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चेहरे का सौंदर्य और कील

चेहरे का सौंदर्य और कील

चेहरे पर कील शब्द जुबान पर आते ही दिल में एक कुरूप और भद्दे चेहरे की तस्वीर सामने आ जाती है जो सदियों से नौजवान वर्ग के लिये एक गम्भीर समस्या बनी हुई है। आज भी करोड़ों युवक युवतियां, इस गम्भीर समस्या से ग्रस्त हैं। वे सिर्फ शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक निराशा और उदासी जैसे रोगों में जकड़े हुए हैं।

जब हम 12-13 साल की आयु से किशोर अवस्था की तरफ बढ़ते हैं तो हमारे शरीर के अन्दर मौजूद हारमोन्स व ग्रंथियां उत्तेजित होने लगती हैं और लड़के या लड़कियों में अलग-अलग तरह के रस जिन्हें हारमोन्स कहते हैं, निकलते हैं जिनमें मुख्य हैं एस्ट्रोजन, प्रोजेस्ट्रोन, टेस्टोस्टेरोन आदि और जब लड़कियों में हार्मोन्स बदलते हैं तो छाती का विकास, आवाज़ में पतलापन आना, शरीर के कई भागों में चर्बी का बढऩा, माहवारी का आना शुरू होना त्वचा का नर्म होना आदि विकास में सहायक होते हैं।

यही समय होता है जब शरीर में विकास की प्रक्रि या बहुत तेजी से होती है। त्वचा के अंदर पसीना और तेल की ग्रंथियां (जो त्वचा को कोमल बनाती हैं) कभी-कभी अधिक मात्र में तेल निकालती हैं जिसके कारण वातावरण में मौजूद जीवाणु को बढऩे के लिए एक माध्यम मिलता है और जीवाणु-ग्रंथियों में शामिल हो कर इन्फेक्शन फैलाती है जिसके फलस्वरूप सूजन लाली, खुजली और आखिर में मुंहासे या पस की शक्ल में सामने आते हैं। अब यह त्वचा की किस्म पर निर्भर करता है कि मुंहासों का निदान क्या है। वैसे तो यह आम त्वचा वाले व्यक्ति में तो 3-4 दिन में सूख कर ठीक हो जाते हैं परन्तु चिकनी और तेल वाली त्वचा के व्यक्ति पर बुरा असर करती है। जैसे एक के बाद दूसरे मुंहासे (कील) निकलने लगते हैं। यह सिलसिला लम्बे समय तक चलता है।

मुंहासे या कीलों से कैसे बचा जा सकता है? कहां जाता है कि इलाज से ज्यादा परहेज जरूरी है। इलाज से बचाव बेहतर है। इन कीलों से बचा जा सकता है परन्तु शर्त है कि निम्नलिखित बातों का ध्यान शुरू से रखा जाए जैसे:-

- पानी अधिक मात्र में पिया जाए, मौसमी फल और सब्जियां ज्यादा से ज्यादा खाई जाएं।

- सही आयु (12-14 साल) में ही त्वचा की देखभाल शुरू कर दी जाए।

- तली हुई और डिब्बाबंद चीजें खटाई, अचार, मुरब्बा, जैम, आइसक्रीम कम मात्र में खाई जाएं।

- कब्ज न होने दी जाए और पेट साफ रखा जाए। हरा सलाद खाया जाए।

- दिमाग में फालतू की ंिचंता न लाई जाए क्योंकि यह सिद्ध हो गया है कि चिंता करने वाले व्यक्ति को त्वचा के रोग अधिक होते हैं।

- चिकनी ओर मोटी त्वचा वाले व्यक्ति को क्रीम, लोशन इस्तेमाल नहीं करने चाहिए। बाजार में मिलने वाले साधनों की तरफ अधिक ध्यान न देकर घरेलू नुस्खे जैसे नींबू के पानी से चेहरा साफ करना चाहिए।

- सर्दियों में रात को सोते समय गर्म पानी में तौलिया भिगो कर चेहरे पर रखना चाहिए जिससे त्वचा के रोम खुल जाते हैं और त्वचा के अंदर के कीटाणु साफ हो जाते हैं।

अगर इन सुझावों का ध्यान रखा जाये तो कीलों से कुछ हद तक छुटकारा पाया जा सकता है।

- अमर जीत सिंह

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