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Read latest updates about "वे कहते हैं" - Page 1

  • मुद्दा: बंगाल में प्रदर्शनकारियों का तांडव

    पश्चिम बंगाल में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शनकारियों का तांडव बरकरार है। हर दिन कहीं न कहीं से हिंसक प्रदर्शनं की खबरें आ रहीं हैं। बंगाल के कई हिस्सों में इंटरनेट सेवाएं भी बंद की गईं।बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले दिनों नदिया, उत्तर 24 परगना और हावड़ा जिलों से हिंसा की घटनाएं...

  • मुद्दा: बदलते राज और तंत्र में जन

    किसी भी राष्ट्र के लिए उसका जन सर्वोपरि है। जन के साथ-साथ उससे जुड़ी सभी संपदा राष्ट्र के लिए महत्त्वपूर्ण है, उसमें नदी, सरोवर, वन, पेड़-पौधे, पक्षी, वन के जीव आदि सभी शामिल हैं। इन सभी की रक्षा और इनके जीवन के बारे में सोचना राष्ट्र की जिम्मेदारी है खासकर जब, जब आप लोकतांत्रिक प्रणाली में जी रहे...

  • मुद्दा: जेएनयू मूवमेंट के पीछे की सियासत

    विवादों से जेएनयू का पुराना नाता रहा है। हिन्दुस्तान की यही एक मात्र ऐसी यूनिवर्सिटी है जिसके परिसर में हमेशा कुछ न कुछ होता रहता है। विगत पंद्रह-बीस दिनों से भी वहां हंगामा कटा हुआ था। इस बार विवाद फीस बढ़ोत्तरी को लेकर खड़ा हुआ था। फिलहाल विरोध का पटाक्षेप हो चुका है। सरकार ने जेएनयू के लिए जो नए...

  • मुद्दा: एक गंभीर संकट बनता प्रदूषण

    पर्यावरण में दूषक पदार्थों के प्रवेश के कारण प्राकृतिक संतुलन को पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त कर देने का नाम ही प्रदूषण है। इससे पर्यावरण के साथ-साथ सभी प्रकार के जीवों को भारी हानि पहुँच रही है। हवा,पानी, मिट्टी आदि सभी दूषित हो रहा है। इसका मुख्य कारण है कि प्रकृति द्वारा निर्मित वस्तुओं एवं...

  • व्यंग्य: हे! राजनीति, अहम त्वमेव शरणम गच्छामि

    हे! राजनीति तुझे शत-शत् नमन। तेरी कोई भाषा और परिभाषा भी है, यह मैं आज तक नहीं पढ़ पाया हूं। तेरे व्यक्तित्व की लावण्यता कितनी खूब सूरत है कि हर कोई तुझमें समाहित होना चाहता है। वह सदाचारी हो या दुराचारी, कर्तव्य पथ के प्रगतिवाद का समर्थक हो या चरित्रहीनता के पनामा नहर में डुबकी लगाने वाला, तू ऐसी...

  • मुद्दा: संकट में रैनबैक्सी बंधु

    एक समय था जब रैनबैक्सी इस देश की सबसे बड़ी दवाई कंपनियों में हुआ करती थी। इस कंपनी का नाम ड्रग डिस्ट्रीब्यूशन फर्म के रूप में 1937 में दो कजन भाइयों रंजीत सिंह और गुरबख्श सिंह (जिन्हें मिलाकर रैनबैक्सी बनता है) भाइयों ने प्रारंभ किया था और भाई मोहन सिंह का उधार न चुका पाने के कारण यह कंपनी भाई मोहन...

  • दिशाहीन हो कर भटकता युवा वर्ग

    आज देश में युवा वर्ग असभ्यता एवं अशिष्टता का पर्याय बन गया है। युवा वर्ग की असभ्यता से राष्ट्र ही परेशान नहीं अपितु उसका अपना परिवार एवं वह स्वयं भी परेशान रहता है। देश का नवयुवक अजीबोगरीब तरह के कपड़े पहने, मोटरसाइकिल पर सवार कान से मोबाइल लगाये सड़कों पर बिना उद्देश्य मंडराते हुए आमतौर से देखा जा...

  • भविष्यवाणी: किसी बड़े राष्ट्र अध्यक्ष की हत्या के बन रहे हैं आसार!

    शनि ग्रह ज्योतिष में अधिकार, अनुशासन, कड़ी मेहनत, श्रम और प्रतिबद्धता का प्रतिनिधित्व करता है। यह अपराधबोध, प्रतिरोध और देरी का भी कारक ग्रह है। जन्म पत्री में शनि जिस भाव में स्थित होता है, उस भाव के कारकतत्वों की प्राप्ति सहज नहीं होती है। इसके विपरीत जिन भावों को शनि देखता है उन भावों के फल...

  • चीन से प्रवासी पक्षी छत्तीसगढ़ में

    दुलर्भ प्रजाति के प्रवासी पक्षी ग्रे हैडिड लेप्विंग सेंट्रल एशियन फ्लाईवे में हर साल इसी मार्ग से गुजर कर जाती है दक्षिण भारत। इस बार वह कुछ दिन गुजारने रूकी छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के गाँव बेलौदी में। लंबे सफर में विश्राम करने और पोषण करने माइग्रेट पैसेज के रूप में कुछ दिन बीच में रूकती है, फिर...

  • मुद्दा: भावनाओं से नहीं, विवेक से निर्णय की जरूरत

    समय, काल व परिस्थिति ने हमारे जीवन में अनेक सहज परिवर्तन किये हैं, विवाह भी उन्हीं में से एक है। आज पुरानी मान्यताओं में परिवर्तन को काफी हद तक स्वीकार कर लिया गया है लेकिन यौन शुचिता को लेकर हमारे समाज के दृष्टिकोण में कोई विशेष बदलाव नहीं आया है। स्पष्ट है कि नैतिक मूल्यों से समझौता करने की...

  • मॉब लिंचिंग: दोहरे आचरण भी अस्वीकार्य

    माब लिंचिंग एक नया लेकिन बहुचर्चित शब्द है। हालांकि माब लिंचिंग अर्थात् भीड़ द्वारा कानून को अपने हाथ में लेते हुए हत्या करना कोई नया व्यवहार नहीं है। केवल भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में माब लिंचिंग का प्रचलन रहा है। अमेरिका, जर्मनी, रूस सहित अधिकांश देश इसके साक्षी रह चुके हैं। पचास या अधिक आयु के...

  • विश्लेषण: जड़ों की खोज में युवा पाकिस्तानी

    लहू को लहू पुकार रहा है। हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान ने गौरी, गजनी, खिलजी, बाबर, औरंगजेब जैसे बर्बर नायक अपनी नस्लों को खूब घोंट-घोंट कर पिलाए परंतु वहां की युवा पीढ़ी अपनी जड़ों से जुडऩे को बेताब दिख रही है। अभी-अभी लाहौर में महान शासक महाराजा रणजीत सिंह की प्रतिमा लगाने और उन्हें 'शेर-ए-पंजाब' की...

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