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वृंदावन में बांकेबिहारी मंदिर के कपाट भक्तों के लिये खुले

वृंदावन में बांकेबिहारी मंदिर के कपाट भक्तों के लिये खुले

मथुरा, 17 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश की कान्हानगरी के वृंदावन में विश्व विख्यात बांकेबिहारी मन्दिर करीब सात महीनों के लंबे अंतराल के बाद प्रशासनिक अधिकारियों के हस्तक्षेप से अपने निर्धारित समय से सवा घंटे की देरी से श्रद्धालुओं के लिये खोला गया।

मन्दिर के प्रबंधक मुनीष शर्मा ने शनिवार को बताया कि मन्दिर के खुलने का समय सुबह आठ बजे निर्धारित है लेकिन सेवायत शैलेन्द्र गोस्वामी मंदिर खुलने के समय के सवा घंटे बाद तक अपने कुछ जजमानों को मन्दिर का देहरी पूजन सम्पन्न कराते रहे। श्रद्धालुओं के विरोध एवं प्रशासनिक अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद मन्दिर जब खुला तो बहुत से श्रद्धालु कोविड-19 के नियमों का अनुपालन करना भूल गए।

उन्होंने बताया कि मन्दिर के बाहर जहां बहुत अधिक भीड़ थी वहीं मन्दिर के अन्दर सामाजिक दूरी का पालन कराने में आज मन्दिर प्रशासन को बड़ी मशक्कत करनी पड़ी।

उधर सेवायत शैलेन्द्र गोस्वामी ने मन्दिर का पर्दा देर से खुलने का कारण स्पष्ट करते हुए कहा कि आज राजभोग दर्शन विलम्ब से होने का कारण मन्दिर के प्रबंन्धक मुनीष शर्मा द्वारा सेवायतों को मन्दिर में आठ बजे प्रवेश देना है जब कि मन्दिर के जगमोहन का पर्दा खुलने का समय आठ बजे है। उन्होंने बताया कि मन्दिर खुलने के बाद ठाकुर का श्रंगार करने में दो घंटे लग जाते हैं ।

मन्दिर में प्रवेश देर से मिलने के कारण आज सेवायतों ने किसी प्रकार ठाकुर का श्रंगार लगभग डेढ घटे में पूरा किया। उन्होंने बताया कि मन्दिर के प्रबंधक के आचरण की शिकायत आज उन्होंने सिविल जज जूनियर डिवीजन मथुरा से की है जिनकी देखरेख में मन्दिर वर्तमान में संचालित हो रहा है।

उन्होंने बताया कि कोविद-19 के नियमों का अनुपालन सुनिश्चित कराने के लिए रविवार से मन्दिर के और अधिक सुरक्षाकर्मी लगाए जाएंगे। मन्दिर के बाहर बहुत से लोग कोविड-19 के नियमों का अनुपालन नही कर रहे थे और भीड़ बढ़ने के कारण सामाजिक दूरी का अनुपालन नही हो रहा था।

सीओ सदर रमेश तिवारी ने मन्दिर के बाहर इकट्ठा हुई भीड़ के लिए मन्दिर प्रबन्धन को दोषी ठहराते हुए कहा कि एक ओर मन्दिर प्रबन्धन कह रहा है कि जिन श्रद्धालुओं का रजिस्ट्रेशन होगा वही दर्शन कर सकेंगे या एक सीमित संख्या में ही लोग दर्शन कर सकेंगे दूसरी ओर इसकी सूचना मन्दिर की वेबसाइट में नही डाली गई है और बिना तैयारी के मन्दिर खोल दिया गया है। मन्दिर दर्शन के बारे में जितना जल्दी अपनी नीति का प्रचार प्रसार कर देगा मन्दिर के बाहर की भीड़ अपने आप कम हो जाएगी क्योंकि केवल वे ही लोग मन्दिर में आएंगे जिनको दर्शन की अनुमति होगी।

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