Top

एड्स को लेकर पूर्वाग्रहों से बचें

एड्स को लेकर पूर्वाग्रहों से बचें

एड्स एक जानलेवा खतरनाक बीमारी है। जिसे यह बीमारी लग गई, वह मौत के पहले ही उपेक्षित व्यवहार के कारण मरने लगता है। एड्स को छूत की बीमारी समझ समाज उसके रोगी से कतराने लगता है, उसे कोढ़ी की भांति ट्रीट करने लगता है।

एक भ्रांति यह है कि एड्स के रोगी द्वारा प्रयुक्त बरतन को इस्तेमाल करने, उसके द्वारा प्रयुक्त गिलास से पानी पीने भर से किसी को भी एड्स हो सकता है। इसी तरह रोगी से स्पर्श मात्र से, उसके श्वास से भी यह रोग लग सकता है। यह सही नहीं है। बचाव रोग से करना है, रोगी से नहीं क्योंकि ऐसे समय ही उसे अपनों के सहारे और मदद की आवश्यकता होती है।

एड्स से खास तौर पर पीडि़त वे लोग होते हैं जो समलैंगिक होते हैं या जो स्त्री पुरूष दोनों से शारीरिक संबंध स्थापित करते हैं। एच.आईवी/एड्स सिर्फ नीचे तबके के लोगों में ही होता हो, यह बात सही नहीं है। इंजेक्शन से ड्रग्स लेने वाले जिनकी हाई सोसायटी में कमी नहीं, वे भी इससे संक्र मित हो सकते हैं। रक्तसंचार के जरिए भी एचआईवी. वायरस फैल सकता है।

हमारा सामाजिक परिवेश ऐसा है कि महिलाएं सेक्स विषय पर विचार विमर्श करने से कतराती हैं। पति के विवाहेत्तर संबंधों की जानकारी के बावजूद वे उनका विरोध नहीं कर पाती, न ही पति से गर्भनिरोधक साधन अपनाने की सलाह कर पाती हैं।

एड्स से बचने के लिए इसकी जानकारी होना जरूरी है। औरतों को इस बारे में सचेत करने के लिए ऑल इंडिया विमेन्स कॉन्फरेंस ने काफी कोशिशें की हैं। पहली बार जब डेढ़ लाख से ज्यादा औरतों को इन्वॉल्व कर उनसे एड्स के बारे में बातचीत की गई तो कई भ्रांतियों के बारे में पता चला। इन्हें जानने के पश्चात ही इन्हें दूर करने के उपाय भी सोचे गए। यह काम इतना आसान नहीं है।

वरिष्ठ चिकित्सकों का मानना है कि एड्स बढऩे के साथ-साथ रोगी में टीबी का रोग भी बढऩे लगता है। चिकित्सकों के अनुसार एच.आई.वी. के संक्र मित व्यक्ति में 7-8 वर्षों बाद एड्स के जो लक्षण उभरकर सामने आते हैं, वे हैं कई माह तक बार-बार दस्त आना, अत्यधिक थकान होना, रात को ठंडा पसीना आना, बुखार तथा एक ही माह में पांच सात किलो वजन घटना, मुंह व जीभ में सफेद चकत्ते पडऩा, शरीर की गिल्टियों का सूज जाना आदि। एड्स के लक्षण टीबी के लक्षणों के रूप में सामने आ सकते हैं।

बचाव के लिए सेक्स के मामले में संयम बरता जाए तथा एक साथी जिससे आपका विवाह हुआ है, से शारीरिक संबंध रखा जाए। समलैंगिकता असुरक्षित यौन संबंध, वेश्यावृत्ति, मद्यपान, नशीली दवाओं के प्रयोग से परहेज किया जाए। रक्त जांच करवाते समय डिस्पोजबल नीडल का प्रयोग हो, यह देख लें। प्रोफेशनल डोनर्स से रक्त न चढ़वाएं। इसके लिए किसी रिश्तेदार, जानपहचान वाले से या अस्पताल में परीक्षण किया हुआ रक्त ही लें।

-उषा जैन 'शीरी'

Share it
Top