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कविता: 'तेरी तारीफ में कितना लिखे कोई'

कविता:

तेरी तारीफ में कितना लिखे कोई

कम ही लगता है जितना लिखे कोई

ये उम्र ही कम पडने लगे लिखते-लिखते

सात जन्म तक भी गर लिखे कोई

और कुछ याद रहे या ना रहे याद

ऐसे लिखे तेरे प्यार में जैसे सपना लिखे

नज्म खुद ब खुद बन जाती है

जब तेरा हंसना बोलना लिखे कोई

तेरी आवाज में और तेरी हर अदा पे

तेरा रूकना और तेरा चलना लिखे कोई

किसी की गजल में वो जज्बा कहां

गर 'लवी' के बारे में ना लिखे कोई।।

- श्रीमती लवी अग्रवाल

समाजसेवी एवं भाजपा नेत्री

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