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गंगा उपमहाद्वीप की पवित्र नदी, कायाकल्प पर जनसहभागिता जरूरीः प्रधानमंत्री

गंगा उपमहाद्वीप की पवित्र नदी, कायाकल्प पर जनसहभागिता जरूरीः प्रधानमंत्री


- राष्ट्रीय गंगा परिषद की पहली बैठक में बोले नरेन्द्र मोदी-केंद्र सरकार पैसे की कमी नहीं आने देगी, पांच साल में खर्च हुए 20 हजार करोड़

कानपुर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को कहा, गंगा समूचे भारतीय उपमहाद्वीप की पवित्र नदी है। गंगा को स्वच्छ और निर्मल करने के अभियान में केंद्र सरकार पैसों की कमी नहीं आने देगी। सरकार इसके कायाकल्प के लिए काम कर रही है। इस अभियान में जनसहभागिता जरूरी है। गंगा का कायाकल्प ऐसा हो कि विश्वपटल पर इसकी चर्चा हो। प्रधानमंत्री ने यह बात यहां राष्ट्रीय गंगा परिषद की पहली बैठक में कही।

उन्होंने कहा, गंगा का कायाकल्प देश के लिए लंबे समय से चुनौती बना हुआ है। 2014 के बाद से इस पर काफी काम किया जा चुका है। पिछले पांच साल में करीब 20 हजार रुपये खर्च हो चुके हैं। प्रधानमंत्री ने कहा राष्ट्रीय गंगा परिषद को गंगा बेसिन और उसकी सहायक नदियों के प्रदूषण निवारण और कायाकल्प की समग्र जिम्मेदारी दी गई है। इस बैठक का उद्देश्य संबंधित राज्यों के सभी विभागों के साथ संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों में 'गंगा केंद्रित 'दृष्टिकोण के महत्व को मजबूत करना था।

प्रधानमंत्री ने स्वच्छ, अविरलता और निर्मलता पर ध्यान देते हुए गंगा नदी की सफाई के विभिन्न पहलुओं पर किए गए कार्यों की प्रगति की समीक्षा करने के साथ विचार-विमर्श किया। उन्होंने कहा कि मां गंगा उपमहाद्वीप की सबसे पवित्र नदी है और इसके कायाकल्प को सहकारी संघवाद के चमकदार उदाहरण के रूप में सामने आना चाहिए। सरकार ने 2014 में 'नमामि गंगे' शुरू करने के बाद से बहुत कुछ किया है, जो प्रदूषण उन्मूलन, संरक्षण और गंगा के कायाकल्प के उद्देश्य से विभिन्न सरकारी प्रयासों और गतिविधियों को एकीकृत करने के लिए एक व्यापक पहल के रूप में है।

मोदी ने कहा कि गंगा देश के पांच राज्यों से होकर गुजरती है और इन राज्यों को नदी में पर्याप्त पानी के प्रवाह के लिए पिछले पांच सालों में 20 हजार करोड़ आवंटित किए गए। इसके साथ ही नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों के निर्माण के लिए 7700 करोड़ रुपये पहले ही खर्च किए जा चुके हैं।

जन सहयोग की अपेक्षाः प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि निर्मल गंगा के सुधार ढांचे को राष्ट्रीय नदियों के किनारे स्थित शहरों से सर्वोत्तम प्रथाओं के प्रसार के माध्यम से जनता से बड़े पैमाने पर पूर्ण सहयोग की आवश्यकता होगी। योजनाओं के त्वरित कार्यान्वयन के लिए प्रभावी ढांचा जरूरी है। इसके लिए सभी जिलों में गंगा समितियों की दक्षता में सुधार किया जाना चाहिए। गंगा को पवित्र बनाने में जनसहयोग जरीरी है। बाकी ढांचागत काम सरकार कर रही है। हमें इसे चुनौती के रूप में स्वीकार करना है और आने वाले दिनों में गंगा के कायाकल्प की चर्चा भारतीय उपमहाद्वीप ही नहीं विश्व पटल पर होनी चाहिए।

सीजीएफ को साढ़े सोलह करोड़ः प्रधानमंत्री ने कहा-सरकार ने गंगा कायाकल्प परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए व्यक्तियों, एनआरआई और कॉर्पोरेट संस्थाओं से योगदान की सुविधा के लिए स्वच्छ गंगा कोष (सीजीएफ) की स्थापना की है। प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने व्यक्तिगत रूप से सीजीएफ को 16.53 करोड़ रुपये दिए हैं। यह रुपये 2014 के बाद से मिले उपहारों की नीलामी और सियोल पीस पुरस्कार की पुरस्कार राशि से प्राप्त हुए हैं।

महिला समूहों को दी जाए प्राथमिकताः प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने समग्र सोच प्रक्रिया का आग्रह करते हुए कहा कि नमामि गंगे एक सतत विकास मॉडल है। यह गंगा से संबंधित आर्थिक गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करता है। इस प्रक्रिया के भाग के रूप में किसानों को टिकाऊ कृषि पद्धतियों में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। इसमें शून्य बजट खेती, फलदार पौध लगाने और गंगा के किनारे पौध नर्सरी का निर्माण शामिल है। इन कार्यक्रमों के लिए महिला स्वयं सहायता समूहों और पूर्व सैनिकों के संगठनों को प्राथमिकता दी जा सकती है। इस तरह के अभ्यास, जल के खेल के लिए बुनियादी ढांचे के निर्माण और शिविर स्थलों, साइकिल और चलने की पटरियों आदि के विकास के साथ नदी के बेसिन क्षेत्र के हाइब्रिड पर्यटन क्षमता को धार्मिक और साथ ही साहसिक पर्यटन के लिए टैप करने में मदद मिलेगी। पर्यावरण-पर्यटन और गंगा वन्यजीव संरक्षण और क्रूज पर्यटन आदि को प्रोत्साहित करने से उत्पन्न आय से गंगा की सफाई के लिए स्थायी आय उत्पन्न करने में मदद मिलेगी।

डिजिटल डैशबोर्ड की हो स्थापनाः मोदी ने बैठक में नमामि गंगे और अर्थ गंगा के तहत विभिन्न योजनाओं और पहल की कार्य प्रगति और गतिविधियों की निगरानी के लिए डिजिटल डैशबोर्ड की स्थापना के निर्देश दिए। उन्होंने कहा- जल शक्ति के लिए डिजिटल डैशबोर्ड के जरिये गांवों और शहरी निकायों के डेटा की दैनिक रूप से नीति आयोग और मंत्रालय को निगरानी करनी चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि आकांक्षात्मक जिलों की तरह, गंगा की सीमा वाले सभी जिलों को नमामि गंगे के तहत प्रयासों की निगरानी के लिए एक फोकस क्षेत्र बनाया जाना चाहिए।

इस बैठक में हिस्सा लेने से पहले प्रधानमंत्री ने महान स्वतंत्रता सेनानी चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा को पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय में नमामि गंगे और परियोजनाओं पर केंद्रित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। यहां के बाद अटल घाट का दौराकर सीसामऊ नाले में सफाई के सफलतापूर्वक पूर्ण कार्य का भी निरीक्षण किया।


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