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राज काज

  • क्यों न बंद हो मस्जिदों से लाउडस्पीकर पर अजान..?

    -आर.के. सिन्हा अगर मस्जिदों से लाउडस्पीकरों पर अजान न दी जाए तो क्या इस्लाम खतरे में आ जाएगा? क्या अजान इस्लाम का अभिन्न अंग है। इन सवालों के अलग-अलग उत्तर हैं। पहले सवाल का जवाब तो यह है कि 1400 साल पुराने इस्लाम धर्म को इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा कि लाउडस्पीकर से अजान न भी दी जाए। इस्लाम में...

  • कोई मरने से बचा ले इन बेबस मजदूरों को

    -आर.के. सिन्हा कोरोना काल की मौजूदा विपत्ति ने देश के लाखों-करोड़ों बेबस-असहाय गरीब प्रवासी मजदूरों को सच में सड़क पर लाकर खड़ा कर दिया है। वे भूखे-प्यासे बीबी-बच्चों सहित सड़कों पर हैं। हादसों में मारे जा रहे हैं। अबतक करीब चार सौ प्रवासी मजदूरों के हादसों के शिकार होने की खबरें हैं। ताजा घटना...

  • 10 मई 1857 की क्रांति पर विशेष: जंग ए आजादी 1857 की क्रांति में रहा है बसौद गांव का महत्वपूर्ण योगदान

    बागपत। 10 मई 1857 ई. को मेरठ छावनी से भारत का स्वतंत्रता संग्राम प्रारंभ हुआ, जिसमें बागपत क्षेत्र में भी क्रांति आयी। इस क्षेत्र के ग्रामीणों ने यहाँ से अंग्रेजी शासन की जडो को उखाड़कर फेंक दिया था।युवा चेतना मंच के संस्थापक मास्टर सत्तार अहमद ने बताया कि महाक्रांति गांव बसौद के साधारण किसान...

  • जीवन को दांव पर लगाकर लौट रहे है अपने घर..कौन है इनकी सुरक्षा का जिम्मेदार ..?

    बागपत-व्यवस्था के ठेकेदारों से हमारा सवाल है कि क्या इनका जीवन, जीवन नहीं है ? क्या यह लोग इंसान नहीं हैं ? भूख से ये मर रहे हैं, हजारों किलोमीटर पैदल चलने की मार ये झेल रहे हैं, रेल की पटरियों पर ये कट रहे हैं, बेरोजगारी सबसे पहले इनकी जिंदगी छिनेगी। बिहार के रहने वाले यह मजदूर हरियाणा की तरफ से...

  • कब तक रहेगा वर्क फ्रॉम होम

    आर.के. सिन्हा अब यह कमोबेश सबको समझ आ गया होगा कि वैश्विक महामारी कोविड-19 के साथ हमें रहना सीखना ही होगा। इस बात को इस तरह से भी समझा जा सकता है कि जब तक इस भयानक महामारी की कोई वैक्सीन ईजाद नहीं होती तब तक बचाव के अलावा कोई दूसरा कोई रास्ता नहीं है। इसलिए जरूरी है कि फैक्ट्रियां, दफ्तर आदि भी...

  • सरकार की कमाई पर बेतुके सवाल

    सियाराम पांडेय 'शांत' राजनीतिक गलियारों में एक सवाल उठा है कि सरकार किसके लिए धन जुटा रही है। सवाल यह है कि सरकार क्या है? सरकार जनता का निर्णायक प्रतिनिधित्व है। जो कुछ भी टैक्स आदि के जरिये अर्जित होता है, वह जनता द्वारा वसूला गया होता है और जनता के लिए होता है। सवाल उठता है कि जनता क्या है?...

  • मौतों के दौर में सोनिया की सियासत.. क्या घटिया राजनीति शोभा देती है..?

    -आर.के. सिन्हा अफसोस कि जब देश को कोरोना वायरस के संक्रमण की राष्ट्रीय आपदा और उससे पैदा हुई समस्याओं से एक साथ मिलकर लड़ना चाहिए था, तब भी हमारे देश में ओछी राजनीति हो रही है। लगता है कि मौतों और लाशों की खबरें देख सुनकर भी कुछ नेताओं में मनुष्यता अबतक जागी नहीं है। उनके दिल अभी भी पत्थर...

  • (विचार-मंथन) चिंता बढ़ा रहा आंकड़ा

    लेखक- सिध्दार्थ शंकरभारत में अब तक 40 से ज्यादा दिनों से जारी लॉकडाउन के बाद कोरोना वायरस की रफ्तार धीमी जरूरी हुई है, लेकिन अब भी बहुत ज्यादा है। इसे इस बात से समझ सकते हैं कि भारत में डेली ग्रोथ रेट अब अमेरिका, इटली, ब्रिटेन जैसे कोरोना से सबसे बुरी तरह प्रभावित देशों से भी ज्यादा है। आइए,...

  • अर्थव्यवस्था को शराब का सहारा

    -सतीश एलिया विश्वव्यापी महामारी कोरोना के संक्रमण को रोकने के प्रमुख उपाय माने गए लॉकडाउन के करीब डेढ़ माह में देश ने जो दृश्य देखे हैं, वे न भूतो हैं, भविष्यति के बारे में भविष्य ही बता सकेगा लेकिन वे दृश्य भयावह भी हैं और तसल्ली देने वाले भी। भयावह इस अर्थ में कि मौत का इस कदर भय और खतरा इस सदी ...

  • महामारी अध्यादेशः एक सकारात्मक पहल

    डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा कोरोना महामारी ने जहां समूची दुनिया को हिलाकर रख दिया है, वहीं महामारियों से निपटने के लिए राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अध्यादेश लाकर सकारात्मक पहल की है। कोरोना महामारी ने सारी दुनिया में लाखों लोगों को आगोश में ले लिया है। चीन से चला यह वायरस सारी दुनिया को...

  • प्रवासी मजदूरों की दर्दनाक हालत..चुनौती को अवसर में बदलें पूर्वी राज्य

    -आर.के. सिन्हा कोरोना वायरस के बहाने देश दीन-हीन प्रवासी मजदूरों की दर्दनाक हालत से रूबरू हो गया है। कोराना वायरस की चेन को ध्वस्त करने के लिए शुरू किए गए देशव्यापी लॉकडाउन के बाद पैदा हुए हालातों से समझ आ गया कि हमारे यहां बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, उड़ीसा, छत्तीसगढ़ और असम आदि...

  • दहशत में दुुनिया..!

    डॉ. नीलम सिंह उच्चतम न्यायालय ने अपने एक हालिया सुनवाई के दौरान कोरोना पर अपनी एक टिप्पणी में कहा है कि दुनिया में कोरोना से अधिक खतरा कोराना की दहशत से है। यह टिप्पणी एक ऐसे समय में आई है, जब हममें से हर एक कोरोना का विशेषज्ञ बना बैठा है। बचपन में एक कहावत सुनी थी'जादा जोगी मठ उजाड़' उसका ...

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