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तीन घंटे की छूट ने फेर दिया मेहनत पर पानी...-सब्जी लेने के लिए भारी मात्रा में मंडियों में एकत्र होते हैं लोग

तीन घंटे की छूट ने फेर दिया मेहनत पर पानी...-सब्जी लेने के लिए भारी मात्रा में मंडियों में एकत्र होते हैं लोग

मुजफ्फरनगर। आम जनमानस को कोरोना वायरस से बचाने की कवायद में जुटी सरकार ने पूरे देश में लॉकडाउन की घोषणा की है। जिसके चलते शासन-प्रशासन पुलिस के सहयोग इसे अमलीजामा पहनाने में लगा हुआ है, लेकिन लोग सरकार को इस लॉकडाउन में सहयोग देने के लिए तैयार नहीं है। वह तो भला हो पुलिस का कि वह सख्ती दिखाते हुए बाजारों को बंद करा रही है और लोगों को हलका कर सड़कों पर उनकी आवाजाही रोक रही है। शासन प्रशासन ने प्रात: छह बजे से नौ बजे तक आवश्यक वस्तुओं की खरीदारी के लिए आम जनमानस को छूट दी है, लेकिन लोग इसका नाजायज फायदा उठाने से भी बाज नहीं रहे हैं। बाजार में आवश्यक वस्तुओं की खरीदारी करने वालों से ज्यादा तमाशबीनों की भीड़ है। जिस कारण बाजार में भारी भीड़भाड़ का आलम तैयार हो रहा है। उधर धनाढ्य वर्ग भीड़भाड़ का आलम तैयार करने में मेहनत मजदूरी कर खाने वालों से ज्यादा अपना सहयोग दे रहा है। धनाढ्य वर्ग अपनी जीभ पर काबू करने के लिए तनिक भी तैयार कर नहीं है और वह रोजाना की जिंदगी जीना पसंद कर रहा है।

बाजारों से ऐसी ऐसी वस्तुओं की खरीदारी की जा रही है, जो जीवन के लिए आवश्यक नहीं है। आखिरकार हम बिना कार्य के घर से बाहर निकल कर क्या संदेश देना चाहते हैं। लोगों का कहना था कि प्रशासन को प्रात: को सब्जी आदि को लेकर दी जा रही तीन घंटे की छूट को समाप्त कर देना चाहिए। एक ओर तो प्रशासन किरयाने का सामान व दवाई को लेेकर उचित दूरी का फार्मूला लागू कर रहा है। वहीं दूसरी ओर सब्जी मंडी में सब्जी आदि की खरीदारी को लेकर तीन घंटे की छूट दे रहा है। इसमें उचित दूर का फार्मूला नहीं लागू किया जा रहा है। होना तो यह चाहिए था कि इसे पूर्णतया बंद करे, जब गलियों में सब्जी बेचने की छूट दी गयी है, तो फिर यह तीन घंटे की छूट क्यों। गलियों में सब्जी बेचने वाले जो मंडी में जाते हैं, वहीं पर प्रशासन को उनके नंबर आदि लेकर उन्हें रेट लिस्ट लगा कर सब्जियों को गलियों में बेचने की अनुमति दे। जिसके पास रेट लिस्ट न हो, उसे जब्त किया जाए। मंडी में केवल उन्हीं सब्जी विक्रेता को सब्जी दी जाए, जिनके पास प्रशासन के द्वारा जारी की सूची हो। इसके अतिरिक्त किसी को सब्जी न दी जाए।

देखने में आ रहा है कि प्रशासन की रेट लिस्ट के अनुसार वह सब्जी नहीं बेच रहे हैं, वह उससे दुगुने दाम पर बेच रहे हैं। प्रशासन की रेट लिस्ट केवल मुख्य बाजारों की दुकानों पर ही नजर आ रही है। गली मौहल्लों की दुकानों पर नहीं। होना तो यह चाहिए कि बिना रेट लिस्ट टंगे किसी को सामान बेचने की अनुमति न दे। ग्राहक के रूप में जाकर पता किया जाए कि कहीं कालाबाजारी व अधिक दाम तो नहीं वसूले जा रहे हैं।

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