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चन्दन तिलक का महत्त्व और लाभ

चन्दन तिलक का महत्त्व और लाभ

मस्तक पर चंदन का तिलक सुगंध के साथ-साथ शीतलता प्रदान करता है। चंदन की शीतलता हमें उत्तेजना से निजात दिलाती है अर्थात उतेजना को नियंत्रित करता है और उतेजना के नियंत्रण से हम ठंढे दिमाग से कार्य करते है। परिणामस्वरूप हमारे कार्य निर्बाध रूप से चलता है। चंदन शीतलता का प्रतीक है यदि सर में दर्द है तो भी चन्दन लगाने की सलाह दी जाती है इस कारण भी चन्दन का तिलक लगाने से दिमाग में शांति एवं शीतलता बनी रहती है। भक्त भगवान् को चंदन अर्पण करने का भाव यह है कि हमारा जीवन आपकी कृपा रूपी सुगंध से भर जाए एवं हम व्यवहार से शीतलता बनी रहें।

भगवान् विशेष के अनुसार चन्दन का प्रयोग

विष्णु पूजन में – पीत चंदन

गणपति पूजन में – हरिद्रा चन्दन,

पितृ पूजन में – रक्त चन्दन,

शिव पूजन में – भस्म,

ऋषि पूजन में – श्वेत चन्दन,

मानव पूजन में – केशर चन्दन,

लक्ष्मी पूजा में – केसर एवं

तांत्रिक कार्यों में – सिंदूर का प्रयोग तिलक के लिए करना चाहिए।

चन्दन तिलक का महत्त्व और लाभ

चन्दन का तिलक मानसिक शांति और प्रसन्नता भी देती है।

मस्तक पर चन्दन लगानें वालो का ध्यान हमेशा अपनें ऊपर अर्थात भृकुटि मध्य ( तीसरी आँख ) पर लगा रहता है

इसी ध्यान से हम ध्येय की ओर आगे बढ़ते है। वस्तुतः यही तो सहज योग है।

मस्तक पर लगाया हुआ चन्दन तथा चन्दन लगाने का आकार- प्रकार यह बताता है कि यह व्यक्ति किस गुरू का शिष्य है अथवा किस सम्प्रदाय से सम्बन्ध लगता है।

चन्दन आज्ञा चक्र को ऊर्जा प्रदान करता है यही ऊर्जा व्यक्ति को सकारात्मक गति प्रदान करता है।

चन्दन का प्रयोग स्त्री-पुरुष अपने चेहरो को सुन्दर बनाने के लिए करते है।

मस्तक पर चन्दन लगाने के साथ साथ चन्दन का नाम लेना भी शुभ फलदायी और सुखदायी माना गया है –

मलयाचलसम्भूतचन्दनेन विमिश्रितम्।

इदं गन्धोदकं स्नानं कुङ्कुमाक्तं नु गृह्यताम्।।

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