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तीसरे साल भी नहीं बढ़ा गन्ना मूल्य...गन्ना मूल्य न बढने से किसान बर्बादी की कगार पर: योगराज सिंह

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आज गन्ने का भाव घोषित कर दिया गया है और लगातार तीसरे साल भी गन्ना मूल्य नहीं बढा है, जिससे किसानों में आक्रोश बन गया है। राज्यपाल ने प्रदेश की समस्त चीनी मिलों द्वारा क्रय किये जाने वाले गन्ने का 'राज्य परामर्शित मूल्य' निर्धारित किये जाने की सहर्ष स्वीकृति प्रदान करते हुए अगैती प्रजातियों के लिए रु.325 प्रति कुन्टल, सामान्य प्रजातियों के लिए रु.315 प्रति कुन्टल व अनुपयुक्त प्रजातियों के लिए रु.310 प्रति कुन्टल तय किया है। पैराई सत्र 2019-20 हेतु उपरोक्तानुसार निर्धारित गन्ने का 'राज्य परामर्शित मूल्य (एस.ए.पी.) का भुगतान चीनी मिलों के द्वारा कृषकों को एकमुश्त किया जायेगा। पैराई सत्र 2019-20 के लिए चीनी मिलों के वाह्य क्रय केन्द्रों से गन्ने का परिवहन मिल गेट तक कराने, ढुलाई कटौती की दर 42 पैसे प्रति कुन्टल प्रति कि.मी., अधिकतम रू.8.35 प्रति कुन्टल वाह्य क्रय केन्द्रों पर आपूर्ति किये गये गन्ना का मूल्य तद्नुसार चीनी मिलों द्वारा देय होगा। प्रमुख सचिव चीनी उद्योग संजय आर भूसरेड्डी द्वारा जारी किये गये पत्र के अनुसार राज्यपाल की ओर से एसएपी घोषित किया गया है। एसएपी घोषित होने पर पूर्व मंत्री चौधरी योगराज ने अपनी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए कहा कि लगातार तीसरे साल भी गन्ना मूल्य में कोई बढोत्तरी नहीं हुई है, जिससे प्रदेश का किसान बर्बादी की ओर बढ रहा है। उन्होंने कहा कि गन्ने का भाव काफी देर से घोषित किया गया है और उसमें भी कोई बढोत्तरी नहीं की गई है। एक साल में किसान के बिजली, खाद, बीज, डीजल, मजदूरी की लागत काफी ज्यादा बढ गयी है, लेकिन गन्ना मूल्य न बढने से किसान बर्बादी की ओर जा रहा है और उसकी लागत बढती जा रही है।

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