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रक्षाबंधन - कोरोना और बहनें

रक्षाबंधन - कोरोना और बहनें

हर साल अगस्त के महीने में भाई-बहनों का सबसे पवित्र त्यौहार आता है, जिसका नाम है रक्षाबन्धन. इस साल कोरोना के चलते सभी त्योहारों के मानो जैसे रंग ही उड़ गये हैं. लोग अपने- अपने घरों में कैद हैं. लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि हम घर से चीजों का आनंद नहीं ले सकते. समय आज खराब है, कल अच्छा भी होगा. कोरोना आया है तो जायेगा भी, लेकिन इसके चलते हमें अपने त्योहारों को नहीं भूलना चाहिए.

कविता हर साल जुलाई में ही अपने लिए नए कपड़े बनवा लेती है और भाई को गिफ्ट की एक लम्बी लिस्ट दे देती है. लेकिन इस साल कोरोना ने उसकी सारी खुशियों पर जैसे पानी फेर दिया है. उसे लगता है कि इस साल वो बाहर घूमने भी नहीं जा सकती तो इसलिए वे क्या ही तैयार होगी.

वहीँ अंजलि इसके उलट घर में ही अपने लिए सारी तैयारियां कर रही है. अंजलि ने खुद अपने और अपने भाई के लिए कपड़े बनाये हैं. अंजलि का मानना है कि खुशियाँ तो खुशियाँ होती हैं. मैं पूरा साल भाई से झगड़ती हूँ लेकिन यह एक दिन हम दोनों के लिए ख़ास है. हाँ मुझे बाहर ना जा पाने का दुःख है. मगर कोरोना के दौर में हम खुद से खुश होने के तरीके निकाल सकते हैं. इसलिए मैंने हम दोनों के लिए कपड़े खुद बनाये हैं और मैं इन्हें पहन कर ही राखी को एन्जॉय करूंगी.

पेशे से वकील सिमरन का भी यही मानना है कि मैं पूरा साल तो काले कोट और सफ़ेद साड़ी में बिता देती हूँ. साल के यह दो त्यौहार रक्षाबन्धन और दिवाली ही ऐसे हैं जिनमें मुझे रंगों का एहसास होता है. हाँ महामारी ने सबको उदास जरुर किया है लेकिन हमें हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए. मेरा भाई बाहर रहता है. मुझे भी लगा था कि इस साल मुझे भी काले सफ़ेद रंग में रहना पड़ेगा क्योंकि हर साल मैं उसी के साथ बाज़ार जाती थी, और कोई नया रंग खरीदती थी और इस बार वो यहाँ नहीं आ सकता.लेकिन उसने मेरे मन की बात राखी और मुझे त्यौहार के नए कपड़े ऑनलाइन ही भेज दिए. मैं उन्हें जरुर पहनूंगी. हमें कभी भी नेगेटिव नहीं बनना चाहिए. मैंने और मेरे भाई ने इस बार ऑनलाइन राखी सेलिब्रेट करने का प्लान बनाया है.

समय कैसा भी हो रक्षाबन्धन एक ऐसा त्यौहार है जो भाई बहन के रिश्ते की पवित्र डोर को और मजबूती देता है. इसलिए समय कैसा भी हो हमें हर विकट समय का सामना हंसते हुए करना चाहिए.



-फाल्गुनी शर्मा

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