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यदि बीमार न पडऩा चाहें तो

यदि बीमार न पडऩा चाहें तो

भला स्वस्थ कौन नहीं रहना चाहता परन्तु बढ़ते हुए प्रदूषण व महंगाई की वजह से स्वस्थ रहना मुश्किल हो गया है। फिर ऐसी स्थिति में स्वस्थ कैसे रहा जाए?

स्वस्थ रहने के लिए मुख्यत: तीन बातों पर ध्यान देना जरूरी है-खान पान, सामान्य कसरत तथा रहन सहन।

स्वस्थ रहने के लिए सबसे पहले जरूरी है पौष्टिक आहार। पौष्टिक आहार शरीर को विकसित करने के साथ साथ रोगों से लडऩे की क्षमता भी प्रदान करता है, अत: हर मानव शरीर को पौष्टिक आहार की जरूरत पड़ती है।

पौष्टिकता हर महंगी चीज में ही होगी, यह कोई जरूरी नहीं है। हम कम खर्च में अधिक से अधिक पौष्टिक आहार शरीर को उपलब्ध करा सकते हैं। कृपया निम्नलिखित तथ्यों पर ध्यान दीजिए।

हरी सब्जियों का प्रयोग:- हरी सब्जियां शरीर को उचित मात्रा में पौष्टिकता देने में सक्षम हैं। हरी सब्जियों का यदि कच्चे रूप में प्रयोग किया जाए तो ज्यादा लाभदायक रहेगा। इसका अर्थ यह नहीं है कि आप आलू, कटहल, बैंगन, सेम आदि का प्रयोग कच्चा ही शुरू कर दें परन्तु मूली, गाजर, शलगम, टमाटर, खीरा, मटर आदि का प्रयोग सलाद रूप में किया जाए तो ज्यादा लाभदायक रहेगा।

साग में पालक, बथुआ, मूली का साग, चने का साग आदि का प्रयोग बहुत लाभदायक रहता है। हमें यह याद रखना चाहिए कि शरीर में विटामिन 'बी' और 'सी' का संचय नहीं होता। विटामिन 'बी' और 'सी' शरीर को हरी सब्जियों से सीधा प्राप्त होता है।

महीन खाद्य पदार्थो का प्रयोग नहीं किया जाये:- पेट शरीर को भोजन उपलब्ध कराता है, अत: आमाशय की अंतडिय़ों को स्वस्थ रखना बहुत जरूरी है।

महीन पिसे हुई खाद्य पदार्थों से पेट ज्यादा खराब होता है। बेसन, मैदा आदि से बने खाद्य पदार्थ का सेवन नहीं करना चाहिए बल्कि इसके विपरीत मोटे पिसे हुए तथा रेशेदार खाद्य पदार्थों का सेवन ही पेट को ठीक रखता है, क्योंकि इन्हें पचाने के लिए अंतडिय़ों को दिन रात काम करना पड़ता है जिससे वे स्वस्थ व तंदुरूस्त बनी रहती हैं।

पेय पदार्थों में सावधानी:- उबला हुआ शुद्ध पानी एक अच्छा पेय है जो सहज ही उपलब्ध हो जाता है। दिनभर में आठ से दस गिलास पानी पीना चाहिए जिससे शरीर को उचित मात्रा में पानी मिलता रहे और साथ साथ अधिक मात्रा में शरीर की गंदगी भी बाहर निकलती रहे।

इधर रंगीन ठंडे पेय का प्रचलन बढ़ा है जो शरीर के लिए हानिकारक है। नींबू पानी को इसे ही शीतल पेय के रूप में प्रयोग करें। यदि संभव हो तो ताजे फलों का रस लिया जा सकता है लेकिन रंगीन पानी बिलकुल नहीं।

घी, तेल का प्रयोग कितना उचित?:- वैसे भी घी, तेल की कीमतें ंआकाश को छू रही हैं। ये जितनी महंगी हैं उतनी ही खतरनाक भी। अत: घी, डालडा, तेल के अधिक सेवन से प्रत्येक को बचना चाहिए। दिन भर में शरीर को एक चाय के चम्मच भर तेल मिले तो काफी है। घी, तेल से बनी वस्तुएं किसे अच्छी नहीं लगती किन्तु इनका प्रयोग पर्व त्यौहारों तक ही सीमित रहे तो बेहतर है। इनके ज्यादा प्रयोग करने का अर्थ है हृदय रोग को आमंत्रण देना।

कितनी चाय या कॉफी, काफी है:-

याद रखिए चाय जल्दी बुढ़ापा लाती है। जाहिर है इनका प्रयोग कम किया जाना चाहिए। दिन भर में दो या तीन कप चाय या कॉफी लें। इससे अधिक प्रयोग नहीं करना चाहिए। हाल ही में किये गये शोधों से यह पता चला है कि कॉफी का प्रयोग बिलकुल नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि यह कोलेस्ट्रॉल बढ़ाती है।

भोजन संतुलित हो:- शरीर को भूख लगने पर ही भोजन दिया जाना चाहिए, उससे अधिक नहीं। अक्सर ऐसा देखा जाता है कि समारोहों में लोग अधिक ही खा लेते हैं। स्वाद के चक्कर में ऐसी भूल नहीं करनी चाहिए। ऐसा करने से अपच अर्थात् बदहजमी की शिकायत होती है। पाचनक्रि या बिगडऩे का अर्थ ही है-स्वास्थ्य का हृास।

पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के उपरांत शरीर को हरकत में रखना बहुत जरूरी है। शरीर को श्रम करने का मौका दिया जाना चाहिए। सामान्य कसरत, घर के काम काज स्वयं करके शरीर को श्रम करने का अवसर दिया जा सकता है। रात्रि के भोजन के उपरांत 15-20 मिनट टहलना बहुत लाभदायक रहता है, इससे पाचन क्रि या ठीक रहती है। हृदय रोगियों को रात्रि के खाने के बाद सैर नहीं करनी चाहिए।

शरीर को चुस्त व तंदुरूस्त रखने के लिए पौष्टिक आहार व सामान्य कसरत के साथ साथ शुद्ध आक्सीजन की जरूरत पड़ती है। शुद्ध आक्सीजन की प्राप्ति आपके रहन सहन के ऊपर निर्भर करती है। इसके लिए निम्न बातों पर ध्यान दें-

- बाजार अथवा चलती सड़कों पर हवा में कार्बन डाइआक्साइड के अलावा धूल कणों का बाहुल्य रहता है। अत: इन स्थानों पर चलते समय नाक पर रूमाल का प्रयोग करना चािहए जिससे ये हानिकारक तत्व फेफड़ों तक न पहुंचे।

- घर को हवादार बनाये रखा जाना चाहिए। सोते समय खिड़कियों को खोलकर सोना चाहिए। सांस सदा गहरी लेनी चाहिए जिससे आक्सीजन फेफड़ों के प्रत्येक भाग में पहुंच सके।

- शुद्ध आक्सीजन अमूल्य चीज है जो शरीर को हमेशा ताजा रखती है। सुबह टहलने से इसका सेवन किया जा सकता है। सुबह की हवा में धूल कण नहीं होते।

- उपरोक्त बताये गये तथ्यों पर ध्यान दीजिए एवं निर्देशों का पालन कीजिए। आप स्वस्थ व तंदुरूस्त बने रहेंगे।

- जय प्रकाश सिंह

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