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सहारनपुर : किसानों के लिए गन्ने की खेती लाभदायक साबित हो रही है

सहारनपुर : किसानों के लिए गन्ने की खेती लाभदायक साबित हो रही है


सहारनपुर मंडल में गन्ने के क्षेत्रफल में हुई काफी वृद्धि और चीनी परता भी दो फीसदी बढ़ा

पिछले पेराई सत्र का हो चुका है पूरा भुगतान, चालू पेराई सत्र का 50 फीसद भुगतान हो चुका है

सहारनपुर (गौरव सिंघल)। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की गन्ना पट्टी में एक बार फिर से गन्ना किसानों का रूझान गन्ने की खेती की ओर हुआ है। पिछले दो-तीन सालों के दौरान पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों ने पापुलर लकड़ी के उचित दाम ना मिलने के कारण फिर गन्ने की ओर रूख किया है। पिछले तीन वर्षों में सहारनपुर मंडल में गन्ने के क्षेत्रफल में काफी बढ़ोतरी हुई है।

सहारनपुर मंडल के गन्ना आयुक्त डा. दिनेश्वर मिश्र ने आज बताया कि इस बार 3 लाख 16 हजार हेक्टेयर भूमि में गन्ना की बुआई हुई है। जबकि पिछले वर्ष 3 लाख 7 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ना बोया गया था और उससे पहले के वर्ष में 2 लाख 97 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ने की बुआई की गई थी। यानि 2 वर्ष में ही 19 हजार हेक्टेयर की वृद्धि गन्ना बुआई के मामले में हुई है। इससे पता चलता है कि राज्य सरकार ने भले ही गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी नहीं की है। फिर भी गन्ना उत्पादक किसानों को दो कारणों से लाभ हो रहा है। पहला कारण है कि गन्ने की सीओ-238 प्रजाति की गन्ने की उपज से 13 प्रतिशत तक चीनी की प्राप्ति होती है और किसान प्रति हेक्टेयर एक हजार क्विंटल से 15 सौ क्विंटल तक उपज ले रहे हैं। यह अपने आपमें अभूतपूर्व है। इससे पहले जो प्रजातियां गन्ने की किसान बोता था 5 साल पहले तक 35 से 40 क्विंटल प्रति बीघा गन्ना बोता था। जबकि आज 100$ हो गया है। यानि कि ढाई गुना तक पैदावार बढ़ गई है। इस प्रजाति की यह भी खूबी है कि गन्ने की दो लाइनों के बीच में एक अलग से फसल मिल रही है। इस तरह से गन्ने की खेती पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो रहा है।

डा. मिश्र ने आगे कहा कि पहले गन्ने की जो उपज किसान बोता था उसमें चीनी का परता करीब 11 फीसद रहता था जो अब बढ़कर 13 फीसद हो गया है। सीओ-238 प्रजाति गन्ने की पत्तियां स्वयं छूट जाती हैं और अगोला कम होता है और उत्तर प्रदेश के किसान 90 फीसद इसी प्रजाति को बो रहे हैं। सहारनपुर मंडल में 17 चीनी मिलें हैं और वर्तमान में सभी चीनी मिलें पिछले वर्ष की पेराई सत्र का पूर्ण भुगतान कर चुके हैं। मिश्र ने बताया कि शामली चीनी मिल की ओर 7 करोड़ रूपया बकाया था, जिसका भुगतान उनके प्रयासों के द्वारा 24 घंटे के भीतर करा दिया गया। शामली चीनी मिल और बजाज ग्रुप की 3 चीनी मिलों ने वर्तमान पेराई सत्र का गन्ना भुगतान शुरू नहीं किया था, कल से ये चारों चीनी मिलें मौजूदा सत्र का भुगतान शुरू कर देंगी और बाकी चीनी मिलें 50 फीसद तक गन्ना मूल्य का भुगतान कर चुकी हैं।

डा. मिश्र ने बताया कि प्रदेश के गन्ना मंत्री सुरेश राणा और प्रदेश के आयुक्त एवं चीनी मिल के प्रमुख सचिव संजय आर भूसरेड्डी के कड़े निर्देशों के चलते पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चीनी मिलों में घटतोली पर पूरी तरह से रोक लगी हुई हैं। वह स्वयं 9 चीनी मिलों एवं तौल का निरीक्षण करते हैं। पहले घटतोली के चलते किसानों को नुकसान उठाना पड़ता था।

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