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मुसलमान भारत के नागरिक हैं और रहेंगे..गृहमंत्री ने कहा-गलत सूचना फैलाने वाले बताएं.. यह बिल भारतीय मुसलमानों के खिलाफ कैसे ?

मुसलमान भारत के नागरिक हैं और रहेंगे..गृहमंत्री ने कहा-गलत सूचना फैलाने वाले बताएं.. यह बिल भारतीय मुसलमानों के खिलाफ कैसे ?



- नागरिकता संशोधन विधेयक-2019 पर राज्यसभा में चर्चा शुरू


नई दिल्ली। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बुधवार को राज्यसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 पेश करने के बाद चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि भारत के मुसलमान भारतीय नागरिक थे। वह अब भी नागरिक हैं और आगे भी भारत के नागरिक रहेंगे। उन्होंने सदन में कहा कि इस बिल के बारे में गलत सूचना फैलाई गई कि यह विधेयक भारतीय मुसलमानों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि लोग बताएं कि यह विधेयक भारतीय मुसलमानों के खिलाफ कैसे है? वह भारतीय नागरिक हैं और हमेशा रहेंगे। उनके साथ कोई भेदभाव नहीं होगा।

लोकसभा में यह विधेयक सोमवार को पास हो गया था। आज राज्य सभा में पेश करने के बाद गृहमंत्री शाह ने कहा कि 1985 में असम समझौता हुआ। राज्य की स्वदेशी संस्कृति की रक्षा के लिए खंड 6 में प्रावधान है। उन्होंने कहा- 'मैं आश्वस्त करना चाहता हूं कि खंड 6 की निगरानी के लिए समिति के माध्यम से एनडीए सरकार असम के अधिकारों की रक्षा करेगी। ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन कमेटी का हिस्सा है। यह विधेयक मिजोरम में लागू नहीं होगा। भारत दुनिया भर के मुस्लिम प्रवासियों को नागरिकता नहीं दे सकता। उत्पीड़न का सामना करने वाले तीन देशों के अल्पसंख्यकों के उद्देश्य से यह विधेयक लाया गया है। भारत के किसी भी मुस्लिम को इस विधेयक के कारण चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। अल्पसंख्यकों को पूरी सुरक्षा मिलेगी।' गृहमंत्री ने वोट बैंक की राजनीति के आरोप को खारिज करते हए कहा- 'पाकिस्तान और वर्तमान बांग्लादेश दोनों में धार्मिक अल्पसंख्यकों की आबादी में लगभग 20 प्रतिशत की गिरावट आई है। धार्मिक अल्पसंख्यक या तो मारे गए या वह शरण लेने के लिए भागकर भारत आ गए।

उधर, विपक्ष इस विधेयक का लगातार विरोध करके इसे संविधान विरोधी बता रहा है। इस विधेयक के खिलाफ असम समेत पूर्वोत्तर के कई राज्यों में प्रदर्शन हो रहा है। विपक्ष ने इस विधेयक को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने का प्रस्ताव दिया है। सदन में इस विधेयक पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह विधेयक संविधान निर्माताओं पर सवाल उठाता है, क्या उन्हें इसके बारे में समझ नहीं थी। भारत के संविधान में किसी के साथ भेदभाव नहीं हुआ, बंटवारे के बाद जो लोग यहां आए उन्हें सम्मान मिला है। पाकिस्तान से आए दो नेता प्रधानमंत्री भी बने हैं। टू नेशन थ्योरी कांग्रेस ने नहीं दी थी, वो सावरकर ने हिंदू महासभा की बैठक में दी थी। गृहमंत्री ने बंटवारे का आरोप उन कांग्रेस नेताओं पर लगाया जिन्होंने जेल में वक्त गुजारा, ये राजनीति बंद होनी चाहिए। पहले और अब के विधेयक में काफी अंतर है, सबसे बात करने का जो दावा किया जा रहा है उससे मैं सहमत नहीं हूं। इतिहास इसको कैसे देखेगा, उसे वक्त बताएगा।

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