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जरूरी है रिश्तों में मर्यादा

जरूरी है रिश्तों में मर्यादा

अक्सर आज के युवक-युवतियां रिश्तों से ज्यादा व्यक्ति को महत्त्व देते हैं। वे यह नहीं सोचते कि सामने वाले व्यक्ति से उनका रिश्ता क्या है। वे बस अपने ही ढंग से उस व्यक्ति से व्यवहार करने लगते हैं।

वैसे इसमें कोई बुराई नहीं क्योंकि बदलते युग ने मानवीय सोच को विकसित किया है और अब रिश्तेदारों से 'रिश्तेदारी' की बजाय दोस्ताना संबंध अधिक निभाये जाने लगे हैं। यह तो संबंधों के लिए बेहतर ही है कि 'रिश्तेदारों' में ही हमें दोस्त भी मिल जाते हैं पर हर रिश्ते में भले ही आप उसे दोस्ती का नाम ही क्यों न दें, मर्यादा का ख्याल रखना जरूरी होता है।

कुछ रिश्ते काफी नाजुक होते हैं जैसे-जीजा-साली का रिश्ता, भाभी-देवर व टीचर-स्टूडेंट का रिश्ता। अगर इन रिश्तों में मर्यादा का ख्याल न रखा जाए तो आपके चरित्र पर प्रश्नचिन्ह लग सकता है। आप इन रिश्तों में भी परस्पर दोस्ताना व्यवहार रख सकती हैं परंतु सीमाओं का ध्यान रखना जरूरी है क्योंकि समाज इन रिश्तों में अधिक खुलेपन की इजाजत नहीं देता।

यह सही है कि जिस समाज में हम रहते हैं, उसकी मान्यताओं का ख्याल हमें रखना ही पड़ता है। अक्सर युवक-युवतियां कहते सुने जाते हैं, हमें किसी की परवाह नहीं। ऐसा कहकर वे दूसरों को तो चुप करा देते हैं लेकिन उन्हें इतने लापरवाह भी नहीं हो जाना चाहिए कि स्वयं को ही जवाब न दे पाएं।

भारतीय समाज का ढ़ांचा ही इस तरह का है कि यहां आप रिश्तों को अपने ढंग से ट्रीट नहीं कर सकते। हमारे समाज में भाभी देवर, जीजा-साली के रिश्ते को नाजुक माना जाता है व इन रिश्तों में मर्यादा का ख्याल रखा जाना जरूरी समझा जाता है। अब तो टीचर-स्टूडेंट का रिश्ता भी इस कैटेगरी में शामिल हो गया है। इन रिश्तों में जरूरत से ज्यादा खुलापन बरतेंगे तो समाज की शंकित निगाहों का सामना तो करना ही पड़ेगा। अक्सर ऐसी नादानियां परिवार को तबाही के कगार पर लाकर खड़ा कर देती हैं अत: समय रहते आपको यह समझ जाना चाहिए कि हर रिश्ते के अपने कुछ नियम होते हैं जिन्हें स्वीकार करना जरूरी है वरना मधुर संबंधों में कड़वाहट पैदा होने में देर नहीं लगेगी।

-भाषणा बांसल

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