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सहारनपुर में किसानों में गेहूं की खेती के प्रति बढ़ रहा रूझान

सहारनपुर में किसानों में गेहूं की खेती के प्रति बढ़ रहा रूझान

देवबंद, (सहारनपुर) -पश्चिमी उत्तर प्रदेश की गन्ना बेल्ट सहारनपुर में गन्ने की खेती में जहां गिरावट दर्ज की गई है वही अपनी परंपरागत फसलों गेहूं, चावल, मक्का और जौ की खेती के प्रति किसानों का रूझान बढ़ा है।

बकाया गन्ना मूल्य के भुगतान में विलंब और पापुलर की लकड़ी के दामों में आशातीत वृद्धि ना होने से निराश सहारनपुर का प्रगतिशील किसान गेहूं की पैदावार को प्राथमिकता दे रहा है। अकेले सहारनपुर जिले में गेहूं की खेती में काफी वृद्धि दर्ज हुई है और किसानों ने गेहूं का रकबा भी बढ़ाया है।

उपनिदेशक कृषि रामजतन मिश्र ने शुक्रवार को यहां बताया कि सहारनपुर में पांच वर्षों के दौरान गेहूं और धान के क्षेत्रफल में वृद्धि हुई है। सरसों का क्षेत्रफल घटा है। मसूर, उड़द और दलहनी फसलों की उत्पादकता स्थिर बनी हुई है। जंगली जानवरों के कारण यहां के किसानों ने उड़द की दाल, मसूर और मूंग की खेती का क्षेत्रफल भी घटा दिया है।

उन्होंने बताया कि सहारनपुर में वर्ष 2016-17 में गेहूं की पैदावार 37.57 क्विंटल प्रति हेक्टेयर थी जो मौजूदा समय में 41.83 क्विंटल प्रति हेक्टेयर हो गई है। उन्होंने बताया कि 2016-17 में धान की उत्पादकता 24.59 क्विंटल प्रति हेक्टेयर थी जो अब बढ़कर 27.75 क्विंटल प्रति हेक्टेयर हो गई है। मक्का की उत्पादकता 15.75 क्विंटल प्रति हेक्टेयर थी जो अब बढ़कर 28.48 क्विंटल प्रति हेक्टेयर हो गई है। जौ की उत्पादकता 27.95 क्विंटल प्रति हेक्टेयर थी जो अब 41.36 हो गई है।

प्रगतिशील किसान गांव बढेड़ी घोघू निवासी साधना सिंह का कहना था कि वह खेती में वर्मी कम्पोस्ट खाद का इस्तेमाल करती हैं जिससे उनकी रबी की फसलों में उत्पादकता में बढ़ोतरी हुई है। किसान नई-नई तकनीकी का प्रयोग कर रहे हैं और मेहनत के साथ खेती कर रहे हैं। इसी के चलते पांच सालों के दौरान गेहूं के उत्पादन में प्रति हेक्टेयर 13 क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है। मक्का में 12.73, धान में 3.16 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की वृद्धि हुई है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अभी तक गन्ना किसानों की पहली पसंद होता था। लेकिन अब उसका रूझान गेहूं की खेती ओर तेजी के साथ बढ़ रहा है। पांच सालों के दौरान गेहूं की खेती का क्षेत्रफल 1.10 लाख हेक्टेयर बढ़ गया है और धान 60 हजार, मक्का सात सौ और जौ की खेती 80 हेक्टेयर में हो रही है।

कृषि वैज्ञानिक वीरेंद्र सिंह ने बताया कि परंपरागत फसलों की खेती की ओर किसानों का रूझान बढ़ना स्वागत योग्य है। उन्होंने दलहनी फसलों के क्षेत्रफल में होने वाली कमी को चिंताजनक बताया।

उन्होंने कहा कि किसानों को रासायनिक उर्वरकों का बहुत ही कम करना चाहिए। क्योंकि उससे पोष्टिकता और स्वाद में कमी आती है।

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