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मधुमेह रोगियों के लिए जानलेवा है धूम्रपान

मधुमेह रोगियों के लिए जानलेवा है धूम्रपान

आज के भौतिकवादी युग और तेज रफ्तार जिन्दगी ने मानव की दिनचर्या को अनियमित कर दिया है। अनियमित दिनचर्या और खान-पान में लापरवाही के चलते मानव को विभिन्न प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ये मानसिक परेशानियां मानव जीवन में विभिन्न प्रकार की बीमारियों को भी जन्म देती हैं। ऐसी ही एक बीमारी है मधुमेह या डायबिटीज।

आज समाज में मधुमेह रोगियों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है परन्तु सवाल इस बात का है कि इस लाइलाज बीमारी पर नियन्त्रण रखना ही इसका सफल इलाज है। समाज में रह रहे मधुमेह रोगियों के मन में एक भ्रान्ति भी है कि धूम्रपान इस रोग में आराम दिलाता है जो सरासर गलत है। इस संबंध में डॉक्टरों का कहना है कि धूम्रपान के कारण मधुमेह तो बढ़ता ही है और बहुत सी गुत्थियां भी पैदा होती हैं।

सच यह है कि रक्त शर्करा नियंत्रित रखने वाली शारीरिक कार्य व्यवस्था बिगड़ जाने से यह बीमारी होती है। साथ ही साथ धूम्रपान की आदत भी इस बीमारी को और बढ़ावा देती है क्योंकि धूम्रपान से शरीर में इन्सुलिन के श्रवण की क्षमता कम हो जाती है। स्वाभाविक रूप से गुत्थियां पैदा होती हैं।

भारत में 35 लाख से ज्यादा मधुमेह के मरीज हैं। इनमें धूम्रपान करने वालों की मात्रा भी ज्यादा है। स्वाभाविक रूप से ऐसे मरीजों को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है और कभी-कभार ऐसे मरीजों को अपनी जान से हाथ तक धोना पड़ सकता है। शोधकर्ताओं के आंकड़े बताते हैं कि 1.3 मिलियन लोग धूम्रपान करते हैं और भारत में यह संख्या 74 लाख तक है। विशेषज्ञों का मानना है कि मधुमेह के मरीजों को हृदय रोग होने का खतरा तीन गुना रहता है परन्तु धूम्रपान करने वाले मधुमेह मरीजों में यह प्रमाण ग्यारह गुना हो जाता है।

धूम्रपान के कारण रक्त शर्करा का प्रमाण बढ़ता है और इन्सुलिन का उपयोग करने की शारीरिक क्षमता कम होकर मधुमेह का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही एक सिगरेट पीने से इन्सुलिन का उपयोग करने की शारीरिक क्षमता 15 प्रतिशत से कम हो जाती है।

धूम्रपान करने वाले लोगों का कोलेस्ट्रोल बढ़ जाने से चर्बी का प्रमाण भी बढ़ जाता है जिस कारण दिल का दौरा पड़ सकता है। दो बार सिगरेट पीने वालों के रक्त प्रवाह में रूकावट पैदा होकर उनको पैरों की बीमारी हो सकती है। जो मधुमेह मरीज धूम्रपान करते हैं उनकी रक्तपेशियों में कमजोरी होती है जिस कारण गुर्दो की बीमारी हो जाती है।

अधिक सिगरेट पीने के कारण इन्सुलिन के प्रमाण में असन्तुलन पैदा होता है। शोध बताते हैं कि शरीर द्वारा इन्सुलिन का कितनी बार उपयोग हो, यह चक्र बिगड़ जाता है। इस कारण टाइप-2 मधुमेह हो सकता है। शोधों द्वारा यह भी साबित हुआ है कि 5 प्रतिशत लोग किसी की मदद के बिना धूम्रपान पूर्ण रूप से छोड़ सकते हैं और निरन्तर प्रयासों से 35 प्रतिशत लोग ऐसा करने में सफल हो जाते हैं।

धूम्रपान छोडऩे के लिए योग कसरत करें, धूम्रपान तथा निकोटिन के दुष्परिणामों के बारे में पढ़ें, साथ ही चिकित्सक की सलाह और आधुनिक औषधियां भी इसके लिए फायदेमन्द होती हैं। विभिन्न प्रकार की दवाइयां रक्त शर्करा नियन्त्रण में सहायक होती हैं।

मधुमेह होना न होना अपने हाथ में नहीं रहता किन्तु इसके प्रभाव को कम करना अपने हाथ में है। अपने आत्मबल को बढ़ावा देकर दृढ़ संकल्पित होकर धूम्रपान को छोड़ा जा सकता है।

दुर्गा प्रसाद शुक्ल 'आज़ाद'

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