Top

मत्स्य विभाग की लापरवाहियों के चलते सरकारी तालाब में पल रही प्रतिबंधित मछलियां

मुज़फ्फरनगर। उत्तर प्रदेश में भले ही सरकार ने प्रतिबंधित माँसाहारी मांगुर मछली के पालन और बिक्री पर रोक लगा दी हो, लेकिन आज भी बाजारों में मांसाहारी मांगुर मछली धड़ल्ले से बिक रही है। इतना ही नहीं मुज़फ्फरनगर के सदर ब्लॉक के गांव निराना में सरकारी पट्टे के ग्राम पंचायत के डेढ़ हेक्टेयर तालाब में ग्राम प्रधान के संरक्षण में मांगुर मछली का पालन ही नहीं बल्कि तैयार हो चुकी मछलियों का धड़ल्ले से व्यापार भी किया जा रहा है। मत्स्य विभाग जहां कुम्भकर्णी नींद में सोया हुआ है, वहीं तालाब से मांगुर मछली निकाले जाने की सूचना पर जिला प्रसाशन ने कठोर कार्यवाही करने के निर्देश मत्स्य विभाग को दिये हैं। पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रही है विदेशी थाई मांगुर पालने वाले मछली पालकों और बिक्री करने वाले व्यापारियों पर कड़ी कानूनी कार्यवाही करने सरकार ने भले ही फरमान जारी कर रखा हो, लेकिन उत्तर प्रदेश में आज भी मांगुर मछलियों का पालन और व्यापार धड़ल्ले से चल रहा है, जबकि एनजीटी ;राष्ट्रीय हरित क्रांति न्यायाधिकरण्द्ध ने 22 जनवरी को इस संबंध में निर्देश भी जारी किए हैं, जिसमें यह कहा गया हैं कि मत्स्य विभाग के अधिकारी टीम बनाकर निरीक्षण करें और जहां भी इस मछली का पालन को हो रहा है, उसको नष्ट कराया जाए। निर्देश में यह भी कहा गया है कि मछलियों और मत्स्य बीज को नष्ट करने में खर्च होने वाली धनराशि उस व्यक्ति से ली जाए, जो इस मछली को पाल रहा हो। इस मछली को वर्ष 1998 में सबसे पहले केरल में बैन किया गया था। उसके बाद भारत सरकार द्वारा वर्ष 2000 देशभर में इसकी बिक्री पर प्रतिबंधित लगा दिया गया था। यह मछली मांसाहारी है, यह इंसानों का भी मांस खाकर बढ़ जाती है। ऐसे में इसका सेवन सेहत के लिए भी घातक है। इसी कारण इस पर रोक लगाई गई थी। मुज़फ्फरनगर के जानसठ ब्लॉक के गांव निराना में जहां 1.9 हेक्टेयर ग्राम पंचायत भूमि पर बने इस विशाल तालाब में जहां दर्जनों मछियारों ने इस विशाल तालाब से सरकार की प्रतिबंधित मांसाहारी मांगुर मछलियों को निकालने के लिये अपना जाल बिछाया है। घंटों की मशक्कत और मेहनत के बाद इन मछियारों के जाल में भारी भरकम मांगुर मछलियां तड़प रही हैं। तालाब से निकली कुन्तलों मांगुर मछलियों को निकालने का कार्य बाकायदा ग्राम प्रधान इस्तखार के संरक्षण में चल रहा है। इतना ही नहीं इन कुन्तलों वजन की मछलियों को बाजार ले जाने के लिये ट्रक की व्यवस्था भी की गई है। खसरा 333 में अंकित इस तालाब का रकबा 1.9 हेक्टेयर है, जिसे सन् 2016 से निराना ग्राम प्रधान इस्तखार द्वारा सरकार की प्रतिबंधित मांसाहारी मछली मांगुर का पालन कर अपनी दबंगई के चलते व्यापार भी किया जा रहा है। इस सम्बन्ध में तालाब पर मौजूद जब ग्राम प्रधान इस्तखार से बात की गई, तो उन्होंने यह बात तो स्वीकार की पिछले चार वर्षो से उन्हें इस तालाब में बहुत नुकसान हुआ है, लेकिन सरकार की प्रतिबंधित मांगुर मछलियों के पालन पर बात की तो तालाब से निकलने वाली मछलियों का नाम नहीं पता होकर पल्ला झाडऩे लगे। वहीं तालाब से निकली कुन्तलों मछलियों को 10-20 किलो मछलियां निकलने की बात की। ग्राम प्रधान का यह भी कहना है कि यह मछलिया पहले से ही थी इस तालाब में जिन्हें निकाले जाने का कार्य किया जा रहा है। यह ग्राम पंचायत का तालाब है। ग्राम निराना में तालाब पर मौजूद मछियारों के ठेकेदार मोहम्मद अजीम से बात की गई, तो ग्राम प्रधान इस्तखार ने ठेकेदार को कुछ भी बताने से इंकार करते हुए अपनी दबंगई दिखाने की कोशिश की गई। जिस पर ठेकेदार ने भी वक्त की नजाकत को देखकर तालाब से निकली मांगुर मछलियों को किसी और प्रजाति की मछली जैसे राहू, मुरादी, बिर्गेड, सिल्वर और चायना का नाम देकर गुमराह करने की कोशिश की है। मुजफ्रपफरनगर में सिपर्फ निराना गांव में ही तालाब नहीं है बल्कि पूरे जनपद की ग्राम पंचायतों में ऐसे ही सैंकड़ों तालाब होंगे जहां चोरी छिपे या अपनी दबंगई से लोगो ने सरकार प्रतिबंधित मांगुर मछलियों का पालन तालाबों में कर रखा है। सरकार द्वारा इन तालाबों को कश्यप जाति के पात्रों को ही आवंटित किये जाते हैं, लेकिन गांव के दबंग लोग या पिफर प्रधान कश्यप जाति के नाम पर इन तालाबों का आवंटन कराकर खुद की हिस्सेदारी या पूर्ण रूप से मालिकाना हक ले लेते हैं। हालांकि 2016 में संदीप पुत्रा सुरेश के नाम से आवंटित इस तालाब पर मत्स्य विभाग की नजर क्यों नहीं पड़ी यह एक जांच का विषय है। आज इस घटना की सूचना पर जिला प्रसाशन ने यह तो स्वीकार किया कि माँगुर मछली प्रतिबंधित है और इस तालाब से निकलने वाली मछलियों की जांच मत्स्य विभाग द्वारा कराइ जाएगी और यदि वास्तव में यह मांगुर मछली है, तो उसे नष्ट भी कराया जायेगा और मछली पालक पर कानूनी कार्यवाही अम्ल में ले जायेगी जिला प्रसाशन ने तहसीलदार और लेखपाल को इस मामले की जांच पड़ताल के लिए लगाया है। सरकार ने भले ही मांसाहारी मांगुर मछली के पालन और बिक्री पर रोक लगा कर सम्पूर्ण भारत में प्रतिबंद कर दिया हो, लेकिन मत्स्य विभाग की लापरवाहियों के चलते मछलियों का पालन भी हो रहा है और बाजारो में खुले आम व्यापार भी हो रहा है।

Share it