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एम्स में हुए शोध का नतीजा- माइग्रेन के दर्द में मददगार है योग

एम्स में हुए शोध का नतीजा- माइग्रेन के दर्द में मददगार है योग

नयी दिल्ली 20 जून - अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के ताजा शोध से यह पता चला है कि योग माइग्रेन के कारण होने वाले तेज सिरदर्द को दूर करने में कारगर साबित होता है।

एम्स के सेंटर फोर इंटिग्रेटिव मेडिसीन एंड रिसर्च (सीआईएमआर)और न्यूरोलॉजी विभाग का यह संयुक्त शोध गत माह अमेरिका की न्यूरोलॉजी अकादमी की आधिकारिक पत्रिका 'न्यूरोलॉजी' में प्रकाशित हुआ।

मुख्य शोधकर्ता न्यूरोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ रोहित भाटिया, सीआईएमआर के प्रभारी प्रोफेसर डॉ गौतम शर्मा तथा न्यूरोलॉजी विभाग के वरिष्ठ रेजिडेंट डॉ आनंद कुमार ने शोध पत्र में लिखा है कि माइग्रेन के उपचार में सिर्फ दवाओं को देने के बजाय इसमें योग को भी शामिल किया जाये तो ईलाज अधिक कारगर साबित होता है। शोध के मुताबिक अगर माइग्रेन का मरीज अगर दवा के साथ योग को अपनी जीवनशैली में शामिल करे तो इसके दौरे कम आते हैं, सिरदर्द की तीव्रता कम होती है और यह कम अवधि के लिए होते हैं।

माइग्रेन के उपचार में प्रयोग होने वाली दवायें करीब 50 फीसदी मरीजों के लिए ही कारगर होती हैं । इसके उपचार में इस्तेमाल की जाने वाली कई दवाओं का साइड इफेक्ट होता है जिसके कारण करीब 10 फीसदी मरीज इसका इस्तेमाल बंद कर देते हैं।

शोध के लिए चयनित माइग्रेन के 114 मरीजों को दो समूहों में विभक्त किया गया। पहले समूह के मरीजों को डॉक्टरों ने सिर्फ दवायें दीं जबकि दूसरे समूह के लिए दवाओं के साथ -साथ योग को भी उपचार में शामिल किया गया।दूसरे समूह में उन मरीजों को शामिल किया गया जिन्हें औसतन अधिक तेज सिरदर्द होता था और उन्हें माइग्रेन के दौरे भी अधिक तथा अक्सर आते थे।

दूसरे समूह के मरीजों को श्वसन संबंधी योग और अन्य आसन कराये गये। इन मरीजों को कराये जाने वाले आसनों का चयन सीआईएमआर ने किया था। इन मरीजों को सीआईएमआर के योग थेरेपिस्ट के निरीक्षण में एक माह तक प्रति सप्ताह तीन दिन एक घंटे के लिए योग पद्धति से प्रशिक्षित किया गया। बाद में इन्हें अगले दो माह तक घर में सप्ताह में पांच दिन योग करने के लिए कहा गया।

बाद में पाया गया कि दोनों समूहों के सिरदर्द की तीव्रता और दौरे में कमी आयी है लेकिन दवा के साथ योग को उपचार में शामिल करने वाले समूह को अधिक लाभ हुआ। माइग्रेन के दौरों के मामले में शोध की शुरूआत में योग और दवा को उपचार में शामिल करने वाले मरीजों को प्रति माह औसतन 9.1 बार सिरदर्द होता था लेकिन शोध के अंत तक यह 48 फीसदी घटकर 4.7 रह गया। सिर्फ दवा लेने वाले मरीजों के दर्द में लेकिन यह गिरावट 12 फीसदी की ही रही, जो प्रतिमाह 7.7 से घटकर 6.8 रह गयी।

इसके अलावा योग करने वाले समूह के दवा लेने की मात्रा में 47 फीसदी और सिर्फ दवा लेने वाले समूह के दवा लेने की मात्रा में 12 प्रतिशत की गिरावट आयी। इससे पता चलता है कि योग से सिर्फ दर्द में कमी नहीं आती बल्कि माइग्रेन के उपचार में होने वाले खर्च में भी कमी आती है।

कोरोना से जंग में भी मददगार है योग

कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण दुनिया भर में लाखों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और बड़ी संख्या में अवसाद में चले गये हैं, ऐसे समय में प्राचीन योग पद्धति रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के साथ ही श्वसन संबंधी समस्याओं और आधुनिक जीवनशैली के कारण होने वाली बीमारियों को नियंत्रित करने में सफल रही है।

कोरोना वायरस के प्रकोप को योग के कई आसन के माध्यम से कम किया जा सकता है ।

योग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय बनाने में अहम योगदान करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि कोरोना संकट के इस दौर में योग न केवल समुदाय और एकता के लिए अच्छा है बल्कि यह शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी विकसित करता है। यह लोगों को आंतरिक रुप से मजबूत बनाने के साथ श्वसन तंत्र को भी मजबूत करता है।

इस साल 21 जून को छठे अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को कोरोना वायरस के कारण फैली तबाही के बीच मनाया जा रहा है। कोरोना संक्रमण को देखते हुए इस साल योग दिवस की विषयवस्तु है-घर पर योग,परिवार के साथ योग। केंद्र सरकार ने इस बार सभी राज्य सरकारों को ऑनलाइन योग कार्यक्रम आयोजित करने के लिए कहा है। आयुष मंत्रालय द्वारा जारी वेब लिंक के जरिये लोग इस कार्यक्रम से जुड़ सकेंगे।

आयुष मंत्रालय ने फेसबुक और ट्विटर पर अंतरराष्ट्रीय और भारतीय प्रतिभागियों को योगासन के फोटो और वीडियो शेयर करने के लिए भी कहा है। केंद्रीय आयुष मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने भी लोगों से योग दिवस पर आयोजित 'माई लाइफ, माई योगा' वीडियो ब्लॉगिंग प्रतियोगिता में हिस्सा लेने का आग्रह किया है।

योग दिवस के अवसर पर योग गुरु बाबा रामदेव कहते हैं कि सुबह पांच मिनट सूर्य नमस्कार करने से काेरोना वायरस के खिलाफ जंग जीतने में मदद मिल सकती है। लोगों को श्वसन से संबंधित पांच आसन कपालभाति, भस्त्रिका, अनुलोम-विलोम, उज्जयी और भ्रामरी करना चाहिए। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और फेफड़े भी मजबूत होते हैं। देश में तेजी से कोरोना संक्रमण बढ़ रहा है। ऐसे समय में लोगों को हार नहीं माननी चाहिए। योग रुचिकर है। कई आसन कोरोना के कारण उत्पन्न तनाव को कम करने में कारगर हैं।

योग की विभिन्न पद्धति में शामिल बिहार योग पद्धति के परमाचार्य परमहंस स्वामी निरंजनानंद सरस्वती कहते हैं कि इस योग दिवस का लक्ष्य शारीरिक स्वास्थ्य की प्राप्ति, मानसिक सकारात्मकता में वृद्धि तथा सभी के साथ एक स्वस्थ, करुणापूर्ण, उत्थानकारी सामाजिक संबंध का विकास होना चाहिए। यह अंतराष्ट्रीय योग दिवस है और इस अवसर पर आयोजित याेग कार्यक्रम को अपनी दिनचर्या में शामिल करना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा ने दिसंबर 2014 में 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाये जाने की मान्यता दी थी जिसके बाद अगले साल यानी वर्ष 2015 में 21 जून को पहली बार इस दिवस को दुनिया भर में धूमधाम से मनाया गया। कोरोना वायरस संक्रमण के कारण पहली बार इस दिवस पर कोई सार्वजनिक कार्यक्रम नहीं हो रहे हैं।

कैंसर से लड़ने की ताकत दे सकता है योग

राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर (आरजीसीआईआरसी) ने कहा है कि वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिलने बावजूद योग कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचाने और लड़ने में कारगर साबित हो सकता है क्योंकि योग एवं ध्यान से कैंसर के मरीजों को तनाव, अवसाद और थकान से राहत मिलती है।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर आरजीसीआईआरसी की साइको ओंकोलॉजी प्रमुख डॉ. हर्षा अग्रवाल ने कहा कि योग कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचाने और लड़ने में भी कारगर साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि इस बात के वैज्ञानिक प्रमाण भले ही नहीं मिले हैं, लेकिन कई बार देखा गया है कि योग एवं ध्यान से कैंसर के मरीजों को तनाव, अवसाद और थकान से राहत मिलती है। इससे जीवन स्तर सुधरता है और मरीज का रोग प्रतिरोधक बेहतर होता है। यह भी देखा गया है कि योग से कैंसर मरीज की इच्छाशक्ति मजबूत होती है और वह बीमारी से ज्यादा बेहतर तरीके से लड़ने में सक्षम होता है।

डॉ. अग्रवाल का कहना है कि कैंसर के इलाज के दौरान मरीजों में कुछ साइड इफेक्ट देखने को मिलते हैं। ऐसा पाया गया है कि योग इनसे बचने में मदद करता है। प्राणायाम सांसों को नियमित करने में मदद करता है तो कई अलग-अलग आसन शरीर की क्षमता और लचीलापन बढ़ाते हैं। इनसे मरीज की थकान भी मिटती है। इन सबसे बड़ी बात, कि योग मानसिक रूप से मजबूती देता है। योग की ये सभी खूबियां मिलकर उसे कैंसर मरीजों के लिए बेहतर बना देती हैं। कैंसर के कई मरीज योग से फायदा होने की बात कह चुके हैं।

उन्होंने कहा कि योग के अलग-अलग प्रकार अलग-अलग तरीके से असर डालते हैं। पवनमुक्तासन और उत्तान पादासन के साथ शीतली, शीतकारी और सदन्त प्राणायाम को कीमोथेरेपी के कारण आने वाले चक्कर और उल्टी की समस्या से निजात दिलाने वाला पाया गया है। कुछ सामान्य आसन और सुदर्शन क्रिया आदि से थकान, दर्द और नींद की समस्या से राहत मिल सकती है। वहीं ओंकार के मंत्रोच्चार और ध्यान से भय और अवसाद खत्म होता है और मन शांत होता है। डॉ. अग्रवाल ने कहा कि वैसे तो योग सुरक्षित है, लेकिन किसी प्रशिक्षक की मदद से ही इसे करना चाहिए। किसी तरह की दिक्कत नहीं हो, इसके लिए जरूरी है कि कुछ बातों का ध्यान रखा जाए। खाने के कम से कम दो घंटे बाद ही योग की कोई क्रिया करनी चाहिए। किसी प्रशिक्षक से सीखे बिना ही घर पर प्रयास नहीं करना चाहिए। प्रशिक्षक को अपने स्वास्थ्य एवं बीमारियों के बारे में सारी बात बता देनी चाहिए। यदि पीठ या जोड़ों में दर्द जैसी कोई समस्या है तो उससे भी प्रशिक्षक को अवगत कराएं। बिना प्रशिक्षण के कोई जटिल आसन करने का प्रयास नहीं करना चाहिए। गर्भावस्था या मासिक धर्म के दौरान भी कुछ योग क्रियाएं निषेध हैं, उनके बारे में भी प्रशिक्षक से जानकारी लेनी चाहिए।डॉ अग्रवाल ने कहा कि इन बातों को ध्यान में रखते हुए कैंसर के मरीज योग से बहुत लाभ ले सकते हैं।


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