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स्मार्टफोन से निकलने वाली नीली रोशनी आंखों को पहुंचाती है नुकसान

स्मार्टफोन से निकलने वाली नीली रोशनी आंखों को पहुंचाती है नुकसान

16 सितंबर। अब तक ये बात तो सभी जान चुके हैं कि स्मार्टफोन से निकलने वाली नीली रोशनी आंखों को काफी नुकसान पहुंचाती हैं। लेकिन, क्या आपको पता है कि इससे निकलने वाली नीली रोशनी त्वचा के लिए भी उतनी ही नुकसानदायक हो सकती हैं। कई लोग तो 10 मिनट भी अपने स्मार्टफोन से दूर नहीं रह पाते हैं। लेकिन, एक हालिया शोध के बाद त्वचा रोग विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि स्मार्टफोन से दूरी बनाना जरूरी है।

बायोलॉजिकन सोरोसिस एंड नेल क्लीनिक के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉक्टर श्यामालर गुनाथेसन ने चेतावनी दी है कि स्मार्टफोन से निकलने वाली नीली रोशनी त्वचा के लिए उतनी की नुकसानदायक हैं जितनी सूरज की किरणें।

एक बैठक के दौरान उन्होंने कहा, पांच दिन डिजिटल उपकरणों के सामने काम करने से त्वचा को उतनी ही पराबैंगनी किरणें मिलती हैं जितनी 25 मिनट सूरज में बैठने से। उन्होंने कहा, त्वचा पर टैन (कालापन) होने में सिर्फ सात मिनट की सूरज की किरणें ही काफी हैं, ऐसे में इतनी देर स्मार्टफोन के सामने बैठना काफी नुकसानदायक हो सकता है।

नीली रोशनी के संपर्क में आना विशेष रूप से लंबे समय तक आपको थोड़ा अधिक हाइपरपिगमेंटेशन दे सकता है। इससे त्वचा भूरे रंग की होने लगती है। इससे त्वचा जल्दी बूढ़ी होने लगती है, त्वचा में झुर्रियां पड़ने लगती है और नमी भी गायब होने लगती है।

एंटीऑक्सीडेंट वाले त्वचा उत्पादों का इस्तेमाल करें-

डॉक्टर गुनाथेसन ने कहा कि त्वचा का बचाव करने का सबसे आसान तरीका इन उपकरणों पर व्यतीत किए जाने वाले समय को सीमित करना है। उन्होंने कहा, ये न सिर्फ आपकी दिमागी सेहत के लिए अच्छा है बल्कि ये आपकी आंखों और त्वचा के लिए भी अच्छा है। सक्रिय तौर पर स्मार्टफोन सहित अन्य इलेक्ट्रिक उपकरणों का इस्तेमाल करने वाले लोगों ऐसे त्वचा उत्पादों का इस्तेमाल करना चाहिए जिसमें भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन बी-3 और विटामनि-सी मौजूद है।

सनस्क्रीन इस नीली रोशनी के प्रभाव को कम नहीं कर सकते क्योंकि यह एक नजर आने वाली रोशनी है। उन्होंने कहा, आयरन ऑक्साइड एक अच्छा लाइन ब्लॉकर (रोशनी को रोकने वाला) है। ऐसे में आयरन ऑक्साइड वाले मेकअप या सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना बेहतर होगा।

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