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मेरठ: मुआवजे के लिए किसानों ने पानी की टंकी पर चढ़कर किया प्रदर्शन

मेरठ: मुआवजे के लिए किसानों ने पानी की टंकी पर चढ़कर किया प्रदर्शन


मेरठ। नई भूमि अधिग्रहण नीति के मुवावजे को लेकर प्रशासन के साथ हुई वार्ता विफल हो जाने पर रविवार को किसानों ने परतापुर थाना क्षेत्र के शताब्दी नगर में 120 फुट ऊंची पानी की टंकी पर चढ़कर प्रदर्शन किया। किसानों ने एमडीए के खिलाफ जमगर नारेबाजी की।

शताब्दी नगर सेक्टर चार में भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले शताब्दी नगर योजना के अंतर्गत आने वाले घोसला, रिठानी, जैनपुर व अच्छरोडा गांव के किसान नई भूमि अधिग्रहण नीति के तहत मुआवजा दिए जाने की मांग पिछले चार वर्ष से करते आ रहे हैं। बीते शनिवार को प्रशासन के साथ वार्ता विफल हो जाने पर आक्रोशित किसानों आज पानी की टंकी पर चढ़कर नारेबाजी की।

किसानों का कहना है कि आंदोलन के दौरान अब तक 22 किसानों की मौत हो चुकी है। इस वक्त 600 एकड़ जमीन किसानों के कब्जे में है। किसानों ने वहां चल रहे एमडीए के सभी काम रुकवा दिए हैं। तीन दशकों में भी एमडीए किसानों के मुआवजे के मसले को नहीं निपटा पाया। मुवावजे की जंग के लिए स्वयं एमडीए की लेटलतीफी शामिल है। लेकिन अब किसानों ने नई नीति के तहत मुआवजे की मांग तेज कर दी है।

किसानों का कहना है कि जमीन पर उनका कब्जा है और नई नीति बताती है कि शहरी क्षेत्र में सर्किल रेट का 2 गुना मुआवजा उन्हें दिया जाए। लेकिन डीएम अनिल ढींगरा ने यह कहते हुए टाल दिया कि अब सारी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं। इसलिए इस नीति के तहत मुआवजा देने का प्रश्न ही नहीं उठता। किसानों ने कहा कि जब तक हमारी मांगे नहीं मानी जाती तब तक हम एक इंच भी जमीन नहीं छोड़ेंगे।

गौरतलब है कि सन 1987 में शताब्दी नगर योजना की नींव रखी गई थी। शताब्दी नगर के प्लॉट बेचने को एमडीए ने दिल्ली व चंडीगढ़ तक आवेदन भेजे थे। तदुपरांत दिल्ली व एनसीआर के लोगों ने बड़ी संख्या में यहां प्लाट खरीदे और भवन बुक कराये। इनमें बहुतों का पैसा फंस गया है क्योंकि एमडीए ने जहां प्लाट काटे हैं, वही पर अब किसानों का कब्जा है जहां अब खेती हो रही है।


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