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बुनाई के लिए विशेष टिप्स

बुनाई के लिए विशेष टिप्स

बाजार में रेडीमेड स्वेटरों की भरमार है और वे खूब पसंद भी किये जाते हैं मगर सर्दियों का मौसम आते ही फिर भी महिलाओं के बीच स्वेटर बुनने की होड़ देखी जा सकती है। हर स्टैंडर्ड की महिला स्वेटर बुनने की शौकीन होती है मगर स्वेटर बुनने से पूर्व कुछ बातों पर जरूर गौर फरमा लें। बिना सोचे-समझे शुरू की गई बुनाई से बाद में परेशानियां आती हैं।

बुनाई शुरू करने से पहले ये टिप्स जरूर ध्यान में रखें:-

पहले अपने दिमाग में वह डिजाइन बैठा लें जिसका आपको स्वेटर बुनना है। उसी डिजाइन के हिसाब से ऊन खरीदें। हर रंग पर हर कोई डिजाइन अच्छा नहीं लगता, इसलिए यह पहले ही तय कर लें कि किस रंग का डिजाइन बनाना है। बच्चों और बड़ों पर अलग-अलग रंग फबते हैं। बच्चों पर गहरे रंग जचते हैं तो बड़ों पर हल्के रंग अच्छे लगते हैं। बच्चों और बड़ों के स्वेटरों के डिजाइन भी समान नहीं होते। उनमें भी अन्तर होता है।

लड़कियों के लिए कई रंगों का स्वेटर अच्छा लगता है जबकि लड़कों पर एक समान रंग का स्वेटर ही जचता है।

हमेशा अच्छी कंपनी की ऊन ही खरीदें।

ऊन हमेशा जरूरत से ज्यादा खरीदें ताकि कम पडऩे पर परेशान न होना पड़े। यदि वह बच जाती है तो भविष्य में किसी अन्य प्रयोग में आ सकती है।

ऊन का रंग पक्का है या नहीं, यह देखने के लिए किसी कपड़े पर ऊन रगड़ कर देखें। यदि रंग नहीं छूटता तो ऊन का रंग पक्का समझें।

बच्चों के स्वेटर हमेशा ढीले ही बनाने चाहिएं ताकि आगे दो तीन वर्षों तक वे उन्हें पहन सकें जबकि बड़ों के स्वेटर ढीले न बनाएं। उनकी फिगर अनुसार ही बनाएं।

ऊन का गोला बनाते समय हाथ ढीला रखें ताकि गोला ढीला बने। कसकर लपेटने से ऊन खराब हो जाती है। उसमें पहले वाली बात नहीं रहती।

बुनाई में काम आने वाली सभी ऊन एक ही मोटाई की लें। मोटी-पतली ऊन एक साथ बुनने में भद्दी लगती है।

बुनाई सही नंबर की सलाई से ही करें। बार्डर हमेशा पतली सलाई से बुनेें। ऊपर की बुनाई मोटी सलाई से बुनें। अगर आपका हाथ सख्त है तो एक नम्बर ज्यादा की सलाई लें और अगर आपका हाथ ढीला है तो एक नम्बर कम की सलाई से बुनें।

ऊन का एक गोला खत्म होने पर दूसरा गोला किनारे से शुरू करें ताकि जोड़ की गांठ किनारे पर ही आये जिसे स्वेटर की सिलाई में दबाया जा सके।

फंदों को न ज्यादा कसकर रखें और न ज्यादा ढीला रखें।

यदि कोई फंदा बीच में छूट जाए तो उसे उठाकर बुन लें वरना बुनाई उधड़ जायेगी।

बुनाई बन्द करते समय सलाई अधूरी न छोडं़े। इसे पूरा करके ही बन्द करें।

कंधे और गले की पट्टी दिन के समय बुनें ताकि बुनाई में सफाई हो। एक बार में एक पट्टी बुनकर ही उठें वरना बुनाई में फर्क आ जायेगा।

- शिखा चौधरी

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