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पारिवारिक शांति में ही है प्रेम व प्रसन्नता

पारिवारिक शांति में ही है प्रेम व प्रसन्नता

पारिवारिक शांति, प्रेम व प्रसन्नता को बनाए रखने के लिए पत्नी न केवल पति बल्कि पूरे परिवार के प्रति समपिज़्त तथा सेवाभावी होती है। वह एक सच्ची साथी, हितैषी तथा नेक सलाहकार की भूमिका का निवाज़्ह कर पति की हर समस्या को आसान कर देती है। नारी घर में कलह न करवाकर यदि समझदारी से अपने घर की स्थिति को देखकर चले तो वह घर प्यार एवं सुखों का सागर होता है।

संतानोत्पत्ति, उनका पालन-पोषण कर भोजन, वस्त्रा आदि का प्रबंध, रसोई के कायोज़् को सम्भालना, गृहस्थी के समुचित आवश्यक खचोज़् को देखना, यह सभी नारी से ही संभव है अत: पिता, भाई, पति, देवर, जेठ जा अपने कुल का कल्याण चाहते हैं, उन्हें स्त्रिायों का सम्मान करना चाहिए।

कुछ समय पहले किसी लड़के वाले के घर लड़की वाला रिश्ते के लिए जाता था तो सारे घर में खुशी की लहर दौड़ जाती थी। उनका बड़ा सम्मान किया जाता था। लड़की देखने की प्रथा भी नहीं थी। जैसी भी आ गई, उसी को घर की लक्ष्मी मानकर उसको आदर-सम्मान दिया जाता था।

जब से लड़की देखने का चलन हुआ तो सौदेबाजी भी आरंभ हो गई। रिश्तेदारों का प्यार समाप्त हो गया। घर की बहू के साथ अत्याचार होने लगा। घर नरक बनने लगा। नाना प्रकार के झगड़े और फिर अदालतों में मुकदमेबाजी होने लगी। सभी लड़के वाले लगभग लड़की वाले होते ही हैं परन्तु यह बात भूल जाते हैं। बहू सास बनने पर अपने समय को याद नहीं करती और बहुओं पर जुल्म ढाती है।

नारी का सम्मान या अपमान नारी के ही हाथों में होता है। सास जैसा कहती है, परिवार वैसा ही समझता एवं मानता है। आप परिवार में खुशियां बांटकर तो देखें, चारों तरफ खुशी की लहर दौड़ती हुई नजर आएगी। प्यार का बीज बोकर तो देखें, गृहलक्ष्मी को सम्मान प्यार देकर तो देखें, दुखदाई लालच को त्याग कर तो देखें, घर में कैसी शांति आती है, कितनी खुशियां घर में आ जाती है, किस प्रकार घर में हर ओर स्नेह की सरिता बहती नजर आती है।

आइये सब मित्रा निश्चय करें कि जिस लड़की को अपने घर की बहू बनाने का निणज़्य ले चुके हैं, वह शादी के पश्चात् हमारे घर की गृहलक्ष्मी है जो बहुत सारी उमंगें लेकर आई है। वह जैसी भी है, अब हमारी है। उसे अधिक-से-अधिक सम्मान देकर जीवन को सुखी बनाएं और रिश्तेदारी से प्यार बढ़ाएं।

- मीना जैन छाबड़ा

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