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Read latest updates about "कविता" - Page 1

  • ''गजल''

    देर से ही सही वो दर्द, वो पीड़ा असहनीय। कम तो नहीं होगी। हाँ! देर ही से सही। इंसाफ मिला तो सही। जिस्म क्या हुई थी जख्मी आत्मा भी। मरहम वक्त का मिला तो सही। लौटकर न आएगी बेटी वो देश की। लेकिन दरिंदों को भी मिलेगी अब मौत ही। आंसू नहीं सूखेंगे माना माँ-बाप की आंखों से कभी। बेटी खो गयी जो...

  • गजल

    तुम दुआओं में बसे मेरी.. तुम अहसास बन महक रहे हो.. साँसों में मेरी। तुम सँवार रहे हो .. गीतों को मेरे। भाव बन तुम लिखे जाते हो हर रोज ही डायरी में मेरी। जीवन डगर पर न चल पाए साथ साथ तो क्या हुआ। तुम हर आहट में बसे हो मेरी। बसन्त बन छा जाते हो एक खुमारी से। कभी तुम लहरा जाते हो आँचल। ...

  • नया वर्ष मंगलमय हो

    नया वर्ष नित मंगलमय हो। लहर खुशी की घर-घर आये, प्रेम-गीत हर प्राणी गाये, बाधाओं की चट्टानों से नहीं किसी को कोई भय हो। नया वर्ष नित मंगलमय हो। सबको अपनी बांहों का बल बने प्रगति का अनुपम संबल सिंह सरीखा जीने वाला सब में हर पल जोश अक्षय हो नया वर्ष नित मंगलमय हो। अमन-समृद्धि-सुखदिशा-दशा हो ...

  • कविताः उठो और जागो

    दिवस वही है कल था जैसा वही सब चांद सितारे। तुम बदलोगे सब बदलेगा बदले जो कर्म तुम्हारे।। विदा हो रहा वर्ष उन्नीसवां हुआ बीसवें का आगाज। भूल हुई कोई माफ करेंगे रहा विरूद्ध जो कोई काज। धुंध कुहासा छंटे सभी खुशियां महके तुझ द्वारे।। तुम...

  • कविता: खजूर

    प्राकृतिक शर्करा का भण्डार ऊर्जा बढ़ाने में मददगार. पोषक तत्वों से भरपूर कब्ज़ को यह भगाए दूर. हार्ट फ्रैंडली माना जाता एलर्जी से छुटकारा दिलाता. हड्डियों को मज़बूती देता स्वादिष्ट भी कितना होता. अरब देशों से लाया जाता बूढ़े बच्चे सब को भाता. रमज़ान का रोज़ा भी खजूरों से खोला जाता. इस के...

  • कविता: धूप जाड़े की

    धूप जाड़े की निराली बांटती है प्यार, आ सवेरे रोज सबके खेत-आंगन-द्वार। रात के दुख-दर्द सारे हम सहज ही भूल, खेलते, हंसकर खिलाते बस खुशी के फूल। अगर कुहरा कभी आता वैर का ले भाव, हर दिशा में है चलाता खूब अपना दांव। सांझ होते विकलता के थिरकते फिर तार, धूप जाड़े की निराली बांटती है प्यार। ...

  • क्या यही मेरे भारत की पहचान है..

    धोखेबाजो का हर एक जगह मान है क्या यही मेरे भारत की पहचान है|| जिसकी कोई इज्जत है ना मान है जिसके पास सब ऐशो -आराम है हर गुनाह का जो जग मे गुनाहगार है काले धन से भरे जिसके भंडार है कोई धर्म नही उसका बस;शैतान है क्या यही मेरे भारत की पहचान है झूठ के दम पर पैसा कमाता है जो माल जनता का घर बैठ...

  • कविता

    वीर बांकुरों बढ़कर तोड़ो दुश्मन का भरम वन्दे मातरम, वन्दे मातरम... बुरी नजर दुश्मन की सीमा पर न कभी पडने देना नहीं दूब आतंकी पावन माटी में जमने देना रौंद-रौंद कर पैरों से तुम करते रहो खत्म वन्दे मातरम, वन्दे मातरम... दुश्मन की तोपों का रूख फौलादी सीनों से मोड़ो बुरे इरादों वाले चक्रव्यूह को...

  • शान मेरी तुम कहां हो

    घर का हर हिस्सा धड़कता है, तुम्हारी निरुपम मुस्कान में दिल की बाती जल गई दिये के तेल में, आग मेरी तुम कहां हो सांस क्षण-क्षण दहकती है तुम्हारी याद में, विरह की आग में तेरी अंधेरे भी उजाला मांगते हैं तुम से, अरमान मेरी तुम कहां हो यह घर के दीप हैं, दीवार और खिड़की, रंगोली है , मन के पुष्प भी ...

  • कविताः छटा हिन्द की

    बदल गई है छटा हिन्द की, खुद को लज्जित पायेगा। सामाजिक पिंजरे में पीड़ित, हंस ना मोती पायेगा।। मन दर्पण तेरा धूमिल लगता, करता है ताक झांक यहां, घर शीशे के बावजूद भी, पत्थर फेंक रहा है यहां। टुकड़ा एक दिन पत्थर का, जब तेरे घर पर आयेगा, कंचन कोमल सी कलिया की, नींद उड़ा ले जायेगा। कलियों का आसन छूटेगा,...

  • कविता: भारत

    हैं एक अरब इंसान। अपना भारत देश महान।। हैं मन्दिर-मस्जिद-गुरूद्वारा, प्यारा-प्यारा गिरिजाघर। है प्यारी-न्यारी भाषाएं, हर पांच कोस पर बदले स्वर।। पढ़ते बाइबिल, वेद-कुरान, हैं एक अरब इंसान। अपना भारत देश महान।।1।। हैं गंगा जी और जमुना जी, है ताजमहल बड़ा अजूबा। बस प्रीति की रीति यहां फैली, ...

  • कविता: दुमुंहे नेता

    दुमुंहे सांप ही नहीं इंसान भी होते हैं।, बल्कि सांपों से अधिक इंसान ही होते हैं ऐसे इंसान विषधरों से कहीं अधिक खतरनाक भी होते हैं! मुंह पर ठकुरसुहाती पीठ पीछे बुराई करते हैं ऐसा दोगलापन करते जरा भी नहीं ठिठकते हैं ऐसे दुमुंहे हर जगह हर समय हर समूह में मिल जाते हैं अपनी इस कमीनी हरकत को ...

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