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असम के हिरासत केंद्रों के बंदियों की रिहाई का सीजेआई से अनुरोध

असम के हिरासत केंद्रों के बंदियों की रिहाई का सीजेआई से अनुरोध


नयी दिल्ली- कोरोना वायरस के मद्देनजर जेल से कैदियों को अंतरिम जमानत और पैरोल पर भेजने की उच्चतम न्यायालय की सलाह के बाद एक गैर-सरकारी संगठन ने असम के हिरासत केंद्रों में रखे गये बंदियों की रिहाई के आदेश की भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) से मांग की है।

'जस्टिस एंड लिबर्टी' नामक एक संगठन ने सीजेआई को पत्र लिखकर इस मामले में मानवीय आधार पर हस्तक्षेप करने का उनसे अनुरोध किया है। संगठन की ओर से वकील अमन वदूद ने यह पत्र ड्राफ्ट किया है।

संगठन ने अपने पत्र में गत 11 मार्च को राज्यसभा में सरकार के बयान का हवाला देते हुए कहा है कि असम में छह हिरासत केंद्रों में 802 व्यक्ति हैं। इन लोगों में कई वृद्ध और बीमार हैं। सरकार ने माना है कि पिछले साल हिरासत में कम से कम 10 बंदियों की मौत हो गई है। वर्ष 2016 से अब तक 29 लोगों ने विभिन्न बीमारियों के कारण दम तोड़ दिया है।

संगठन ने उच्चतम न्यायालय के गत वर्ष 10 मई को पारित उस आदेश का भी हवाला दिया है, जिसमें उन सभी हिरासती लोगों को छोड़ने की अनुमति दी गयी थी, जिन्हें तीन साल से अधिक समय तक हिरासत में रखा जा चुका है और ये मुचलका भरने के अधीन रखा गया है।

अर्जीकर्ता ने कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के मद्देनजर शीर्ष अदालत द्वारा जेल में बंद कैदियों की रिहाई और सात साल से कम सजा वाले अपराधों में पैरोल या अंतरिम जमानत पर रिहाई की सरकार को सलाह दी गयी है। संगठन ने कहा है,

"यह उल्लेख करना उचित है कि उनमें से बहुत से लोग अपने खिलाफ पारित एकपक्षीय-आदेश के कारण परेशान हैं। इसके अलावा, कई लोगों ने विदेशी ट्रिब्यूनल के आदेशों को चुनौती दी है, जो उच्च न्यायालय या सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लंबित है।"


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