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तोप को लेकर भाकियू व प्रशासन आए आमने-सामने...सूली वाला बाग पर ही रहेगी तोप-भाकियू, रात भी की पहरेदारी

पुरकाजी। ब्रिटिशकालीन तोप के पुरकाजी क्षेत्र के गांव में एक किसान के खेत से निकलने के बाद इस राष्ट्रीय धरोहर को लेकर पुलिस-प्रशासन और भारतीय किसान यूनियन आमने-सामने आ खड़े हुए हैं। जिलाधिकारी सेल्वा कुमारी जे. के करीब 6 माह के कार्यकाल में यह दूसरा अवसर है, जबकि भाकियू और प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति बनी है। इससे पहले स्कूली वाहनों पर कार्यवाही में प्रशासन के रवैये को लेकर भाकियू ने कलेक्ट्रेट में घेरा डाल लिया था। अब तोप को लेकर तनातनी बढ़ रही है। वहीं पुरकाजी में निकली इस तोप की हलचल उत्तराखंड में भी सुनाई दे रही है। प्रशासन के खिलाफ आंदोलन की तैयारी में जुटी भाकियू की हरिद्वार विंग को भी अलर्ट पर रखा गया है। वहीं सूली वाला बाग में पूरी रात भाकियू और पुलिस पहरेदारी पर डटे रहे। अब इस तोप प्रकरण के लिए भाकियू के शीर्ष नेतृत्व ने जिम्मेदारी तय कर यह स्पष्ट कर दिया है कि अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन का इतिहास समेटने वाली यह तोप सूली वाले बाग से नहीं हिलेगी।

सोमवार को पुरकाजी खादर क्षेत्र के गांव हरिनगर में किसान विनोद कश्यप के खेत से करीब छह टन से ज्यादा वजन की एक ब्रिटिश कालीन तोप खुदाई में निकली। इस तोप की जानकारी पहले से ही क्षेत्र के लोगों के साथ खेत के मालिक विनोद को थी। इस तोप के यहां से निकलने से उस तथ्य को भी बल मिला है, जिसमें पुरकाजी में अंग्रेजों की क्रूरता के गवाह सूली वाला बाग को लेकर सैंकड़ों लोगों की शहादत का दावा किया जाता है। यह तोप स्वतंत्रता आंदोलन का हिस्सा बतायी जा रही है, लोग कई प्रकार की चर्चा कर रहे हैं। विनोद कश्यप के अनुसार उनके बाबा ने इस तोप के बारे में बताया था। इसकी जानकारी गांव के अन्य लोगों को भी थी। करीब 15 साल पहले इस तोप को लेकर जिला प्रशासन को भी विनोद कश्यप के द्वारा सूचना दी गयी थी। उनका कहना है कि प्रशासन ने तोप की तलाश के लिए खुदाई नहीं कराई। इस बारे में पिछले दिनों नगर पंचायत पुरकाजी के चेयरमैन और भाकियू के प्रदेश महासचिव जहीर फारूकी को सूचना दी गयी, तो वह सोमवार को नगर पंचायत की पूरी टीम और जेसीबी लेकर हरिनगर स्थित विनोद कश्यप के खेत में जा पहुंचे और खेत की खुदाई शुरू करा दी थी। शाम के समय उनको सफलता मिली और ब्रिटिश कालीन तोप खेत में काफी गहराई से निकली। तोप निकलने के बाद इसे सूली वाला बाग पर लाकर रख दिया गया। यहां प्रशासन को इसकी जानकारी मिलने पर एडीएम प्रशासन अमित सिंह, सीओ सदर व पुलिस फोर्स सूली वाला बाग पर पहुंचे थे, वहीं भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत और जिलाध्यक्ष धीरज लाटियान भी कार्यकर्ताओं के साथ पहुंच गये थे।

भाकियू ने इस तोप को प्रशासन को सौंपने से इंकार कर इसे सूली वाला बाग पर स्थापित कराने का ऐलान कर दिया। इसके लिए भाकियू ने कैंप कर पहरेदारी शुरू कर दी थी। पुलिस भी डटी रही। अब मंगलवार को इस मामले में भाकियू ने पूरी तरह से मोर्चा खोल दिया है। भाकियू ने इस प्रकरण के लिए मंडल महासचिव राजू अहलावत को जिम्मेदारी सौंपी है। यह साफ कर दिया गया है कि प्रशासन किसी भी प्रकार की जिद ना करे, इसे पुलिस प्रशास को नहीं दिया जायेगा। राकेश टिकैत ने कहा कि प्रशासन से टकराव जैसी स्थिति के मूड में हम नहीं है, लेकिन तोप सूली वाला बाग पर ही रहेगी। यह राष्ट्रीय धरोहर है और इससे देशवासियों की भावना जुड़ी है। सूली वाला बाग प्रशासन का ही स्थान है। वहां पर इसे लगाने से युवाओं को भी प्रेरणा मिलेगी और ऐसी धरोहर सार्वजनिक स्थान के लिए ही हैं। मेरठ में पाकिस्तान युद्ध के गवाह छिपी टैंक को सार्वजनिक स्थान पर ही रखा गया है ताकि जनसामान्य को इससे प्रेरणा मिले। यह शौर्य और शहादत के प्रतीक है। आंदोलन के प्रतीक है। इनका एक इतिहास है। उन्होंने कहा कि तोप किसी के घर पर नहीं लगायी है। भाकियू इसकी लगातार निगरानी करेगी। तोप की जांच में भाकियू प्रशासन का हर संभव सहयोग करेगी। वहीं भाकियू ने इस प्रकरण में हरिद्वार (उत्तराखंड) की अपनी विंग को भी अलर्ट पर रखा है, जिससे वहां भी काफी हलचल है।

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