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गाज़ियाबाद के मंत्री अतुल गर्ग पर भाई की 50 करोड़ की संपत्ति कब्जाने का आरोप, मंत्री बोले- आज तक नहीं लगा कोई आरोप,हर जांच को हूँ तैयार !

गाज़ियाबाद- उत्तर प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य राज्यमंत्री पर उनके चचेरे भाई ने करीब 50 करोड़ की पैतृक संपत्ति हड़पने का आरोप लगाया है ।इतना ही नहीं मंत्री के खिलाफ उन्होंने पीएमओ को एक पत्र लिखा है ।जिसमें सभी बातों का जिक्र किया गया है ।साथ ही उन्होंने अपनी जान का खतरा भी बताया है और न्याय ना मिलने पर उन्होंने परिवार के सहित आत्महत्या किए जाने की बात ही लिखी है ।

वहीं दूसरी तरफ स्वास्थ्य राज्यमंत्री ने इन सभी आरोपों को गलत करार देते हुए कहा है कि उनका किसी से कोई भी विवाद नहीं है और क्योंकि वह जिम्मेदार पद पर आसीन हैं। इसलिए इस तरह के आरोपों से सरकार की छवि भी धूमिल होती है। यदि सरकार चाहे तो एक समिति गठित कर इस पूरे मामले की गहन जांच करा सकती है। वह इसके लिए पूरी तरह तैयार हैं और अभी तक जो भी उनके ऊपर आरोप लगाए गए हैं सभी बेबुनियाद हैं।

गाजियाबाद के विधायक एवं स्वास्थ्य राज्यमंत्री अतुल गर्ग के चचेरे भाई श्याम गर्ग ने अतुल गर्ग पर पैतृक संपत्ति हड़पने का आरोप लगाया है। श्याम गर्ग का कहना है कि उनकी 100 बीघा जमीन पसोंडा में मौजूद थी। जिसमें पूरा परिवार हिस्सेदार है। इस जमीन का कोई बंटवारा नहीं हुआ है ।इनके पिताजी की मृत्यु हो गई थी और उसके बाद फर्जी मुख्तारनामा कर आपस में ही वह जमीनअपने नाम कर ली गई । उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार इस बारे में स्वास्थ्य राज्य मंत्री अतुल गर्ग से मिलने का प्रयास किया तो उन्होंने मिलने से ही इनकार कर दिया और शुरू में उन्होंने बोला कि यह परिवार का मामला है। इससे परिवार की बदनामी होती है और वह शांत हो जाएं । उन्होंने कहा कि उसके बाद से वह जब भी मिलने जाते हैं ,तो उन्हें मना कर दिया जाता है । श्याम गर्ग ने बताया कि 2017 में भी अपनी संपत्ति लेने के लिए इन पर एक केस दायर किया था ।जिसमें परिवार के सभी लोगों ने बैठकर समझौता कराया लेकिन अभी तक पसोंडा वाली जमीन का कोई बंटवारा नहीं हुआ और उन्हें हिस्सा नहीं मिला है। श्याम गर्ग का कहना है कि इसके लिए उन्होंने कई बार स्थानीय पुलिस से भी शिकायत की है लेकिन पावर में होने के नाते पुलिस में भी उनकी कोई सुनवाई नहीं की गई। इसके अलावा उन्होंने जनसुनवाई पर भी इसकी शिकायत दर्ज कराई थी वहां भी कोई सुनवाई नहीं हुई ।जिससे वह बेहद आहत हैं।तो अब उन्होंने परेशान होकर 11 सितंबर को पीएमओ को एक पत्र लिखा है। श्याम गर्ग ने पीएमओ को लिखे गए पत्र में अपनी जान को खतरा बताया है और अब उनका कहना है कि यदि जल्द ही इनकी बात पर सुनवाई नहीं की गई। तो वह अपने परिवार के साथ आत्महत्या करने को मजबूर होंगे और जिसके जिम्मेदार सीधे-सीधे सभी घर के सदस्य , शासन ,प्रशासन के संबंधित अधिकारी एवं खुद स्वास्थ्य राज्य मंत्री अतुल गर्ग भी जिम्मेदार होंगे।

उधर इस पूरे मामले की जानकारी देते हुए श्याम गर्ग के अधिवक्ता विजय राठी ने बताया कि इस पूरे परिवार की संपत्ति की झगड़े की जड़ मुख्तारनामा है, जो कि 1993 में हुआ था , उसमें इनके फर्जी हस्ताक्षर और अंगूठा लगाकर संपत्ति को आगे बेच दिया गया और सभी अन्य लोगों ने वह हिस्सा बांट लिया ।अधिवक्ता विजय राठी ने कहा कि इस सभी आरोपों की सीबीआई जांच होनी चाहिए। ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो जाए।

वही दूसरी तरफ इस पूरे मामले को लेकर गाजियाबाद के विधायक और स्वास्थ्य राज्य मंत्री अतुल गर्ग का कहना है कि उनके पिताजी सात भाई थे ।जिनका करीब 40 साल पहले बंटवारा हुआ था, जिसमें कोई विवाद नहीं है ,श्याम गर्ग उनके चचेरे भाई है और इनके पिताजी यानी उनके चाचा नरेश चंद्र गर्ग चौथे नम्बर के थे,उनके भी चार लड़के और एक लड़की है, जिनका बंटवारा 20 साल पहले हो चुका है और कोई विवाद नहीं है। जिन्होंने आज उन पर आरोप लगाया है, इन्होंने 6 साल पहले किन्हीं कारणवश अपनी संपत्ति को बेच दिया था और इनकी माली हालत खराब होती चली गई ,इतना ही नहीं उनकी देखरेख और खाने का खर्चा इनका छोटा भाई आलोक गर्ग और इनकी चाची ही वहन करती है। उनके ऊपर जो उनके चचेरे भाई श्याम गर्ग द्वारा जो आरोप लगाए गए हैं , वह सभी बेबुनियाद हैं और यदि उन्होंने पीएमओ को पत्र लिखा है, तो निश्चित तौर पर उनकी छवि धूमिल करने का कार्य किया गया है, वह खुद चाहते हैं कि सरकार इस पूरे मामले को लेकर एक समिति गठित कर गहनता से जांच करा ली जाए। अतुल गर्ग ने साफ किया है कि उन पर लगाए गए आरोप बेबुनियाद है, उन्होंने बताया कि श्याम गर्ग के हिस्से में जो सम्पत्ति आयी थी,वो उसने बेच दी है और श्याम के भाई और माँ, श्याम को आज भी 25 हज़ार रुपये मासिक खर्च देते है, लेकिन वो हर बार दबाव बनाकर खर्च बढ़वाना चाहते है, मंत्री ने कहा कि वे जिम्मेदार पद पर है, वे हर जांच को तैयार है,हम 24 भाई-बहनों में 23 एक तरफ है और उसका ससुर भी उसके साथ नहीं है, वो केवल खर्च बढ़वाने के लिए इस तरह की बातें कर रहा है, वे हर तरह की जांच को तैयार है,उन पर आज तक कभी कोई आरोप नहीं लगा पाया है। अतुल गर्ग ने बताया कि हमारे परिवार, राम किशन दास संयुक्त परिवार की समस्त संपत्ति का बंटवारा लाला राम किशन दास के सभी पुत्रों के मध्य सन 1987 में आपसी सहमति से हो चुका है। उन्होंने कहा कि यदि कोई विवाद है तो श्याम गर्ग व उनके भाइयों के बीच है। मेरा व मेरे परिवार को इससे कोई मतलब नहीं है। उसने कहा कि चूंकि वह एक सामाजिक आदमी है और वर्तमान में राज्यमंत्री हैं। इस लिए श्याम गर्ग पीएमओ में शिकायत कर उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना चाहता है। उन्होंने कहा कि यदि कोई जांच होती है तो वह इस जांच में पूरा सहयोग करेंगे।

शिकायत कर्ता श्याम गर्ग के भाई आलोक गर्ग व अनुज गर्ग ने एक बयान में कहा है कि उनका ताऊजी के साथ 1987 में आपसी सहमति से समझौता हो चुका है। किसी चाचा, ताऊ का हमारे परिवार की संपत्ति से कुछ लेना-देना नहीं रहा है तथा उस समय परिवार के मुखिया एवं हमारे सबसे बड़े ताऊ स्वर्गीय दिनेश चंद्र गर्ग व हमारे पिताजी स्वर्गीय नरेश चंद्र गर्ग जीवित थे, उनके पश्चात 1989 में हमारे पिताजी के स्वर्गवास के उपरांत हमारे चारों भाई एक साथ रह रहे थे, परंतु अपनी गंदी आदतों व शराब के अत्यधिक सेवन से श्याम गर्ग की सोचने व समझने की शक्ति समाप्त हो गई और परिवार में निरंतर विवाद को देखते हुए परिवार के मुखिया दिनेश चंद्र की उपस्थिति में श्याम गर्ग का सन 2001 में बंटवारा करके इसे परिवार की पुश्तैनी कपड़े की दुकान हिस्से में दे दी गई, परंतु अपनी गलत आदतों के चलते इसने दुकान बर्बाद करके बेच खाई, साथ ही बाहरी व्यापारी, गाजियाबाद के दुकानदारों व रिश्तेदारों से काफी पैसा उधार लेकर वापस नहीं किया। इसके द्वारा निरंतर धमकी देकर मारने अथवा आत्महत्या की धमकी देकर पैसे की नाजायज मांग चलती रही जिसे हम अपना सगा छोटा भाई समझ कर समय-समय पर पूरा करते रहे और आज तक भी मदद करते रहे हैं। इस पूरे प्रकरण में मेरे चचेरे भाई अतुल गर्ग एवं उनके परिवार के अन्य किसी सदस्य का कोई लेना देना नहीं है ,30 जुलाई 2020 को श्याम गर्ग द्वारा उन्हें आत्महत्या की धमकी देकर हमे नाजायज रूप से ब्लैकमेल करने की कोशिश की गई जिस पर हम पुलिस अधीक्षक नगर से मिले तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से मिलकर थाना कवि नगर गाजियाबाद में श्याम गर्ग के खिलाफ एफ आई आर भी दर्ज करा दी थी जिसमे जांच अधिकारी द्वारा मेरे बयान भी हो गए थे, परंतु आज तक भी पुलिस द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गई है ।





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