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ओलंपिक में स्वर्ण का लक्ष्य रहेगा चिंकी का: मेहताब

ओलंपिक में स्वर्ण का लक्ष्य रहेगा चिंकी का: मेहताब



भोपाल-दोहा में 14वीं एशियाई निशानेबाजी चैंपिनयशिप में महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा में बेहतर प्रदर्शन के जरिए टोक्यो ओलंपिक 2020 के लिए कोटा दिलाने वाली भोपाल की युवा निशानेबाज चिंकी यादव के पिता मेहताब को पूरी उम्मीद है कि उनकी पुत्री ओलंपिक में देश के लिए स्वर्ण पदक लाएगी।

मध्यप्रदेश राज्य शूटिंग अकादमी की 21 वर्षीय चिंकी यादव के पिता मेहताब यादव ने यहां यूनीवार्ता को बताया कि चिंकी का दोहा के बाद अब पूरा जोर ओलंपिक में स्वर्ण पदक लाने पर रहेगा। इसके लिए वह पहले से ही प्रयास कर रही है। इसी तरह का विश्वास चिंकी की मां श्रीमती कृष्णा यादव को भी है। हालाकि अभी वे दोनों चिंकी के दोहा से लौटने का इंतजार कर रहे हैं।

अपनी पुत्री की उपलब्धियों का सहज भाव से बखान करने वाले चिंकी के माता पिता उसकी दोहा में हासिल नयी उपलब्धि पर भी अत्यंत प्रसन्न हैं। उनका मानना है कि जिस तरह से वह अपने प्रदर्शन में लगातार निखार लाती जा रही है, उससे उन्हें पूरा विश्वास है कि चिंकी ओलंपिक खेलों में देश के लिए स्वर्ण पदक अवश्य लाएगी।

युवा निशानेबाज़ चिंकी यादव ने महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा के फाइनल में जगह बनाने के साथ भारत को टोक्यो ओलंपिक 2020 के लिये 11वां कोटा दिलाया था। चिंकी ने क्वालिफिकेशन में परफेक्ट 100 का स्कोर किया था और कुल 588 अंकों के साथ दूसरे नंबर पर रहकर फाइनल में पहुंची थीं। उनसे आगे थाईलैंड की नाफसवान यांगपेनबून रहीं जिनके क्वालिफिकेशन में 590 अंक रहे। चिंकी ने अपने पहले सीनियर इंटरनेशनल मुकाबले में ही यह उपलब्धि हासिल की। चिंकी आठ महिलाओं के फाइनल में छठे स्थान पर रहीं।

सामान्य मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाली चिंकी के खानपान और रुचियों के बारे में पूछे जाने पर मां कृष्णा यादव ने कहा कि उसका ध्यान अपने खेल पर ही केंद्रित रहता है। भोजन में वह कम तेल वाला सामान्य भोजन ही पसंद करती है। पिता का कहना है कि वह मूल रूप से खंडवा जिले के निवासी हैं, लेकिन पिछले लगभग ढाई दशक से भोपाल में ही निवास कर रहे हैं। 47 वर्षीय मेहताब यहां टीटीनगर स्टेडिमय परिसर में स्थित आवास में निवास करते हैं।

राज्य के खेल विभाग में ही इलेक्ट्रिशियन के रूप में कार्य करने वाले मेहताब ने बताया कि वर्ष 2012 में चिंकी को यहां राज्य शूटिंग अकादमी में प्रवेश मिला था। इसके बाद उसने काफी परिश्रम किया और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। इस दौरान उसने राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर अनेक पदक हासिल किए। इसके बाद उसने अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हाथ आजमाए और उसे वहां भी सफलता मिली।

यादव ने बताया कि चिंकी के अलावा उनका एक पुत्र राजेश (19) है और वह भी शूटिंग में हाथ आजमा रहा है। वह शॉटगन (12 बोर) में राष्ट्रीय स्तर तक जा चुका है। चिंकी और राजेश दोनों ही अब कॉलेज के विद्यार्थी हैं, हालाकि दोनों ही अपना भविष्य निशानेबाजी में लगाना चाहते हैं।

चिंकी की वर्तमान उपलब्धि पर खेल एवं युवा कल्याण मंत्री जीतू पटवारी ने उसे बधाई दी है। वहीं खेल एवं युवा कल्याण विभाग के संचालक डॉ एस एल थाउसेन ने भी चिंकी के प्रदर्शन को अद्वितीय बताते हुए कहा कि इससे साबित होता है कि अकादमी में उच्च स्तरीय खेल सुविधाओं के कारण सामान्य परिवार के प्रतिभावान खिलाड़ी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपना, परिवार और राज्य के साथ ही देश का नाम रोशन कर सकते हैं।

खेल विभाग के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि चिंकी ने 2012 से अकादमी में प्रशिक्षण शुरू करने के बाद से अब तक अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश को तीन स्वर्ण, दो रजत और पांच कांस्य पदक दिलाए हैं। चिंकी ने राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में छह स्वर्ण, सात रजत और नौ कांस्य पदक हासिल किए हैं। चिंकी ने राज्य स्तर पर भी कई उपलब्धियां अपने नाम दर्ज की हैं।

चिंकी मध्यप्रदेश राज्य शूटिंग अकादमी के मुख्य प्रशिक्षक जसपाल राणा और सहायक प्रशिक्षक जयवर्धन सिंह चौहान से प्रशिक्षण हासिल कर रही है।


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