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पार्टियों द्वारा चंदा लेने की इलेक्टोरल बांड योजना पर सदन में स्पष्टीकरण दे सरकार : कांग्रेस

पार्टियों द्वारा चंदा लेने की इलेक्टोरल बांड योजना पर सदन में स्पष्टीकरण दे सरकार : कांग्रेस


नई दिल्ली। कांग्रेस ने बुधवार को पार्टियों द्वारा चंदा लेने की इलेक्टोरल बांड योजना की नियमावली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हस्ताक्षेप करने के मुद्दे को उठाते हुए पूरी योजना पर सरकार से ससंद में जवाब देने की मांग की है।

कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद, आनंद शर्मा, अधीर रंजन चौधरी और रणदीप सुरजेवाला ने संयुक्त तौर पर संसद भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता में कहा कि यह पहली बार है कि प्रधानमंत्री ने ऐसे किसी मामले में हस्ताक्षेप किया है। उन्होंने कहा कि अगर प्रधानमंत्री ही व्यावसायिक घरानों से अपारदर्शी (पारदर्शिता रहित) चुनावी फंडिंग कराने लगेंगे तो संविधान और कानून की रक्षा कौन करेगा।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि भाजपा सरकार चंद व्यापारियों के साथ देश का व्यापार चला रही है। दोनों एक दूसरे की मदद कर रहे हैं। सूचना के अधिकार कानून (आरटीआई) से यह बात साबित हुई। प्रधानमंत्री ऑफिस के कहने पर इलेक्टोरल बांड के नियम तोड़े गए हैं। इलेक्टोरल बांड एक बड़ी साजिश है, जिससे भ्रष्टाचार पैदा हो रहा है। उन्होंने कहा कि इलेक्टोरल बांड से राजनीतिक पार्टियों को चंदा देने वाले की पहचान छिपाई जाती है। स्वयं पार्टी को भी जानकारी नहीं देनी पड़ती कि कौन उन्हें चंदा दे रहा है। इसके माध्यम से कितना भी धन जुटाया जा सकता है। इस योजना पर आरबीआई ने आपत्ति जताई है। आरबीआई का कहना है कि इससे धन शोधन बढ़ेगा। वहीं चुनाव आयोग ने कहा है कि इससे शेल कम्पनियां बढ़ेंगी और कालाधन इकट्ठा होगा। इस मामले पर सरकार को दोनों सदनों में जवाब देना चाहिए।

कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने कहा कि इलेक्टोरल बांड योजना में किस पार्टी को किसने चंदा दिया, इसकी जानकारी केवल सरकार के पास होगी। भाजपा को सरकार में होने के चलते इसका लाभ मिल रहा है। वहीं दूसरी पार्टियों को चुनावी चंदा लेने में दिक्कतें आ रही हैं। इलेक्टोरल बांड से प्राप्त ज्यादातर धन 90 से 95 प्रतिशत भाजपा को गया है। हमारी मांग है कि दोनों सदनों में इसके बारे में विस्तृत जानकारी दी जानी चाहिए।


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