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पराली जलाने के मामले में मुख्य सचिव ने कृषि निदेशक को लगाई फटकार

पराली जलाने के मामले में मुख्य सचिव ने कृषि निदेशक को लगाई फटकार


लखनऊ। पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए समीक्षा की। उन्होंने पराली जलने की घटनाओं से संबंधइत सूचनाएं समय से एकत्रित न करने पर कृषि निदेशक के कार्यों पर नाराजगी व्यक्त की।

मुख्य सचिव ने कहा कि 24 घंटे के अन्दर तय प्रारूप को संबंधित जिलों में न भेजने अथवा संबंधित अधिकारियों अपलोड कर वांछित सूचनाएं समय से न भेजने के कारणों का विस्तृत स्पष्टीकरण प्रस्तुत कर दोषी अधिकारियों के विरुद्ध जिम्मेदारी तय की जाए। उन्होंने हरदोई के जिलाधिकारी पुलकित खरे के कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि हरदोई में एक प्रगतिशील किसान के माध्यम से बेलन नामक मशीन से पराली को अन्य उपयोग के लिए तैयार किया जा रहा है। इसी प्रकार पीलीभीत के जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव द्वारा किए गए कार्यों की प्रशंसा करते हुए अन्य जिलों के जिलाधिकारियों को भी बेहतर काम करने के निर्देश दिए हैं।

25 जिलों से मुख्य सचिव के हस्ताक्षर से पत्र निर्गत कर मांगी गई सूचना में केवल बस्ती से जानकारी आई। मुख्य सचिव का कहना था कि बाकी जिले वांछित सूचना कृषि निदेशक के कार्यों में लापरवाही के कारण नहीं भेज पाए। उन्होंने कहा कि जिन जिलों में पराली अभी भी उपलब्ध हो वहां के नजदीक गोवंश संरक्षण केन्द्रों में पराली पहुंचाने की व्यवस्था की जाए।

राजेन्द्र कुमार तिवारी ने के जिलाधिकारी को चेतावनी देते हुए निर्देश दिए कि पराली जलाने की घटनाओं को शत-प्रतिशत रोकने के लिए सार्थक प्रयास किए जाएं। उन्होंने पराली जलाने की अधिक घटनाओं वाले जनपद शाहजहांपुर, रामपुर, महराजगंज, लखीमपुर खीरी, उरई (जालौन), अलीगढ़ सहित अन्य जनपदों से शत-प्रतिशत पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए किये गये काम की प्रगति लेते हुए आवश्यक निर्देश दिये।

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