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(विचार-मंथन) दिल्ली में घमासान

(विचार-मंथन) दिल्ली में घमासान



दिल्ली में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। आम आदमी पार्टी को जहां 2015 की प्रचंड जीत को दोहराने की उम्मीद है, वहीं भाजपा 2019 लोकसभा चुनाव में अपने प्रदर्शन से आशावादी है। कांग्रेस भी लोकसभा चुनाव में अपने प्रदर्शन के आधार पर अपनी खोई जमीन वापस पाने की उम्मीद कर रही है। इस बीच एबीपी न्यूज-सी वोटर के ऑपिनियन पोल में दिल्ली में एक बार फिर आम आदमी पार्टी की जबरदस्त जीत की भविष्यवाणी की गई है। एबीपी न्यूज-सी वोटर के सर्वे के मुताबिक 70 विधानसभा सीटों वाली दिल्ली में आम आदमी पार्टी पिछली बार की ही तरह एकतरफा जीत हासिल कर सकती है। आप को 70 में से 59 सीटें मिल सकती हैं जो पिछली बार की 67 सीटों के मुकाबले आठ कम है। बात अगर भाजपा की करें तो पिछली बार तीन सीट जीतने वाली बीजेपी के इस बार भी दहाई का आंकड़ा नहीं छूने का अनुमान है। उसे आठ सीटें मिल सकती हैं जो पिछली बार से पांच ज्यादा है। पिछली बार खाता तक नहीं खोल पाने वाली कांग्रेस के इस बार भी निराशाजनक प्रदर्शन का अनुमान है। सर्वे के मुताबिक कांग्रेस इस बार खाता खोलते हुए 3 सीटों पर जीत हासिल कर सकती है। 70 सीटों वाली दिल्ली विधानसभा में बहुमत के लिए 36 सीटों की जरूरत है। बात अगर वोट शेयर की करें तो सर्वे के मुताबिक आम आदमी पार्टी को दिल्ली में पडऩे वाले कुल वोटों में अकेले आधे से ज्यादा वोट मिलेंगे। आप को 53.3 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान जताया गया है। 2019 लोकसभा चुनाव में दिल्ली में जबरदस्त प्रदर्शन करने वाली भाजपा को वोट शेयर के मामले में जबरदस्त नुकसान झेलना पड़ सकता है। उसे 25.9 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान है। सर्वे के मुताबिक कांग्रेस सिर्फ 4.7 प्रतिशत वोट ही जुटा पाएगी।

2015 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी की सुनामी चली थी, जिसमें कांग्रेस का तो खाता तक नहीं खुला था और भाजपा महज तीन सीटों पर सिमट गई। केजरीवाल के नेतृत्व में आप ने 70 में से 67 सीटों पर जीत हासिल की जो 2013 के मुकाबले 39 सीटें ज्यादा थी। 2013 में 32 सीटें जीतने वाली भाजपा मुश्किल से 3 सीट ही जीत पाई। बीजेपी से भी बुरा हाल कांग्रेस का रहा जो खाता तक नहीं खोल पाई जबकि 2013 में उसने 8 सीटें जीती थी। बात अगर 2015 के विधानसभा चुनाव में वोट शेयर की करें तो आम आदमी पार्टी ने 54.3 प्रतिशत वोट हासिल किए। भाजपा को 32.3 प्रतिशत और कांग्रेस को 9.7 प्रतिशत वोट मिले थे।

वैसे, हकीकत में चुनाव में आम आदमी पार्टी, भाजपा और कांग्रेस के बीच त्रिकोणीय मुकाबला होने जा रहा है। मुख्यमंत्री अरविंद जहां अपने 5 साल के कामकाज गिनाते हुए 2015 का प्रदर्शन दोहराने का दावा कर रहे हैं तो भाजपा 2019 लोकसभा चुनाव नतीजों के सहारे कार्यकर्ताओं में जोश भर रही है। भाजपा 2019 के लोकसभा चुनाव में अपने प्रदर्शन की वजह से आशावादी है। वैसे 2014 लोकसभा चुनाव में भी भाजपा ने दिल्ली की सभी सात सीटों पर जीत हासिल की थी लेकिन अगले साल हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी दहाई का अंक तक नहीं छू पाई और बमुश्किल तीन सीट ही जीत पाई थी। आम आदमी पार्टी के साथ खुद अरविंद केजरीवाल के लिए भी यह खबर निराशाजनक रही क्योंकि नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र से आप उम्मीदवार को बहुत कम वोट मिले। नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र से बृजेश गोयल को सिर्फ 14,740 वोट ही मिले। अब जबकि विधानसभा चुनाव की रणभेरी बज चुकी है, तो आने वाले दिनों में सियासी तस्वीर बनती-बिगड़ती रहेगी। दिल्ली की कुर्सी किसके हाथ लगेगी, यह 11 फरवरी को ही तय हो पाएगा।

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