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राज काज

  • BJP की रणनीति- कहीं पे निगाहें और कहीं पे निशाना, "सत्ता के साथ भी और सत्ता के खिलाफ भी"

    कुछ अरसा पहले एक गीत आया था 'हम तो मशहूर हुए हैं आपकी चाहत में'. ठीक वैसे हींनीतीश के प्यार में मशहूर हुई या यूँ कहें कि घुटने के बल बैठने वाली बीजेपी को इस मोहब्बत का सौदा मंहगा पड़ता नजर आने लगा है. तेजस्वी के बढ़ते ग्राफ से घबराई बीजेपी ने अपनी रणनीति में कुछ बदलाव किया है. जानकारों की माने तो...

  • तुम्हारा प्यार चाहिये मुझे जीने के लिये...!

    राजनीति में एक समय ऐसा भी आता हैं जब जबरन किसी को रिटायर कर दिया जाता है। फिर लगता हैंकि अरे, ये तो गलती हो गई। तो उसे सुधारा भी जाता है। ऐसा ही कुछ अखिलेश यादव कर रहे हैं। 03 नवंबर को उत्तर प्रदेश विधानसभा की सात रिक्त सीटों के लिए होने वाले उप-चुनाव के लिए राजनीति से संन्यास ले चुके और ...

  • महात्मा से मुलायम तक प्रतीकों की राजनीति के सियासी मोहरे

    -अजय कुमार,लखनऊ राजनीति में प्रतीकों का बेहद महत्व होता है। मौसम चुनावी हो तो फिर प्रतीकों की राजनीति 'सोने पर सुहागे' जैसी हो जाती है। वोट बैंक की सियासत के चलते परलोक गमन कर चुके गए नेताओं तक को सियासी 'धरती' पर उतार दिया जाता है। प्रतीकों की राजनीति में सबसे बड़ा नाम महात्मा गांधी का है, कां...

  • दलित सियासत में हर दांव आजमाती योगी सरकार


    -अजय कुमार,लखनऊ उत्तर प्रदेश की सियासत में इस समय दलितों को लेकर जबर्रदस्त गोलबंदी चल रही है। सभी दलों के नेता, दलितों को अपने पाले में खींचने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाए हुए हैं। खासकर कांग्रेस और यूपी में पैर पसारने की कोशिश में लगी 'आम आदमी पार्टी' दलितों को लेकर कुछ ज्यादा ही एक्टि...

  • यूपी राज्यसभा चुनाव में भाजपा की 8 सीटों पर जीत तय, नौंवी सीट पर भी विपक्ष में बिखराव से उम्मीद

    चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश में 25 नवंबर को खाली हो रही राज्यसभा की 10 सीटों के लिए 9 नवंबर को चुनाव कराने का निर्णय लिया है। चुनाव आयोग ने इसका कार्यक्रम जारी कर दिया है। कार्यक्रम के अनुसार 20 अक्टूबर को अधिसूचना जारी होगी। 27 तक नामांकन व 28 अक्टूबर को पर्चाे की जांच होेगी। 2 नवंबर तक नाम वापसी...

  • पराली का धुआं

    -सिद्धार्थ शंकर भारत में तेजी से बढ़ते प्रदूषण को लेकर फिर से जो रिपोर्ट आ रही हैं, उनसे साफ है कि अगर हम समय रहते नहीं चेते तो आने वाले दिनों में हालात और भयावह होंगे। देश के कई राज्यों में फिर से पराली जलाने की खबरें आने लगी हैं। दिल्ली की हवा तो सबसे ज्यादा खराब हो चुकी है। एक अध्ययन में यह ब...

  • क्या भारतीय मुसलमान खुशहाल हैं ?

    डॉ. वेदप्रताप वैदिक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखिया श्री मोहन भागवत के इस कथन पर बड़ी बहस चल रही है कि ''दुनिया में सबसे ज्यादा संतुष्ट कोई मुसलमान हैं तो भारत के मुसलमान हैं।'' यही बात किसी मुसलमान नेता या आलिम-फाजिल के मुंह से निकलती तो उसकी बात ही कुछ और होती लेकिन ऐसी बात निकले तो कैसे निकले? य...

  • श्रद्धांजलि- हमेशा सत्ता की चाबी हाथ में रही रामविलास पासवान के!

    दलित राजनीति के पुरोधा एवं गरीबों के हितचिंतक रामविलास पासवान कोराजनीति का पंडित कहे तो गलत नही होगा।कब किसकी सरकार बनेगी?किस पार्टी से गठबंधन करने में फायदा है?सत्ता की कुर्सी कैसे सुरक्षित रह सकती है?इन सब सवालो के जवाब रामविलास पासवान के मस्तिष्क में होते थे और वे राजनीति की हवा का रुख भांपकर...

  • संघ प्रमुख का विशेष साक्षात्कार - राममंदिर से रामराज्य की ओरः मोहन भागवत सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत जी का विशेष साक्षात्कार

    सवालः अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के प्रारंभ के साथ ही रामजन्मभूमि आंदोलन समाप्त हो गया लेकिन क्या अब भगवान श्रीरामजी का विषय भी समाप्त हो गया? उत्तरः श्री राममंदिर का शिलान्यास 1989 में पहले ही हो गया था। 5 अगस्त 2020 को केवल मंदिर निर्माण कार्य का शुभारंभ हुआ। मंदिर निर्माण के लिए भूमि...

  • बागियों के भरोसे चुनावी शिकार पर 'चिराग'


    मुरली मनोहर श्रीवास्तवबिहार विधानसभा चुनाव में जहां कलतक एनडीए और महागठबंधन के बीच वाकयुद्ध और राजनीतिक लड़ाई जारी थी। आज एनडीए और महागठबंधन अंदरुनी कलह से जूझ रहे हैं। महागठबंधन में कलतक कांग्रेस, राजद, रालोसपा, वीआईपी एक साथ थे, सीटों के बंटवारे को लेकर विवाद होने के बाद महागठबंधन में राजद, क...

  • प्रियंका की सक्रियता ने बढ़ाई माया-अखिलेश की 'धड़कन'

    -अजय कुमार,लखनऊ 21 वीं सदी की राजनीति काफी बदल चुकी और परिपक्त हो गई है। वोटर अब न तो नेताओं की चिकनी-चुपड़ी बातों और बहकावे में आता है, न मीडिया (उसमें भी खास कर इलेक्ट्रानिक मीडिया) पर बहुत अधिक भरोसा करता है। वह तर्को की कसौटी पर नेताओं के वादों-दावों एवं सच-झूठ का आकलन करता है। वह जानता है कि...

  • आडवाणी और अटल न पूरक, न विकल्प !

    समस्त अयोध्या प्रकरण (आज का) के सन्दर्भ में लालकृष्ण आडवाणी प्राचीन ग्रीक नाटकों के त्रासद हीरो लगते हैं। ऐसा नायक जो निन्यानवे तक चढ़कर फिसल जाता है। सांप-सीढ़ी के खेल की तरह। बस एक रन से शतक छूट जाता है। प्रधानमंत्री नहीं बन पाए। 'उप' ही बन सके।लालकृष्ण आडवाणी अयोध्या काण्ड के शिल्पी थे। तब पार्टी...

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