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सूखी पत्तियों को जलाने के बजाय खेत में ही ट्रेश मल्चिंग करें किसान: जिलाधिकारी

सूखी पत्तियों को जलाने के बजाय खेत में ही ट्रेश मल्चिंग करें किसान: जिलाधिकारी

मुजफ्फरनगर। जिलाधिकारी सेल्वा कुमारी जे. ने आज स्वयं अपने अधीनस्थ अधिकारियों के साथ ग्राम तालडा के प्रगतिशील कृषक विरेन्द्र कुमार के गन्ने के खेत पर पहुंचकर गन्ना कटाई उपरान्त खाली हुए खेत में गन्ने की पत्तियों एवं ठूंठ की मल्चिंग देखी और इससे किसानों व पर्यावरण को होने वाले फायदे के बारे में भी जानकारी ली। किसान वीरेन्द्र कुमार ने जिलाधिकारी को बताया कि वे वर्ष 2014 से ही आर्गेनिक खेती करते हैं और खेत में किसी भी प्रकार की रासायनिक उर्वरक अथवा पेस्टीसाइड्स का उपयोग नहीं करते हैं, जिस कारण उनके खेत की उर्वरा शक्ति बनी हुई है। इसी क्रम में उनके द्वारा यह भी बताया गया कि गन्ना कटाई उपरान्त गन्ने की सुखी पत्तियों को कुछ किसान भाई खेत में ही जला देते हैं, जिस कारण एक ओर मृदा का जीवांश नष्ट होता है, वहीं दूसरी ओर इससे पर्यावरण को भी क्षति पहुंचती है। विरेन्द्र कुमार ने जिलाधिकारी को अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे पिछले पांच सालों से गन्ने की सूखी पत्तियों को खेत मे ही आधुनिक कृषि यन्त्रों जैसे मल्चर, एम.बी., प्लाऊ और हैरो से खेत में काटकर गला देते हैं, जिस कारण खेत की उर्वरा शक्ति बढती हे और उन्हे अलग से कोई रासायनिक उर्वरक नहीं डालना पडता है। किसान ने जिलाधिकारी को अपने गन्ने के खाली खेत जिसमें गन्ने की सूखी पत्तियों ओर ठूंठ था, में सबसे पहले मल्चर का प्रयोग और उसके बाद हैरो एम.बी. प्लाऊ का प्रयोग कर खेत की पूरी तैयारी दिखाई। किसान के उपरोक्त क्रियाओं से खेत पूरी तरह गेहंू की बुवाई के लिए तैयार हो गया। किसान ने अपना एक खेत, जिसमे उसके द्वारा गन्ने की ट्रैश मल्चिंग उपरान्त गेहंू की बुवाई की गई थी, को भी दिखाया गया। गेहंू का जमाव बहुत बढिय़ा देखा गया। इसी क्रम में जिलाधिकारी ने धान की कटाई उपरान्त पराली की खेत में मल्चिंग भी देखी। इस खेत में किसान द्वारा बिना पराली जलाये ही मल्चिंग कर गेंहू की बुवाई की जानी है। जिलाधिकारी के निरीक्षण के समय उपस्थित डा.वीरेश सिंह, संयुक्त निदेशक गन्ना शोध केन्द्र, मुजफ्फरनगर ने बताया कि गन्ने की पत्तियों में उपलब्ध सभी मैक्रो और सुक्ष्म पोशक तत्व भी मृदा में मिल जाते हैं, जिस कारण मृदा की उर्वरा शक्ति और जीवांश की मात्रा बढती है। जिलाधिकारी ने जनहित में यह अपील भी की कि किसान गन्ने की सूखी पत्तियों को खेत में ही मल्चर, एम.बी. प्लाऊ और हैरो चलाकर दबाएं और गलाएं, क्योंकि इनको जलाने से एक ओर पर्यावरण का नुकसान होता है वहीं दूसरी ओर मृदा का जीवांश घटता है। इस मौके पर मुख्य विकास अधिकारी आलोक यादव, जिला गन्ना अधिकारी डा. आर.डी.द्विवेदी, चीनी मिल टिकौला के गन्ना महाप्रबन्धक ऋषिराज शर्मा सहित काफी संख्या में प्रगतिशील किसान उपस्थित रहें।

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