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नगर आयुक्त और मेयर में तकरार बढ़ी, महापौर बोलीं- लड़ाई व्यक्ति विशेष नहीं,भ्रष्टाचार के खिलाफ

नगर आयुक्त और मेयर में तकरार बढ़ी, महापौर बोलीं- लड़ाई व्यक्ति विशेष नहीं,भ्रष्टाचार के खिलाफ

लखनऊ, । महापौर संयुक्ता भाटिया और नगर आयुक्त इंद्रमणि त्रिपाठी के बीच तकरार तेज होती जा रही है। इस बीच महापौर ने शुक्रवार को कहा कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध नहीं है। यह लड़ाई भ्रष्टाचार के खिलाफ है।

महापौर ने कहा कि वह न तो किसी के साथ हैं और न ही किसी के विरोध में। जनहित और लखनऊ नगर निगम की स्वच्छ एवं पारदर्शी छवि के लिए जो उचित होगा वह करेंगी। उन्हें इससे कोई नहीं डिगा सकता है। महापौर ने कहा​ कि योगी सरकार में भ्रष्टाचार पर जीरों टाॅलरेन्स की नीति है। जिसका कड़ाई से पालन किया जाएगा। जो निर्दोष है उसे डरने की आवश्यकता नहीं है। वहीं जांच के बाद जो दोषी पाये गये उन्हें सरकार छोड़ेगी नहीं।

महापौर ने कहा कि जनता ने उन्हें चुनकर पहरेदारी के लिए भेजा है। इसलिए वह अपना काम करती रहेंगी। उन्होंने कहा कि उनके कार्यालय में भ्रष्टाचार की शिकायत का एक भी पत्र कूड़ेदान में नहीं जाएगा। सभी प्रकरणों पर वह जांच कराएंगी। सभी के लिए उनके दरवाजे 24 घण्टे खुले हैं।

दरअसल महापौर ने प्रमुख सचिव नगर विकास को पत्र लिखकर नगर निगम में चल रहे भ्रष्टाचार के अलावा नगर आयुक्त और मुख्य अभियंता विद्युत व यांत्रिक के खिलाफ ईओडब्ल्यू या सतर्कता विभाग से जांच कराने की मांग की है।

उनका कहना है कि शिकायत के साथ उनको ऑडियो रिकॉर्डिंग भी मिली हैं जो कि भ्रष्टाचार व ठेकों में लूट की तरफ इशारा कर रही हैं। महापौर ने यह पत्र अतीकुर्ररहमान, निवासी तेलीबाग के शिकायती पत्र को आधार बनाते हुए भेजा है। अतीकुर्ररहमान खुद भी नगर निगम में ठेकेदारी करता है।

शिकायती पत्र में कहा गया है कि नगर आयुक्त और मुख्य अभियंता ठेकों की लूट से मिले धन से रिश्तेदारों के नाम पर संपत्तियां खरीद रहे हैं। गहन जांच होनी चाहिए। उधर नगर आयुक्त इंद्रमणि त्रिपाठी का कहना है कि महापौर का आरोप बेबुनियाद है। जिस व्यक्ति की शिकायत पर पत्र लिखा गया है। वह खुद ठेकेदार है। बिना टेंडर के 87 लाख रुपये के काम मार्ग प्रकाश में कराए जाने का दावा उसने किया था। भुगतान के लिए दबाव भी बनाता रहा। कोर्ट से भी उसे राहत नहीं मिली। अब महापौर के जरिए झूठे आरोप लगाकर बदनाम कर रहा है।

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