Top

सरकार की शिक्षा ऋण को माफ करने की कोई योजना नहीं

सरकार की शिक्षा ऋण को माफ करने की कोई योजना नहीं


नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सोमवार को संसद में स्पष्ट किया कि देश और विदेशों में शिक्षा प्राप्त के लिए जाने वाले युवाओं को दिए जाने वाले शैक्षणिक ऋणों को माफ करने की कोई योजना नहीं है।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारतीय बैंक संघ (आईबीए) द्वारा शुरु की गई मॉडल शैक्षिक ऋण योजना के तहत भारतीय नागरिकों को देश और विदेशों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने में सहयोग के लिए शिक्षा ऋण उपलब्ध कराया जाता है। उन्होंने बताया कि इसका उद्देश्य युवाओं को अर्हता, पेशेवर दक्षता प्रदान करना और उद्यिता के माध्यम से लाभप्रद रोजगार प्राप्त करने के लिए कौशल दक्षता विकसित करने या स्व-रोजगार के अवसर तलाशने में उन्हें सक्षम बनाना है।

उन्होंने बताया कि देश में शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों को ऋण की अधिकतम सीमा 10 लाख रुपये और विदेशों में पढ़ाई के लिए जाने वाले छात्रों को अधिकतम 20 लाख रुपये ऋण देने का प्रावधान है। यह सावधिक ऋण होता है और छात्रों को यह 15 वर्ष की अवधि में लौटाना होता है। उन्होंने बताया कि यदि छात्र स्टार्ट अप उद्यम स्थापित करना चाहता है तो कौशल विकास (इंक्यूबेशन) अवधि के लिए भी अधिस्थगन की सुविधा है और कैरियर की शुरुआत में कम वेतन वालों के लिए बढ़ती किस्त के साथ पुनर्भुगतान की सुविधा दी गई है।

सीतारमण ने 'सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) द्वारा मुहैया आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि वर्ष 2016-17 से मार्च 2019 तक विगत तीन वर्षों के दौरान बकाया शिक्षा ऋण की राशि सितम्बर 2019 में 67,685.59 करोड़ रुपए से बढ़कर 75,450.68 करोड़ रुपए हो गई है।

साथ ही उन्होंने बताया कि शिक्षा ऋणों के पुनर्भुगतान के लिए बैंकों से असहनीय दबाव के कारण छात्रों द्वारा आत्महत्या के किसी मामले की सूचना नहीं है। बैंकों को शिक्षा ऋण की वसूली के लिए गैर-उत्पीड़क नीति अपनाने के लिए कहा गया है।


Share it
Top