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लॉकडाउन में स्कूल फीस माफ़ी पर स्कूल मालिक ही आपस में भिड़े, एक गुट बोला- छूट देंगे, दूसरा बोला-हम तो पहले से ही सस्ते

लॉकडाउन में स्कूल फीस माफ़ी पर स्कूल मालिक ही आपस में भिड़े, एक गुट बोला- छूट देंगे, दूसरा बोला-हम तो पहले से ही सस्ते

लखनऊ, 31 जुलाई । कोरोना के कारण कई अभिभावकों की खराब स्थिति के कारण अन एडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन द्वारा ऐसे परिवारों के बच्चों को स्कूल फीस में छूट का ऐलान करने का विरोध शुरू हो गया है।

स्ववित्तपोषित विद्यालय प्रबंधक एसोसिएशन के अध्यक्ष आनंद द्विवेदी ने अन एडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल के कमजोर आर्थिक स्थिति वाले अभिभावकों के लिए 20 प्रतिशत छूट देने के फैसले को भ्रामक व अभिभावकों को गुमराह करने वाला बताया।

उन्होंने बताया कि अनिल अग्रवाल शहर के कुछ नामचीन मुट्ठी भर स्वयंभू विद्यालयों का प्रतिनिधित्व करते हैं जो अधिकतर सीबीएसई या आईसीएसई बोर्ड द्वारा संचालित होते हैं। यह विभिन्न मदों में अभिभावकों से भारी भरकम फीस वसूल करते हैं। इस प्रकार के विद्यालयों की संख्या कुल विद्यालयों की संख्या का मात्र 05 से 08 प्रतिशत ही है। इन मुठ्ठी भर विद्यालयों ने अभिभावकों की कमर तोड़ कर रख दी है। इनके द्वारा शिक्षण शुल्क के अतिरिक्त अन्य कई मदों में भारी-भरकम फीस वसूलने का दबाव बनाया जाता है।

उन्होंने कहा कि जबकि स्ववित्तपोषित विद्यालय प्रबंधक एसोसिएशन 85 से 90 प्रतिशत विद्यालयों का प्रतिनिधित्व करती है जिसमें अधिकतर विद्यालय यूपी बोर्ड द्वारा संचालित होते हैं जो 500 से 1,000 मासिक फीस लेकर बच्चों को अच्छी और सस्ती शिक्षा प्रदान करते हैं। यह विद्यालय पहले से ही अभिभावकों की आर्थिक मदद करते आ रहे हैं और इन विद्यालयों से अभिभावकों को कभी किसी प्रकार की समस्या का सामना नहीं करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि स्ववित्तपोषित विद्यालय प्रबंधक एसोसिएशन इस भ्रामक निर्णय का विरोध करती है।

वहीं अन एडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल की ओर से शुक्रवार को प्रेस कान्फ्रेंस में कहा गया कि निजी के साथ कई मिशनरी स्कूल, एंग्लो इंडियन स्कूल भी फीस में 20 प्रतिशत छूट देंगे। इसके अलावा कम्प्यूटर फीस भी नहीं ली जाएगी। ये छूट कम से कम 6 महीने या फिर जब तक स्कूल में फिजिकल क्लास नहीं होती तब तक दी जाती रहेगी। इसका मतलब जब तक सिर्फ ऑनलाइन क्लास चल रही हैं तब तक ये छूट मिलती रहेगी। लखनऊ के साथ ही लखीमपुर और सीतापुर की एसोसिएशन व वाराणसी के एक बड़े स्कूल ग्रुप ने भी इस पर सहमति दी है। अनिल अग्रवाल ने कहा कि प्रदेश के सभी एसोसिएशन से बात की जा रही है कि वो भी फीस में रियायत दें।

एसोसिएशन के अनुसार इस छूट का लाभ सिर्फ उनको मिलेगा जो कोरोना काल मे आर्थिक रूप से प्रभावित हुए हैं। सरकारी कर्मचारियों या ऐसे लोगों को छूट नहीं मिलेगी, जिनके काम पर लॉकडाउन का असर नहीं हुआ।

एसोसिएशन में शामिल स्कूलों ने अभिभावकों को फीस जमा करने के लिए 10 अगस्त तक का समय दिया है। जो इस तारीख तक फीस जमा नही करेंगे उनके बच्चों का नाम तो नहीं काटा जाएगा। लेकिन, ऑनलाइन क्लास से जरूर वंचित किया जाएगा। हालांकि अगर कोई इतना मजबूर है कि छूट के बाद भी फीस नहीं दे सकता तो उसके लिए अलग से विचार करने की बात कही गई है।

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