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संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ व्यापार समझौता भारतीय कृषि और डेयरी क्षेत्र को खतरे में डालेगा: राकेश टिकैत

संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ व्यापार समझौता भारतीय कृषि और डेयरी क्षेत्र को खतरे में डालेगा: राकेश टिकैत

मुजफ्फरनगर। किसानों का एक प्रतिनिधिमंडल अपने चिंताओं को जाहिर करने के लिए आज गिरिराज सिंह और डा. संजीव बलियान मंत्री पशुपालन, मत्स्य पालन और डेयरी से आज कृषि मंत्रालय में मिला।

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि भारतीय दुग्ध क्षेत्र मुख्य रूप से छोटे और सीमांत किसानों भूमिहीन पशुधन पालनकर्ताओं और महिला किसानों का प्रतिनिधित्व करता है। इस सौदे का प्रत्यक्ष रूप से 15 करोड़ पशुधन किसान परिवारों, जिनमें से बहुतों के पास केवल एक या दो जानवर हैं, उन पर सीधा असर पड़ेगा। जो मुख्य रूप से अपनी आजीविका के लिए दुग्ध डेयरी पर निर्भर हैं। हमारे पास दुग्ध उत्पादकों की अपनी सहकारी समितियाँ हैं, जो देश के दुग्ध बाजार में सबसे बड़ी हिस्सेदारी रखती हैं। अब हम सब चिंतित है कि अमेरिका के साथ आगामी व्यापार समझौता अमेरिकी डेयरी उत्पादों को भारतीय बाजारों तक पहुंच प्रदान करने के लिए है। अमेरिकी पशु आहार की सामग्री भी हमें अस्वीकार्य है जिसमें गैर.शाकाहारी और जीएम फसलों पर आधारित घटक शामिल हैं।

इन व्यापार सौदों में हमारे किसानों को भारी सब्सिडी वाले अमेरिकी उत्पादकों के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए छोड़ा जा रहा है। किसी समान स्तर का निर्माण किये बिना अमेरिकी कृषि विधेयक 2019 में अमेरिकी किसानों के लिए सब्सिडी के रूप में 867 अरब डॉलर आवंटित किया गया है। दूसरी ओर एक अध्ययन से पता चलता है कि वर्ष 2000 से 2016 में भारतीय किसानों को दिया जाने वाला कुल उत्पादक समर्थन मूल्य अनुमानत: 14 प्रतिशत कम रहा है। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने यह भी कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका विश्व व्यापार संगठन में हमारे किसानों की आजीविका को खतरा है। हमारी सरकार द्वारा यहां खाद्य उत्पादकों को दिए जा रहे अल्प समर्थन यसार्वजनिक खरीद के माध्यम से पर आपत्ति जताई गई है। किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने भारत सरकार से आग्रह किया कि वह संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ किसी भी व्यापारिक समझौते को आगे न बढ़ाए, जिसमें कृषि शामिल है और जो हमारे खेत की आजीविका के लिए खतरा है।

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