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निर्भया के गुनहगारों को कब मिलेगी फांसी?

निर्भया के गुनहगारों को कब मिलेगी फांसी?

डॉ. रमेश ठाकुर

कुछ तारीखें हमेशा के लिए अमर हो जाती हैं। उनमें से कुछ तारीखें सिर्फ दर्द देती हैं तो कुछ खुशी। एक ऐसी तारीख, जिसे याद करके आज भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं। जब पूरा हिंदुस्तान सड़कों पर उतर आया था। विरोध की चिंगारियां हर तरफ इस कदर फूटी थीं कि केंद्र की हुकूमत भी हिलोरे मारने लगी थी। वह 16 दिसम्बर 2012 की तारीख थी। राजधानी में रेप और अमानवीयता से एक बेटी दम तोड़ चुकी थी। घटना को हुए सात वर्ष बीत चुके हैं लेकिन निर्भया के कातिल अब भी सजा पर अमल से दूर हैं। भले ही सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें फांसी की सजा मुकर्रर कर रखी है। यही नहीं कभी राष्ट्रपति के पास दया याचिका तो कभी सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल के गुनहगार सजा से बचने का उपाय तलाशते रहते हैं। उनके खोखले तर्क का तो कहना ही क्या? हाल ही में निर्भया के एक कातिल ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल कर कहा कि दिल्ली के प्रदूषण में वैसे ही दम घुटता है तो फिर फांसी देने का क्या औचित्य है? कहने का मतलब है कि उनका दुस्साहस तो देखिये कि वे कुकर्म भी करेंगे और कानून-व्यवस्था की खिल्ली भी उड़ाएंगे। उधर, जब भी दिसम्बर में 16 तारीख आती है तो निर्भया के परिजनों की रूहें कांप उठती हैं।

कुछ वैसी ही कहानी पिछले दिनों हैदराबाद में दोहराई गई। लेकिन उस घटना का अंत फिल्मी अंदाज में तत्वरित किया गया। पुलिस ने सभी आरोपितों को उसी जगह ले जाकर एनकाउंटर में मार गिराया। एनकाउंटर का समूचा देश समर्थन कर रहा है। उसमें निर्भया के परिजन भी शामिल हैं। निर्भया के परिजन हैदराबाद पुलिस की कार्रवाई पर खुशी जता रहे हैं, लेकिन अब तक अपनी बेटी को न्याय नहीं मिलने पर घोर निराश भी हैं। फिलहाल, निर्भया के दोषियों में एक अक्षय ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल कर मामले को उलझा दिया है। कातिल ऐसा पहले भी करते रहे हैं। उधर, दोषियों की फांसी का बेसब्री से इंतजार कर रहे निर्भया के माता-पिता चाहते हैं कि उनकी बेटी के दोषियों की सजा उसी तारीख को दी जाए जिस दिन उन्होंने घटना को अंजाम दिया था। निर्भया के परिजनों ने केंद्र सरकार और तिहाड़ जेल प्रशासन से मांग की है कि छह दोषियों में बाकी बचे चार चारों को 16 दिसम्बर को फांसी पर लटकाया जाए।

तिहाड़ जेल प्रशासन ने उनकी मांग पर गौर भी फरमाना शुरू कर दिया है। तभी से अटकलें भी तेज हो गई हैं कि क्या आगामी 16 दिसम्बर को निर्भया के दोषियों को फांसी दे दी जाएगी? मीडिया में भी अटकलें लगाई जानी शुरू हो गई हैं। दरअसल, तिहाड़ जेल में बंद चारों गुनहगारों के मामले में फांसी पर लटकाए जाने से रोकने के लिए राष्ट्रपति के नाम लिखी गई दया याचिका केजरीवाल सरकार से खारिज हो जाने के बाद उप-राज्यपाल कार्यालय से होती हुई केंद्रीय गृह मंत्रालय के रास्ते राष्ट्रपति भवन पहुंच गई थी। राष्ट्रपति उस पर निर्णय करते इससे पहले ही याची ने अपना दस्तखत न होने की बात कहते हुए याचिका वापस ले ली। इस बीच दूसरा दोषी पुनर्विचार याचिका लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। यह सब कानून और प्रशासन को उलझाए रखने की तरकीब है।

फिलहाल, तारीख का ऐलान भले नहीं हुआ हो, फांसी की सुगबुगाहट के बीच तिहाड़ जेल प्रशासन ने फांसी से जुड़ी सभी तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। बक्सर (बिहार) जेल से फांसी की रस्सी मंगा ली गई है। तिहाड़ प्रशासन ने पवन नाम का जल्लाद मेरठ से बुलाया है। फांसी दी जाने संबंधित सभी कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा किया जा रहा है।

गौरतलब है, फांसी से संबंधित सुप्रीम कोर्ट की नई गाइडलाइन के मुताबिक राष्ट्रपति के पास से फांसी की दया याचिका खारिज होने के बाद दोषियों को थोड़ा वक्त दिया जाता है। पर, निर्भया गैंगरेप मामले में दोषियों पर यह नियम लागू नहीं होगा। निर्भया केस को स्पेशल केसों की श्रेणी में रखा गया है जिसमें दया-सहूलियत का स्थान नहीं। क्योंकि, मामला जनआकांक्षाओं से जुड़ा है। केस में की गई थोड़ी चूक भी समाज में गलत संदेश दे सकती है। निर्भया केस के दोषियों की फांसी सन् 2012 में ही मुकर्रर हो गई थी। लेकिन कराहते सिस्टम के चलते देरी पर देरी की गई।

बलात्कारियों के खिलाफ इस वक्त पूरे देश में जनाक्रोश व्याप्त है। रेपिस्टों का एकतरफा विरोध हो रहा है। हालांकि कुछ बुद्धिजीवी हैदराबाद एनकाउंटर पर सवाल उठा रहे हैं। निर्भया कांड के दौरान भी कुछ लोग घटना को दूसरा रूप देना चाहते थे। लेकिन अब माहौल बदल चुका है। बलात्कारियों के प्रति आम जनता के अलावा प्रशासन स्तर पर भी सहानुभूति खत्म हो चुकी है। बलात्कारियों के परिजन खुद उनको सजा देने की मांग करते हैं। हैदराबाद कांड के एक बाद एक आरोपित की मां सार्वजनिक रूप से मांग करती देखी गई कि जैसे उनके बेटे ने किसी को जलाया, वैसे ही उसको भी जला दिया जाए।


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