Top

वक्ष की देखभाल कैसे करें

वक्ष की देखभाल कैसे करें

नारी सौंदर्य वास्तविक देन उसके पुष्ट सुडौल और उन्नत उरोज हैं। ये अच्छे स्वास्थ्य के प्रतीक हैं। चेहरे के सौंदर्य के बाद इसकी कमी नारी सौंदर्य की सबसे बड़ी कमी मानी जाती है। इसकी कमी से नवयौवनाओं में हीनता उपज आती है।
इसकी कमी के कारण हैं पौष्टिक व संतुलित आहार की कमी, बाल्यावस्था में खेलकूद की असुविधाएं व व्यायामादि न करना, अल्पावस्था में प्रणय सूत्र में बंध जाना, पर्दाप्रथा, हंसने बोलने में बाधाएं व घर में घुटन का वातावरण, तंग ब्रेजरी का प्रयोग, छोटी अवस्था में ही माता बन जाना, अनुचित रीति से स्तनपान कराना, सामान्य दैहिक निर्बलता, अनीमिया और वंश प्रभाव। इन सबके कारण उरोज या वक्ष अविकसित रह जाते हैं। वक्ष सौंदर्य में कमी को दूर करने के लिए निम्नलिखित उपाय करने चाहिए:-
- वक्ष सौंदर्य की वृद्धि के लिए नृत्य व रस्सी कूदना अच्छे व्यायाम हैं।
- घर का कामकाज नियमित रूप से करते रहना भी लाभकारी है।
- प्रात:काल उठकर शौचादि से निवृत्त होकर खुले वातावरण में पांच मिनट गहरे सांस लीजिए।
- प्रोटीन युक्त संतुलित आहार का सेवन कीजिए जिसमें खनिज लवण व विटामिन उचित मात्रा में हो।
- दिन में ब्राजरी का समुचित प्रयोग कीजिए। शयनकक्ष में विश्राम करते समय इसका उपयोग नहीं करना चाहिए। इससे उरोजों को आवश्यकतानुसार ऑक्सीजन मिल सकेगी।
- सदा प्रसन्न रहना चाहिए।
- तनावयुक्त वातावरण से हमेशा दूर रहिए।
- स्नानादि से पहले जैतून के तेल की मालिश गोलाई में हाथ चलाते हुए उरोजों पर कीजिए। तत्पश्चात एक-एक भुजा को सीधा तानकर गोलाई में घुमाइए। यह प्रक्रिया कम से कम दस बार कीजिए। फिर फव्वारे से नीचे बैठकर अथवा बाल्टी में पानी भरकर खुलकर स्नान कीजिए। इससे उरोज विकसित होंगे और रक्त संचार में तीव्रता आ जाएगी।
- प्रात: काल की शुद्ध हवा में सीधी खड़ी होइये। फिर अपने दोनों हाथ ग्रीवा के पीछे बांधकर उंगलियां आपस में फंसा लीजिए। इसके बाद कुहनियों को आगे-पीछे धीरे से आरंभ करके तेजी ले आइये। यह व्यायाम नित्य पांच मिनट तक करना चाहिए। इससे वक्ष विकसित हो जाते हैं।
-स्तनपान कराने वाली महिलाओं को चाहिए कि वे बच्चे को कभी भी लेट कर स्तनपान न कराएं। इससे स्तन खिंचकर ढलक जाते हैं। अत: हमेशा बैठकर स्तन को हाथ का सहारा देकर ही बच्चे को स्तनपान करना चाहिए।
- भारी व बेडौल उरोजों को ठीक करने के लिए प्लास्टिक सर्जरी का सहारा भी लिया जा सकता है। इस उपचार के लिए जनरल एनस्थीसिया देकर बड़ा ऑपरेशन किया जाता है। इसमें भारी व बेड़ौल उरोजों को छीलकर अनावश्यक मांस निकाल दिया जाता है। अविकसित उरोजों को विकसित करने के लिए उस महिला की रान से मांस लेकर अथवा सिलिकान इंटलांट लैग भरकर उन्हें आकार व उभार दे दिया जाता है।
- मनोज वर्मा

Share it
Top