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कहानी

  • कहानी- रिश्ते

    प्रिंस।। _पिताजी जोर से चिल्लाते हैं ।_* प्रिंस दौड़कर आता है- पूछता है... क्या बात है पिताजी? *पिताजी-* तूझे पता नहीं है आज तेरी बहन रश्मि आ रही है? वह इस बार हम सभी के साथ अपना जन्मदिन मनायेगी..अब जल्दी से जा और अपनी बहन को लेके आ। हाँ और सुन...तू अपनी नई गाड़ी लेके जा, जो तूने कल...

  • कहानी- जीवन संध्या

    रात के 1:00 बज रहे थे पर राधिका की आंखों से नींद कोसों दूर थी। उसका मन बहुत बेचैन हो रहा था पास ही बिस्तर में उसकी बेटी स्वाति गहरी नींद में सो रही थी ।राधिका ने प्यार से उसके सिर पर हाथ फेरा तो राधिका की आंखें भर आई यह सोचकर कि कल वह चली जाएगी अपने पति के साथ, एक नई दुनिया बसाने। पर वह उदास...

  • जान है तो जहान है"

    'अरे रोजी तू क्या कर रही है इतने दिन से लोकडाउन में '?पलक ने रोजी से फोन पर बात करते हुए पूछा।रोजी थोड़ी देर के लिए चुप होकर न जाने क्या सोचने लगी कि उधर से पलक की आवाज़ फिर से रोजी के कानों में सुनाई पड़ी।'हैलो रोजी सो गई क्या यार तू ,मोबाइल पर बात करते-करते'?'हैल्लो ...नही..नही पलक सोई नही हूँ यार...

  • लघुकथा - दोस्त...कोरोना से क्या डरना ...?

    राम और अमर बचपन के बहुत अच्छे मित्र हैं।दोनों इस वक्त दसवीं कक्षा के विद्यार्थी है।एक दूसरे से हर बात शेयर करते हैं।कोरोनावायरस संकट के समय जहां हर आदमी अपने-अपने घरों में रुका हुआ है और सिर्फ जरूरत के कामों से ही घर से बाहर जा रहा है।ऐसे दौर में भी अक्सर राम ने देखा कि अमर बिना मास्क लगाए घर से...

  • बाल कथा: गुण पारखी सम्राट-हर्षवर्द्धन

    आपने सम्राट हर्षवद्र्धन का नाम तो ज़रूर सुना होगा। वे भारत के एक यशस्वी सम्राट थे। सम्राट हर्षवद्र्धन वीर और बहुत बड़े विद्वान तो थे ही, इसके साथ-साथ उनमें एक विशेष गुण भी था कि वे विद्या प्रेमी भी थे। कला और साहित्य में रूचि रखने के अलावा वे विद्वानों का बहुत आदर-सत्कार किया करते थे। यही कारण था कि ...

  • बाल कथा: इनाम में मिला राज्य

    घटना सोलहवीं सदी की है। बिहार के सिंहभूम की भुइयां जाति के लोग तरह-तरह के घोड़े पालते थे। राजा भी घोड़ों के न सिर्फ शौकीन होते थे बल्कि उनका कारोबार भी करते थे। एक बार एक घोड़ों का व्यापारी राजा को एक स्वस्थ-सुंदर घोड़ा बेच गया। घोड़ा देखने में जितना स्वस्थ व सुंदर था, उतना ही बिगड़ैल भी था। राजा...

  • बाल कथा: नमकीन खीर

    एक सेठ थे। व्यापार अच्छा चलता था। घर में किसी चीज की कमी नहीं थी। बड़ी-सी हवेली थी। नौकर-चाकर भी थे पर सेठ क्रोधी स्वभाव के थे। जरा सी भी गलती उनसे बरदाश्त नहीं होती थी। नौकर उससे थर-थर कांपते थे। सेठानी का स्वभाव बिल्कुल इसके विपरीत था। वह दयालु और हंसमुख थी। सभी की मदद करने की कोशिश करती थी। एक...

  • बाल कहानी: सियार की मूर्खता

    तिलदा जंगल के जानवर शेर के आतंक से परेशान थे। वह रोज किसी न किसी जानवर को मार कर अपनी भूख मिटाता था। एक दिन शेर गधिया तालाब के किनारे से जा रहा था, तभी उस की नजर तालाब में पानी पी रहे बकरे पर पड़ी। वह बकरे को दबोचने के लिए धीरे-धीरे उस की ओर बढऩे लगा। तालाब किनारे घास खा रहा खरगोश यह सब देख रहा...

  • बाल कहानी: ग्रीन स्कूल

    चंपक वन में 2 स्कूल थे। एक का नाम मून स्कूल तथा दूसरे का नाम सनराइज स्कूल था। दोनों स्कूलों में सैंकड़ों बच्चे पढ़ते थे। वहां पढ़ाई अच्छी होती थी। बच्चों का हर तरह से विकास हो, इस बात का ध्यान रखा जाता था। बच्चे वहां खूब मन लगा कर पढ़ते थे। मून स्कूल के प्रिंसिपल शेरसिंह थे आर सनराइज स्कूल के...

  • बाल कथा: अनोखी होली

    दीदी के साथ बैठे मोहन-सोहन होली मनाने की प्लानिंग कर रहे थे। उनके कुछ दोस्त भी इस मीटिंग में शामिल थे। सब बच्चों की राय थी कि इस बार होली कुछ अलग ढंग से मनायी जाये। 'लेकिन वो ढंग क्या हो? यह बात बच्चे सुनिश्चित वहीं कर पाये। दीदी बोली - अरे भईया, चलो दादाजी के पास चलते हैं, उनसे ही कुछ नया आइडिया...

  • बाल कहानी: अनबन का नतीजा

    जंगल में एक भैंस और घोड़ा साथ में रहते थे। उनकी आपस में बहुत अच्छी दोस्ती थी। जंगल में वे साथ-साथ चरने जाते और एक ही झरने से पानी पीते थे। उनकी दोस्ती की चर्चा पूरे जंगल में दूर-दूर तक होती थी। एक दिन किसी बात पर दोनों की अनबन हो गई तो वे आपस में लड़ पड़े। दोनों की बहुत लड़ाई हुई। भैंस ने सींग...

  • बाल कथा: कैसे करें परीक्षा की तैयारी?

    वास्तव में विद्यार्थी की परीक्षा की तैयारी उसी दिन से शुरू हो जाती है, जिस दिन वह कक्षा में प्रवेश करता है। जब शिक्षक कक्षा में अपने विषय को पढ़ाते और समझाते हैं, तब उस समय विद्यार्थी को 'कैच' शक्ति की आवश्यकता होती है ताकि शिक्षक द्वारा पढ़ाये और समझाए जा रहे विषय में विद्यार्थी अपनी पकड़ मजबूत बना ...

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