकिन यह मान्यता अब...

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