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भाजपा के पूर्व अध्यक्ष डा. वाजपेयी ने बनाई आयुर्वेदिक पोटली, कोरोना को मात देने का है दावा

भाजपा के पूर्व अध्यक्ष डा. वाजपेयी ने बनाई आयुर्वेदिक पोटली, कोरोना को मात देने का है दावा

पोटली को सूंघते ही फेफड़े को मिलती है ताकत

-डाक्टर वाजपेयी आयुर्वेद के हैं अच्छे जानकार, चार पीढ़ी से घर में बनती है आयुर्वेद की दवाइयां

-सीरप और हर्बल सेनेटाइजर भी बना रहे लक्ष्मी, अब तक तीन हजार से अधिक लोगों में वितरित

लखनऊ, । इस कोरोना काल में हर व्यक्ति अपने-अपने ढंग से सेवा कार्य में जुटा हुआ है। यदि कोई डाक्टर के साथ ही समाज सेवक हो और राजनीति के अखाड़े का पुराना संगठनकर्ता हो तो उसकी जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। ऐसे ही भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डा. लक्ष्मी कांत वाजपेयी हैं, जो आयुर्वेद की पोटली बनाने के साथ ही आयुर्वेद का सीरप व हर्बल सेनेटाइजर भी बना रहे हैं।

03 हजार से अधिक बांट चुके हैं पोटली

उन्होंने इस कोरोना काल में तीन हजार से अधिक लोगों को आयुर्वेद की पोटली, सीरप और सेनेटाइजर बांट चुके हैं। यह शरीर में जीवनी शक्ति बढ़ाकर कोरोना के संक्रमण से बचाव के ​लिए कारगर साबित हो रहा है।

चार पीढ़ी से बन रही आयुर्वेद औषधि

गौरतलब है कि डाक्टर वाजपेयी का परिवार चार पीढ़ी से आयुर्वेद की औषधि बनाता आ रहा है। वे खुद भी कानपुर विश्वविद्यालय से आयुर्वेद स्नातक हैं। उनकी पोटली को बनाने की अनुमति प्रदेश सरकार से 20 अप्रैल और केन्द्र सरकार की ओर से एक जून को मिल गयी है। अब वे इसे ज्यादा मात्रा में बनाने जा रहे हैं।

पोटली को सूंघते ही फेफड़े को मिलती है ताकत

उन्होंने बताया कि इनहेलर की तरह ही यह पोटली है। लोग इस पोटली को सूंघते हैं, दिन में चार से पांच बार प्रयोग करने से फेफड़े तंत्र को ताकत मिलती है। फेफड़ा यदि ताकतवर होगा तो कोरोना के संक्रमण से लड़ने में सक्षम होगा। इसका प्रयोग सांस के रोगियों में पहले भी किया जा चुका है। उनके लिए यह कारगर है।

बताया कि इस पोटली में सोंठ, काली मिर्च, छोटी पीपल, छोटी इलाइची, कपूर, अजवाइन और लौंग जैसी जड़ी बूटियां हैं। इन्हें बारिक पीस कर 10-10 ग्राम पाउडर को कपड़े की पोटली बनाकर लोगों को दी जाती है।

उन्होंने बताया कि यह पोटली तीन हजार से ज्यादा लोगों में वितरित की जा चुकी है। वायरस के संक्रमण से बचने के लिए सुबह स्नान के बाद दोनों नाकों में सरसों का तेल अथवा तिल का तेल साफ उंगली से दो-दो बूंद डाल लें।

नीम, नींबू व गुलाब से बना रहे सेनिटाइजर

डॉ वाजपेई बताते हैं कि शुरु में कोरोना वायरस के मामले बढ़ने के बाद सैनिटाइजर अचानक बाजार से गायब हो गया। इस संकट के काल में हमने अपने औषधी भंडार में नींबू रंग का पारदर्शी सैनिटाइजर बनवाया है, जिसे जरूरतमंद लोगों तक नि:शुल्क पहुंचाया जा रहा है। इस हर्बल सेनिटाइजर में हाइड्रोजन परा आक्साइड, ग्लीसरिन, गुलाब की खुशबू के साथ ही नीम की पत्तियों के काढ़े को भी इसमें मिलाया गया है। इस सेनिटाइजर में 70 प्रतिशत एल्कोहल है। यह सेनिटाइजर भी अब तक 3200 से ज्यादा लोगों में बांटा जा चुका है।

इम्युनिटी बढ़ाने के लिए बना रहे काढ़ा

उन्होंने बताया कि इसके साथ ही 200 एमएल की इम्युनिटी वर्धक काढ़ा की शीशी लोगों के घर पहुंचाया जा रहा है। इस काढ़े में 10 साल के ऊपर वाले एक चम्मच दिन में दो और जो 50 साल की उम्र से ज्यादा हैं, वह दो-दो चम्मच गर्म पानी में पी रहे हैं। आवंला, गिलोय, अश्वगंधा, शतावर, हल्दी काली मिर्च, छोटी पीपल, सोंठ, तुलसी पत्र, नीम पत्र और चिरैयता से तैयार किया गया है।

चरक संहिता पढ़ बना रहे जड़ी-बूटियां

डाक्टर लक्ष्मीकांत ने बताया कि आंवला समेत अन्य फलों में पाए जाने वाले रसायनों में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की क्षमता पर शोध कर रहे हैं। शोध पत्रों में वर्णित कारगर रसायनों की सूची बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि चरक संहिता में ऐसी कई जड़ी बूटियों का जिक्र है, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है। लॉकडाउन में सामाजिक चहल पहल एवं सियासत से मीलों दूर लक्ष्मीकांत अब भी जनता की सेवा में रमे हुए हैं। वो रसोई से लेकर मसालों में पाए जाने वाले आयुर्वेदिक रसायनों के सटीक सेवन की जानकारी देकर लोगों को घर में ही सुरक्षित रहने की सीख दे रहे हैं।

उन्होंने बताया कि अब तक 12 हजार से ज्यादा मास्क अपने मंडल अध्यक्षों के जरिए जनता में बंटवाया है। इसके साथ ही 12 किलो के पांच किलो आटा, चार किलो चावल,एक किलो दाल, अन्य खाने की सामग्री के पैकेट 500 से ज्यादा क्षेत्र में बंटवा चुके हैं।

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