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लखीमपुर खीरी में बीजेपी कार्यकर्ता ने महिला सिपाही से की छेड़छाड़, सिपाही लाई थाने तो जबरन छुड़ा ले गए विधायक, मचा हंगामा तो फिर हुआ गिरफ्तार

लखीमपुर खीरी में बीजेपी कार्यकर्ता ने महिला सिपाही से की छेड़छाड़, सिपाही लाई थाने तो जबरन छुड़ा ले गए विधायक, मचा हंगामा तो फिर हुआ गिरफ्तार

लखीमपुर खीरी- महिला सिपाही के साथ छेड़खानी करने वाले अभियुक्त को भाजपा विधायक द्वारा थाने से जबरन छुड़ाकर ले जाने का मामला तूल पकड़ गया है। यह मामला सुर्खियों में आने के बाद पुलिस ने रविवार को उसी कार्यकर्ता समेत 70 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है और इस मामले में 5 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है।

घटनाक्रम के अनुसार शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी का कार्यकर्ता सुरेंद्र प्रताप उर्फ शिबू सिंह रामलीला चौराहे पर महिला सिपाहियों के साथ ही छेड़खानी करने लगा,जिस पर महिला सिपाही उसे पकड़कर थाने ले आई थी, शिबू को थाने लाने की जानकारी जैसे ही भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं को मिली, तो वह सभी इकट्ठा होकर भाजपा विधायक लोकेंद्र प्रताप सिंह , नगर अध्यक्ष सौरभ गुप्ता और अन्य पदाधिकारियों के नेतृत्व में कोतवाली पहुंचे और आरोपी को जबरन छुड़ाकर ले गए। यह मामला मीडिया में आने के बाद सुर्खियों में आया, जिसके बाद पुलिस ने उस कार्यकर्ता समेत 70 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है और इस मामले में 5 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है

लखीमपुर खीरी का यह मामला इतना तूल पकड़ा कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी ने ट्वीट करके योगी सरकार पर सवाल उठाए है, उन्होंने लिखा कि सीएम बताएं कि किस मिशन के तहत यह हो रहा है बेटी बचाओ या अपराधी बचाओ। राहुल गांधी ने कहा कि बीजेपी की शुरुआत बेटी बचाओ से हुई थी लेकिन अपराधियों को बचा रहे हैं ,

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी महिला सिपाही के साथ हुई इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि जब महिला सिपाही के साथ इस तरह का दुर्व्यवहार हो रहा है और उन लोगों को भाजपा के विधायक और नगर अध्यक्ष छुड़वा रहे हैं तो ऐसे में प्रदेश में कैसी कानून व्यवस्था है इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।

आप पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी इस मामले को मुद्दा बनाते हुए सवाल उठाया और पूछा कि जब प्रदेश में महिला कांस्टेबल तक सुरक्षित नहीं है तो यह कैसा मिशन शक्ति है। संजय सिंह ने कहा कि लखीमपुर खीरी में महिला कांस्टेबल के साथ भाजपा का नेता छेड़खानी करता है कांस्टेबल उस आरोपी को लेकर थाने आती है तब भाजपा का एक विधायक दल बल के साथ थाने पहुंचकर हंगामा करता है और कार्यकर्ता को जबरन छुड़ाकर ले जाता है। योगी सरकार के मिशन शक्ति का सबसे ज्वलंत उदाहरण है। योगी आदित्यनाथ जिस महिला पुलिस के दम पर मिशन शक्ति चलाने का दावा कर रहे हैं जब वह महिला पुलिस ही सुरक्षित नहीं है तो योगी जी कौन से मिशन और कौन सी शक्ति की बात कर रहे हैं ?

आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर ने भी इस मामले को ट्विटर पर मुद्दा बनाया। अमिताभ ने लिखा कि थाना मोहम्मदी की घटना में तत्काल भाजपा विधायक और उनके साथियों के साथ एफआईआर की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि थाने में इस तरह की घटना पूर्णतया अस्वीकार्य है उसके बहुत गलत संदेश जाते हैं।

इस बीच मामले के तूल पकड़ने पर मोहम्मदी पुलिस ने आनन-फानन में एसआई अरुण कुमार सिंह की तहरीर पर सुरेंद्र प्रताप सिंह उर्फ शिबू सिंह को नामजद करते हुए 70 अन्य लोगों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर लिया है।मोहम्मदी कोतवाली में दारोगा अरुण कुमार सिंह ने तहरीर में लिखाया है कि 16 अक्टूबर की रात वह कोतवाली में डयूटी पर थे। तभी रामलीला चौराहे से खबर आई कि शिब्बू नामक युवक पुलिस कर्मियों से अभद्रता कर रहा है। पुलिस टीम युवक को कोतवाली ले आई। कुछ देर बाद माफी मांगने पर उसे भाजपा नगर अध्यक्ष सौरभ गुप्ता की सुपुर्दगी में दे दिया गया। दारोगा का कहना है कि करीब आधे घंटे बाद शिब्बू सिंह 60-70 अज्ञात लोगों के साथ कोतवाली आकर हंगामा करने लगा। बाद में हल्का बल प्रयोग कर सभी को परिसर से बाहर किया गया। इस दौरान 144 व महामारी एक्ट का उल्लंघन हुआ।

प्रभारी निरीक्षक बृजेश त्रिपाठी ने बताया कि धारा 188, 269,270,504 आबकारी अधिनियम की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और इस मामले में सुरेंद्र प्रताप सिंह उर्फ शिब्बू समेत उसके चार अन्य साथियों मोहित श्रीवास्तव, रामजीत सिंह, रोहित सिंह और अमर सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है और बाकी की सरगर्मी से तलाश की जा रही है।

इसी बीच विधायक लोकेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि उनके संज्ञान में नहीं था कि कार्यकर्ता ने एक महिला सिपाही से अभद्रता की है, जिसके लिए मैं बहुत शर्मसार हूं। उन्होंने कहा कि शिबू 35 साल से भाजपा के लिए काम करने वाला कार्यकर्ता है, लेकिन किसी भी कार्यकर्ता को गलत काम करने की छूट नहीं दी जा सकती है परंतु अगर किसी कार्यकर्ता को कहीं भी आवश्यकता होती है तो मौके पर उनका जाना भी उनके लिए जरूरी है।

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