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कविता - Page 1

  • (गीतिका) होली की चाहत

    लेखिका-डॉ.नीलम खरे अब ख़ुद की पहचान चाहिए , अधरों पर मुस्कान चाहिए । जीवन रंगों में रँग जाए, ऐसा ही अरमान चाहिए । रो-रोकर जीना है क्योंकर, सबकी रक्षित आन चाहिए । नारी का करते जो शोषण, उनका अब अवसान चाहिए । न्याय,वफ़ा,सत्य,नैतिकता, नेह भरा जयगान चाहिए। गॉड,गुरु...

  • कविता: अब ना आयेंगे माधव

    कमजोर नहीं जो टूट जाओ, नादान नहीं जो रूठ जाओ। बेपरवाह नहीं की जिम्मेदारी से मुंह मोड़ जाओ। कमतर नहीं किसी से कि अपना हक छोड़ जाओ। बहुत सहा सदियों से और नहीं अब सहना है। मान-सम्मान के नाम पे, ना अग्नि परीक्षा देती जाओ। आएंगे न माधव अब, सुनो लो चीर बढ़ाने को बन चट्टान सी उठो और अपना चीर संभालो तुम।...

  • कम्प्यूटर युग में

    कम्प्यूटर युग से जुड़कर हम हम बड़े हैं मानी, अब न समस्यायें लगती हैं उलझी-जटिल-पुरानी। बिना किसी अटकलबाजी के जब हैं चाहते जैसा, पलक झपकते पा लेते नित इच्छित पल हम वैसा। समय नहीं वह दूर, बंधुओं, आयेगा वह काल, अपने देश की गुत्थी का हल लेंगे सहज निकाल। - रामसागर 'सदन'

  • कविता: 'तेरी तारीफ में कितना लिखे कोई'

    तेरी तारीफ में कितना लिखे कोई कम ही लगता है जितना लिखे कोई ये उम्र ही कम पडने लगे लिखते-लिखते सात जन्म तक भी गर लिखे कोई और कुछ याद रहे या ना रहे याद ऐसे लिखे तेरे प्यार में जैसे सपना लिखे नज्म खुद ब खुद बन जाती है जब तेरा हंसना बोलना लिखे कोई तेरी आवाज में और तेरी हर अदा पे तेरा रूकना और...

  • ''गजल''

    देर से ही सही वो दर्द, वो पीड़ा असहनीय। कम तो नहीं होगी। हाँ! देर ही से सही। इंसाफ मिला तो सही। जिस्म क्या हुई थी जख्मी आत्मा भी। मरहम वक्त का मिला तो सही। लौटकर न आएगी बेटी वो देश की। लेकिन दरिंदों को भी मिलेगी अब मौत ही। आंसू नहीं सूखेंगे माना माँ-बाप की आंखों से कभी। बेटी खो गयी जो...

  • गजल

    तुम दुआओं में बसे मेरी.. तुम अहसास बन महक रहे हो.. साँसों में मेरी। तुम सँवार रहे हो .. गीतों को मेरे। भाव बन तुम लिखे जाते हो हर रोज ही डायरी में मेरी। जीवन डगर पर न चल पाए साथ साथ तो क्या हुआ। तुम हर आहट में बसे हो मेरी। बसन्त बन छा जाते हो एक खुमारी से। कभी तुम लहरा जाते हो आँचल। ...

  • नया वर्ष मंगलमय हो

    नया वर्ष नित मंगलमय हो। लहर खुशी की घर-घर आये, प्रेम-गीत हर प्राणी गाये, बाधाओं की चट्टानों से नहीं किसी को कोई भय हो। नया वर्ष नित मंगलमय हो। सबको अपनी बांहों का बल बने प्रगति का अनुपम संबल सिंह सरीखा जीने वाला सब में हर पल जोश अक्षय हो नया वर्ष नित मंगलमय हो। अमन-समृद्धि-सुखदिशा-दशा हो ...

  • कविताः उठो और जागो

    दिवस वही है कल था जैसा वही सब चांद सितारे। तुम बदलोगे सब बदलेगा बदले जो कर्म तुम्हारे।। विदा हो रहा वर्ष उन्नीसवां हुआ बीसवें का आगाज। भूल हुई कोई माफ करेंगे रहा विरूद्ध जो कोई काज। धुंध कुहासा छंटे सभी खुशियां महके तुझ द्वारे।। तुम...

  • कविता: खजूर

    प्राकृतिक शर्करा का भण्डार ऊर्जा बढ़ाने में मददगार. पोषक तत्वों से भरपूर कब्ज़ को यह भगाए दूर. हार्ट फ्रैंडली माना जाता एलर्जी से छुटकारा दिलाता. हड्डियों को मज़बूती देता स्वादिष्ट भी कितना होता. अरब देशों से लाया जाता बूढ़े बच्चे सब को भाता. रमज़ान का रोज़ा भी खजूरों से खोला जाता. इस के ...

  • कविता: धूप जाड़े की

    धूप जाड़े की निराली बांटती है प्यार, आ सवेरे रोज सबके खेत-आंगन-द्वार। रात के दुख-दर्द सारे हम सहज ही भूल, खेलते, हंसकर खिलाते बस खुशी के फूल। अगर कुहरा कभी आता वैर का ले भाव, हर दिशा में है चलाता खूब अपना दांव। सांझ होते विकलता के थिरकते फिर तार, धूप जाड़े की निराली बांटती है प्यार। ...

  • क्या यही मेरे भारत की पहचान है..

    धोखेबाजो का हर एक जगह मान है क्या यही मेरे भारत की पहचान है|| जिसकी कोई इज्जत है ना मान है जिसके पास सब ऐशो -आराम है हर गुनाह का जो जग मे गुनाहगार है काले धन से भरे जिसके भंडार है कोई धर्म नही उसका बस;शैतान है क्या यही मेरे भारत की पहचान है झूठ के दम पर पैसा कमाता है जो माल जनता का घर बैठ...

  • कविता

    वीर बांकुरों बढ़कर तोड़ो दुश्मन का भरम वन्दे मातरम, वन्दे मातरम... बुरी नजर दुश्मन की सीमा पर न कभी पडने देना नहीं दूब आतंकी पावन माटी में जमने देना रौंद-रौंद कर पैरों से तुम करते रहो खत्म वन्दे मातरम, वन्दे मातरम... दुश्मन की तोपों का रूख फौलादी सीनों से मोड़ो बुरे इरादों वाले चक्रव्यूह को...

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