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पालिका प्रांगण में जमकर गरजे विद्युत अधिकारी व कर्मचारी...शीघ्र न्याय न मिलने पर दी उग्र आंदोलन की चेतावनी

पालिका प्रांगण में जमकर गरजे विद्युत अधिकारी व कर्मचारी...शीघ्र न्याय न मिलने पर दी उग्र आंदोलन की चेतावनी

मुजफ्फरनगर। मंगलवार को एक बार फिर से जीपीएफ और सीपीएपफ की धनराशि में घोटाले को लेकर विद्युत विभाग के कर्मचारी/अधिकारी टाउनहाल में पालिका प्रांगण में आयोजित धरने पर जमकर गरजे। इस दौरान जनपद के विद्युत विभाग कीे सभी चारों डिवीजन में पूर्ण कार्य बहिष्कार रहा। इस दौरान जनपद के करीब 30 कैश काउंटर बन्द रहने के कारण विद्युत विभाग को करीब 4 करोड़ रुपये की हानि का सामना करना पड़ा है। विद्युत अफसरों व कर्मचारियों ने एकजुटता प्रदर्शित करते हुए अपने हक का पैसा नहीं दिये जाने पर उग्र आंदोलन की भी चेतावनी दी है। आंदोलन पर उतरने विद्युत विभाग के अधिकारी व कर्मचारियों ने आरोपी चेयरमैन को गिरफ्तार करने की मांग की है। यूपी पावर सैक्टर इम्प्लाइज ट्रस्ट एवं अंशदायी कर्मचारी भविष्य निधि में जमा कर्मचारियों व अधिकारियों के जीपीएफ तथा सीपीएफ की धनराशि नियम विरुद्ध विभिन्न कम्पनियों में निवेश किये जाने से राशि के डूबने के बार विद्युत विभाग में एक बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। विद्युत अधिकारी व कर्मचारी इसे घोटाला बताते हुए लगातार आंदोलन कर रहे हैं। इसी कड़ी में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर राज्य में विद्युत कर्मचारी दो दिवसीय कार्य बहिष्कार पर हैं। मंगलवार को दूसरे दिन हड़ताल का जनपद में व्यापक असर देखा गया। विद्युत अधिकारी और कर्मचारी एकजुटता प्रदर्शित करते हुए टाउनहाल में सुभाष चन्द बोस की प्रतिमा पर जमा हुए और यहां धरना दिया। यहां पर धरने को सम्बोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि जीपीएफ व सीपीएफ के रूप में जमा राशि के डूब जाने के कारण भविष्य को लेकर कर्मचारियों में भारी निराशा व अवसाद का वातावरण बना हुआ है। कर्मचारी और अधिकारी भारी तनाव में चले गये हैं। इससे विभागीय कामकाज पर भी असर पड़ रहा है। वक्ताओं ने कहा कि स्वयं उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन ने यह माना है कि यूपी पावर सैक्टर इम्प्लाइज ट्रस्ट व भविष्य निधि की 99 प्रतिशत से अधिक धनराशि नियम विरुद्ध गलत ढंग से केवल 3 हाउसिंग कम्पनियों में निवेशित की गयी है, जिससे 65 प्रतिशत से अधिक धनराशि केवल एक कम्पनी डीएचएफएल में निवेशित कर दी गयी। इस आंदोलन के दौरान संघर्ष समिति ने सरकार से यह मांग की है कि इस मामले में तत्काल प्रभावी हस्तक्षेप करते हुए एक गजट नोटिफिकेशन जारी किया जाये। इसके साथ यह सुनिश्चित किया जाये कि ट्रस्ट एवं अंशदायी भविष्य निधि के भुगतान की जिम्मेदारी उ.प्र. सरकार द्वारा ली गयी। वक्ताओं ने कहा कि संघर्ष समिति ने इस घोटाले के सर्वाधिक जिम्मेदार यूपी पावर कारपोरेशन के चेयरमैन, जो ट्रस्ट के भी चेयरमैन हैं, को मानते हुए उनको तत्काल बर्खास्त कर गिरफ्तार करने की मांग की है। इस आंदोलन के दूसरे दिन मंगलवार को भी प्रदर्शन में अफसरों व कर्मचारियों ने पूरे जोश के साथ प्रतिभाग किया। इस दौरान जनपद के चारों डिवीजनों के करीब 30 कैश काउंटर के साथ साथ खण्ड व उप खण्ड तथा मण्डल कार्यालयों को बन्द रखते हुए कार्य बहिष्कार किया गया। इसके चलते इन दो दिनों में विद्युत विभाग को करीब 4 करोड़ रुपये के राजस्व की हानि का सामना करना पड़ा है।आंदोलन के तहत आज आयोजित विरोध सभा में अभियंता संघ, राज्य विद्युत परिषद, प्राविधिक कर्मचारी संगठन, विद्युत कर्मचारी मोर्चा, हाइड्रो इलैक्ट्रिक इम्प्लाइज यूनियन, विद्युत मजदूर संगठन, विद्युत मजदूर पंचायत आदि संगठनों के सदस्यों ने विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले प्रदर्शन में हिस्सा लिया। इस दौरान एसडीओ प्रणव चौधरी को स्थायी रूप से संयोजक नियुक्त किया गया। धरने की अध्यक्षता विद्युत वितरण मण्डल प्रथम के अधिक्षण अभियंता इं. मुकेश कुमार ने की। मुख्य रूप से अधिक्षण अभियंता इं. एसके गुप्ता, इं. आरडी सिंह, अधिशासी अभियंता इं. पंकज कुमार, इं. राजेश कुमार, इं. अजय कैम, इं. भुवनराज सिंह, इं. सचिन कुमार शर्मा, इं. अजय यादव, इं. आईपी सिंह, इं. अंकित कुमार व रामनिवास त्यागी, बिजेन्द्र चौधरी, रामगोपाल शर्मा, संजय चौधरी, दिनेश गौतम, विमल, गौरव कौशिक, अमित मलिक, संजय गर्ग, अभिनव गोयल, अजय कुमार त्यागी, आशीष शर्मा, मनीष गुप्ता, विशाल कुमार, सन्नीकान्त शर्मा, प्रवीन चौधरी ने भी सभा को सम्बोधित किया।

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