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बजट: सुस्ती के बीच सरकार से राहत की उम्मीद .... आर्थिक मंदी के बीच सरकार को रोजगार सृजन के लिये कदम उठाने होंगे

बजट: सुस्ती के बीच सरकार से राहत की उम्मीद .... आर्थिक मंदी के बीच सरकार को रोजगार सृजन के लिये कदम उठाने होंगे

नई दिल्ली। वैश्विक और घरेलू कारकों के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार कुछ वक्त से धीमी पड़ी हुई है, जिसके कारण प्रमुख उद्योगपतियों ने रोजगार सृजन के लिए कदम उठाने, इन्फ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ाने एवं कृषि क्षेत्र के अनुकूल नीतियों के निर्माण की अपील की है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को वित्त वर्ष 22-21 का आम बजट पेश करेंगी। अर्थव्यवस्था को लेकर भारत की चिंताओं के बीच वैश्विक आर्थिक स्थिति भी बेहतर नहीं है। अमेरिका और चीन के बीच व्यापार तनाव का असर पूरी दुनिया पर देखा जा रहा है। दुनिया की उभरती हुई अर्थव्यवस्थाएँ अधिक संकट में दिख रही हैं। वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर करीब तीन फीसदी पर है। यह पिछले साल की तुलना में आधा फीसदी कम है। वैश्विक व्यापार भी बुरी तरह प्रभावित है। दुनिया की सबसे तेज गति से आगे बढ़ती भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी पड़ती दिख रही है। चालू वित्त वर्ष की सितंबर 219 में समाप्त दूसरी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर घटकर 4.5 फीसद रह गई। यह मार्च 213 के बाद सबसे निचला स्तर है। देश में ऑटो मोबाइल से लेकर टिकाऊ उपभोक्ता उत्पादों और रोजमर्रा की उपभोक्ता वस्तुओं तक की माँग में भी गिरावट दर्ज की जा रही है।

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