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मेरठ - मुजफ्फरनगर निवासी डाॅ. के बेटे के हत्यारों को उम्रकैद से माता-पिता को मिला सुकून, अदालत ने तीन डाॅक्टरों को सुनाई उम्रकैद की सजा

मेरठ - मुजफ्फरनगर निवासी डाॅ. के बेटे के हत्यारों को उम्रकैद से माता-पिता को मिला सुकून, अदालत ने तीन डाॅक्टरों को सुनाई उम्रकैद की सजा


मेरठ। पंद्रह साल पहले हुए मेडिकल की पढ़ाई कर रहे बेटे के कत्ल के दोषियों को उम्रकैद की सजा मिलने से माता-पिता को सुकून मिला है। बेटे के हत्यारों को सजा दिलाने के लिए कचहरी की भागदौड़ करने का नतीजा यह मिला कि कोर्ट ने तीन डाॅक्टरों को उम्रकैद की सजा सुनाई।

छह जुलाई 2004 को एलएलआरएम मेडिकल काॅलेज, मेरठ में एमबीबीएस द्वितीय वर्ष के छात्र सिद्धार्थ चौधरी की हत्या कर दी गई थी। उसका शव हाॅस्टल के कमरे में मिला था। बेटे की मौत पर उसके पिता मुजफ्फरनगर निवासी डाॅ. सुरेंद्र सिंह ग्रेवाल व उनकी डाॅक्टर पत्नी ने मेडिकल काॅलेज की प्राचार्य डाॅ. उषा शर्मा, हाॅस्टल इंचार्ज डाॅ. सचिन मलिक, अमनदीप सिंह और यशपाल राणा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। पुलिस ने अपनी जांच में डाॅ. उषा शर्मा को क्लीन चिट दे दी। यह मामला एडीजे प्रथम गुरप्रीत सिंह बावा की अदालत में चल रहा था। अपने बेटे के हत्यारों को सजा दिलाने के लिए डाॅक्टर दंपति ने 15 साल तक मेरठ कचहरी के चक्कर काटे।

डाॅक्टर दंपति का कहना है कि इतनी लंबी अवधि में चक्कर काटते-काटते वह थक चुके थे। अब जाकर एडीजे प्रथम की अदालत ने तीनों हत्यारों डाॅ. सचिन मलिक, अमनदीप सिंह और यशपाल राणा को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही उन पर एक-एक लाख रुपये का अर्थदंड लगाया है। इससे डाॅक्टर दंपति को राहत की सांस मिली है। 15 साल की अवधि में दोषी पाए गए अमनदीप सिंह और यशपाल राणा भी एमबीबीएस करके डाॅक्टर बन गए।

डाॅ. उषा शर्मा पर चलेगा मुकदमा

सरकारी अधिवक्ता नरेश दत्त शर्मा और डाॅक्टर दंपति के अधिवक्ता योगेंद्र पाल सिंह ने बताया कि इस मामले में कुल 20 गवाह पेश किए गए थे। कोर्ट ने पूर्व प्राचार्य डाॅ. उषा शर्मा पर अलग से मुकदमा चलाने की मंजूरी दी है। कोर्ट ने तीन दिन पहले ही तीनों आरोपितों को जेल भेज दिया था। 15 साल बाद आए मेडिकल छात्र की हत्या के फैसले ने मेडिकल कालेज में खलबली पैदा कर दी है। वहां यह फैसला चर्चा का बिषय बना हुआ है।


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