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बीमारियों से छुटकारे के लिए टीवी देखना कम करें

बीमारियों से छुटकारे के लिए टीवी देखना कम करें

शरीर को क्रि या करने की जरूरत होती है लेकिन टी.वी. देखने के दौरान शरीर निश्चल होता है। इससे मोटापा बढ़ता है। इसलिए बच्चों को प्रेरित करें कि टी.वी. के सामने बैठे रहने की तुलना में साइकिल चलाएं या फिर मैदान में जाकर खेले।

बहुत से लोग टी.वी. के सामने ऐसी पोजीशन में बैठते हैं कि उनकी रीढ़ की हड्डी पर दबाव पड़ता है। नतीजतन कमर और मांसपेशियों में दर्द रहने लगता है। आप अच्छे कुशन का इस्तेमाल कर सकते हैं लेकिन क्यों नहीं शाम को आधा एक घंटा आप अपने ही घर के आसपास में वॉक कर लें।

टी.वी. के बहुत करीब बैठने से आंखों में जलन और सिर दर्द हो सकता है। बच्चों को टी.वी. के सामने फर्श या बैड पर पसरने न दे और कम से कम टीवी सेट से छ: फुट या उससे अधिक के फासले पर बैठें।

वाल्यूम को कम ही रखें। बहुत ज्यादा शोर से बहरेपन की समस्या हो सकती है। टी.वी. के सामने बैठकर लगातार कुछ न कुछ खाने की समस्या आपको पेट के रोग दे सकती है। इससे बदहजमी भी हो सकती है इसलिए कोशिश करें कि टीवी के सामने बैठकर लगातार न खाएं।

डरावनी फिल्में देखने से डरावने सपने आते हैं और नींद खराब होती है। देर रात इस तरह की फिल्म देखने से बचें। कुछ विजुअल्स देखकर भावुक लोग परेशान हो जाते हैं। ज्यादा समय तक टीवी देखने का मतलब है संवाद की कमी। इसका नतीजा डिप्रेशन, अकेलापन और संबंधों में टूटन के रूप में सामने आ सकता है।

यह तो सिद्ध ही हो चुका है कि ज्यादा देर तक टी.वी. देखने से आपकी स्मरण व कल्पनाशक्ति कम होती है। टी.वी. पर जो लुभावने विज्ञापन आते हैं उन्हें निरंतर देखने से लोग अपने जीवन के प्रति असंतुष्ट और कुंठित हो जाते हैं।

इसमें कोई शक नहीं है कि टी.वी. शिक्षा और मनोरंजन के माध्यम के तौर पर शानदार आविष्कार है लेकिन अति हर चीज की बुरी होती है। अगर आपको या आपके घर में किसी को भी टी.वी. देखने की लत है तो उसे नियंत्रित करें, इससे पहले कि देर हो जाएं। यदि आपके पास समय है तो अपने किसी शौक की तरह ध्यान दें, अपना सामाजिक दायरा बढ़ाएं। लिखने पढऩे का शौक अपनाएं। इससे आप स्वस्थ रहेंगे शारीरिक तौर पर और मानसिक तौर पर भी।

- जे.के. शास्त्री

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