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पति-पत्नी के दांपत्य जीवन में क्यों आते हैं ...'वो'...?

पति-पत्नी के दांपत्य जीवन में क्यों आते हैं ...

पति-पत्नी का संबंध बहुत ही नाजुक होता है। एक सुखी गृहस्थ जीवन के लिए यह अत्यंत ही आवश्यक है कि पति-पत्नी

एक-दूसरे पर विश्वास करें और एक-दूसरे के प्रति ईमानदार हों। बहुत से परिवारों में पति-पत्नी के बीच कलह का एक

कारण 'पति-पत्नी और वो' का मसला भी होता है। कहीं-कहीं यह स्थिति ऐसी भी हो जाती है कि पति-पत्नी में तलाक तक

की नौबत आ जाती है।

सबसे पहले इस कारण को जानना आवश्यक है कि पति-पत्नी के बीच में 'वो' का आगमन क्यों होता है। अनेक

मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि पति-पत्नी के बीच में मधुर संबंध न होना, सेक्स संबंधों की अपूर्णता तथा सद्भावना की

कमी के कारण से ही पति या पत्नी के बीच में 'वो' का आगमन होता है।

अधिकांश पत्नियां विवाह हो जाने के बाद सोच लेती हैं कि अब तो पति अपना है। अब वह जायेगा कहां? और वह उनकी

तरफ से बिल्कुल उदासीन हो जाती हैं। पति की पसन्द-नापसन्द का जरा भी ख्याल नहीं रखती। पति के घर आते ही वे

अपनी शिकायतों का पोथा लेकर बैठ जाती हैं और छोटी-छोटी बातों को मुद्दा बना लेती हैं। जरा-जरा सी बात पर रूठ

जाना आदि घर में कलह का कारण बन जाते हैं और पति ऊबकर घर का सुख बाहर ढूंढने लगते हैं।

कई बार पत्नियां पति के धोखेबाज होने पर या पति द्वारा आवश्यक समय न देने पर स्वयं भी अन्य रास्ता ढूंढ़ने लगती

हैं। ऐसे समय में पत्नी के सामने जो भी सहानुभूति के दो शब्द बोल देते हैं, पत्नी उन्हें ही अपना सब कुछ मानने लगती

है और बेवफा पति से बदला लेने की भावना से प्रेरित होकर वह अपना सब कुछ सौंप डालती है।

बात-बात पर पति का पत्नी पर शक करना या पत्नी का पति पर शक करना उचित नहीं होता। अगर किसी प्रकार का कोई

मतान्तर होता है तो उसे आपस में बैठकर सुलझा लेना पति-पत्नी दोनों के ही हक में अच्छा होता है। छोटी-छोटी बातों पर

एक-दूसरे के प्रति शंका उत्पन्न करना तथा मतान्तर को बढ़ाते रहना 'वो' के प्रवेश का मार्ग प्रशस्त करता है।

एक पति अपनी पत्नी से भरपूर प्रेम एवं सहयोग की इच्छा रखता है। वह दिन भर की थकान एवं तनाव को अपनी पत्नी

के साथ मिलकर दूर करना चाहता है। पति की हार्दिक इच्छा रहती है कि पत्नी खाने के टेबल से लेकर बिस्तर तक

सहयोग करती रहे। अगर उसकी इस भावना की पूर्ति नहीं होती, तो वह पत्नी से दूर होने लगता है तथा किसी अन्य को

अंकशायिनी बना लेता है।

यूं तो पत्नी भी दिनभर घरेलू कामों के झंझटों में व्यस्त रहती है और रात होते-होते वह बहुत अधिक थक चुकी होती है।

बिस्तर पर आते ही वह आंख मूंदकर लेट जाती है। पति द्वारा किये जाने वाले किसी काम को वह रोकती नहीं किन्तु

स्वयं कुछ नहीं कर पाती है इसे पति अपनी उपेक्षा समझने लगता है और पति-पत्नी में दूरियां बढ़ने लगती हैं।

कभी-कभी पत्नी भी पति से बहुत कुछ पाने की इच्छा रखती है। वह जब सभी घरेलू कामों को पूरा करके बिस्तर पर आती

है तो उसका पति सो चुका होता है। वह भी मायूस होकर सो जाती है। इस तरह की उपेक्षा जब उसे बार-बार झेलनी पड़ती

है, तो वह भी अपनी शारीरिक सन्तुष्टि का नया रास्ता निकाल लेती है और 'वो' का आगमन सहज ही हो जाता है।

एक खुशहाल परिवार के लिए पति-पत्नी में परस्पर विश्वास, प्रेम एवं सहयोग का होना बहुत ही आवश्यक है। विश्वास,

प्रेम, समर्पण एवं सामंजस्यता के बिना कोई भी परिवार खुशहाल नहीं हो सकता। परिवार की खुशहाली के लिए पति-पत्नी

दोनों का ही सहयोग व समझदारी बहुत ही आवश्यक है।

जब दोनों एक-दूसरे की भावनाओं को समझेंगे, तभी परिवार बना रहेगा। तनिक शारीरिक संतुष्टि, मतान्तर या अन्य किसी

कारण से पति-पत्नी के बीच अगर किसी 'वो' (तीसरे व्यक्ति) का आगमन होता है, तो इसका परिणाम अंततः विघटनकारी

ही होता है। अपने सुखमय भविष्य के लिए 'वो' को जीवन में न आने दें। (उर्वशी)

पूनम दिनकर

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