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सुंदरता कितनी महत्त्वपूर्ण है

सुंदरता कितनी महत्त्वपूर्ण है

आजकल अक्सर लड़कियों की योग्यता के स्थान पर उनकी शारीरिक सुंदरता को महत्त्व दिया जाता है। हमारे समाज में लड़की की साधारण-सी कमी विवाह में बाधक होती है। लड़की दिखने में अधिक सुंदर न होना, रंग गहरा होना, बाल घने न होना जैसी बातों के कारण संबंध टूट जाना साधारण सी बात है।

सुना जाता है कि शारीरिक सुंदरता के स्थान पर आंतरिक सुंदरता अच्छी है परन्तु व्यवहार में कुशलता, सदगुण, परिश्रम आदि को उतना महत्त्व नहीं दिया जाता। कई बार मध्यमवर्गीय परिवार में साधारण शक्ल की लड़कियों का विवाह कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण असंभव हो जाता है। कई लड़कियां अविवाहित रह जाती हैं।

कई बार शारीरिक सुंदरता को धन के द्वारा पूर्ण करने का प्रयास किया जाता है पर अधिक दहेज देने पर भी यह निश्चित नहीं हो पाता कि जिस घर में लड़की की शादी हो रही है, वह वहां पर सुखी रह सकती है। सुंदर न होने या शारीरिक कमी से रिश्तों में दरार आ जाती है। इसकी वजह से लड़कियों को समस्याओं का सामना करना पड़ता है। पति द्वारा छोड़े जाने एवं परावलम्बी होने के कारण समस्याएं बढ़ती जाती हैं।

माता-पिता का कर्तव्य है कि लड़कियों की शिक्षा पर लड़कों से अधिक ध्यान दें। लड़के तो जीवन की नाव को किसी भी तरह पार कर लेते हैं परंतु लड़कियों को अशिक्षित होने पर कई गुणा अधिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। लड़कियों में शारीरिक कमी हो तो उनकी शिक्षा व स्वावलम्बन के लिये विशेष तौर पर प्रयास किये जाने चाहिएं।

फिर वह आर्थिक रूप से परावलम्बी नहीं होगी। कई महिलाएं दिखने में साधारण है, परन्तु वे उच्च-पदों पर आसीन हैं। सरकार ने विकलांगों हेतु भी आरक्षण की व्यवस्था की है। विकलांग होते हुए भी लोग कई प्रकार के व्यवसाय एवं उद्योगों में सफल हुए हैं। सुंदर रंग रूप न होना या शारीरिक कमी समाज में सम्मानजनक जीवनयापन करने में बिल्कुल बाधक नहीं है। आवश्यकता है आत्मविश्वास, परिश्रम एवं उचित शिक्षा की। ऐसे लड़के-लड़कियों को आरंभ से ही यदि आत्मनिर्भर होने की सही शिक्षा दी जायेगी तो वे माता-पिता पर भार बनने के स्थान पर समाज व राष्ट्र के लिये उपयोगी सिद्ध होंगे।

- मनोज परिहार 'भारत'

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